लखनऊ। लोकदल के राष्ट्रीय अध्यक्ष चौधरी सुनील सिंह ने उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा जिला पंचायत चुनाव समय पर न कराए जाने तथा जिला पंचायत अध्यक्षों और उपाध्यक्षों को सीमित अधिकारों के साथ कार्यकाल विस्तार दिए जाने के प्रस्तावित कदम की कड़ी आलोचना की है। उन्होंने इसे लोकतंत्र, पंचायती राज व्यवस्था और संविधान के 73वें संशोधन की भावना पर सीधा हमला बताया।
चौधरी सुनील सिंह ने कहा कि सरकार चुने हुए जनप्रतिनिधियों को केवल नाममात्र के अधिकार देकर वास्तविक नियंत्रण जिला प्रशासन और अफसरशाही के हाथों में सौंपना चाहती है। उनका आरोप है कि यह गांवों की सरकार पर अफसरशाही का कब्जा स्थापित करने की कोशिश है।
उन्होंने सवाल उठाया कि जब जिला पंचायत अध्यक्ष जनता के वोट से चुने गए हैं तो उनके अधिकार सीमित क्यों किए जा रहे हैं। यदि सरकार लोकतंत्र में विश्वास करती है तो समय पर पंचायत चुनाव कराने से क्यों बच रही है।
लोकदल अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि पंचायत चुनाव टालना और निर्वाचित प्रतिनिधियों को सीमित अधिकार देकर कार्य कराना ग्रामीण लोकतंत्र को कमजोर करने की साजिश है। उन्होंने कहा कि गांवों के विकास, सड़क, पानी, शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य योजनाओं से जुड़े निर्णय जनता के चुने हुए प्रतिनिधियों को लेने चाहिए, न कि अफसरशाही को।
लोकदल की प्रमुख मांगें
- जिला पंचायत चुनाव तत्काल घोषित किए जाएं।
- सीमित अधिकारों के साथ कार्यकाल विस्तार का प्रस्ताव वापस लिया जाए।
- जिला पंचायतों के सभी वैधानिक अधिकार निर्वाचित प्रतिनिधियों को सौंपे जाएं।
- जिला पंचायतों में अफसरशाही का अनावश्यक हस्तक्षेप समाप्त किया जाए।
चौधरी सुनील सिंह ने कहा, “गांव की सत्ता गांव को दो। पंचायतों पर अफसरशाही नहीं चलेगी। चुनाव से भागना बंद करो और ग्रामीण लोकतंत्र की हत्या बंद करो।”








