हाईवे पर खड़ी रोडवेज बस में डंपर की टक्कर, तीन यात्रियों की मौत, परिचालक गंभीर
सोनिक (उन्नाव)। दही थाना क्षेत्र में शुक्रवार देर रात एक दर्दनाक सड़क हादसे में हाईवे किनारे खड़ी काशी डिपो की रोडवेज बस में पीछे से तेज रफ्तार डंपर ने टक्कर मार दी। हादसे में बस से उतरकर क्षति का जायजा ले रहे तीन यात्रियों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि परिचालक गंभीर रूप से घायल हो गया। हादसे के बाद डंपर चालक वाहन छोड़कर फरार हो गया। परिवहन विभाग ने मृतकों के परिजनों को 50-50 हजार रुपये की आर्थिक सहायता दी है। नियमानुसार 7.50 लाख रुपये का मुआवजा बाद में दिया जाएगा।
जानकारी के अनुसार, अयोध्या से कानपुर जा रही काशी डिपो की बस शुक्रवार रात दही चौकी के पास अचानक सामने आए एक लोडर से टकरा गई। टक्कर में बस का शीशा टूट गया और अन्य हल्की क्षति हुई। इसके बाद चालक लालबहादुर ने लोडर को रुकवाकर दही थाना स्थित रोडवेज वर्कशॉप मोड़ के पास बस को हाईवे के बाईं ओर खड़ा कर दिया। बस चालक, परिचालक इंद्रपाल (48) और कुछ यात्री नीचे उतरकर बस में हुए नुकसान का निरीक्षण करने लगे। यात्रियों को आगे भेजने के लिए दूसरी बस का इंतजार किया जा रहा था।
इसी दौरान लखनऊ की ओर से आ रहे तेज रफ्तार डंपर ने पीछे से बस में जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर इतनी भीषण थी कि बस करीब 10 मीटर आगे खिसक गई और उसके पास खड़े लोग उसकी चपेट में आ गए।
हादसे में बद्रीप्रसाद उर्फ राजेंद्र (47) निवासी बस्ती, रामनरेश रावत (35) निवासी अयोध्या और शरद गुप्ता (26) निवासी कानपुर की मौत हो गई। वहीं परिचालक इंद्रपाल (48) निवासी आजमगढ़ गंभीर रूप से घायल हो गए। उन्हें प्राथमिक उपचार के बाद कानपुर के हैलट अस्पताल रेफर किया गया।
दही थानाध्यक्ष ज्ञानेंद्र सिंह ने बताया कि दुर्घटनाग्रस्त वाहनों को हटवा दिया गया है। डंपर को कब्जे में ले लिया गया है, जबकि चालक मौके से फरार हो गया। मृतक बद्रीप्रसाद के बेटे गौतम की तहरीर पर डंपर चालक और रोडवेज बस चालक के खिलाफ लापरवाही से वाहन चलाने का मुकदमा दर्ज किया गया है।
टाइल्स कारीगर थे बद्रीप्रसाद
हादसे में जान गंवाने वाले बद्रीप्रसाद उर्फ राजेंद्र टाइल्स कारीगर थे। उनके भतीजे शोभित कनौजिया ने बताया कि बद्रीप्रसाद अक्सर बीमार रहते थे और उनका इलाज चल रहा था। वह करीब 20 दिन पहले गांव गए थे और खेती का काम निपटाकर कानपुर लौट रहे थे। उनकी कमाई से ही परिवार का भरण-पोषण होता था। उनके निधन से पत्नी पुष्पा, बेटा गौतम और बेटी भूमि का रो-रोकर बुरा हाल है।
नीलम ने एक ही दिन में पिता और पति को खोया
मृतक रामनरेश रावत खिलौनों का ठेला लगाकर परिवार का पालन-पोषण करते थे। उनकी पत्नी नीलम ने बताया कि शुक्रवार को उनके पिता का कानपुर में निधन हो गया था। वह पति रामनरेश और बच्चों अभिनव व अनिका के साथ अंतिम संस्कार में शामिल होने जा रही थीं। उन्होंने बताया कि पहले बस लोडर से टकराई थी, जिसके बाद चालक ने बस सड़क किनारे खड़ी कर दूसरी बस की व्यवस्था शुरू की। इसी दौरान पीछे से आए डंपर ने बस में टक्कर मार दी, जिससे उनके पति की मौत हो गई। रामनरेश तीन भाइयों में दूसरे नंबर पर थे। एक ही दिन में पिता और पति को खोने के बाद नीलम गहरे सदमे में हैं। इमरजेंसी वार्ड के बाहर वह बदहवास बैठी रहीं, जबकि दोनों बच्चे भी बिलखते रहे।
इकलौते बेटे की मौत से बेसहारा हुई मां
हादसे में जान गंवाने वाले शरद गुप्ता बनारस में साड़ी की दुकान पर काम करते थे। वह लखनऊ से रोडवेज बस में बैठकर कानपुर स्थित अपने घर लौट रहे थे। पोस्टमार्टम हाउस पहुंचीं उनकी मां गीता और बहन शिल्पी शव देखकर फूट-फूटकर रो पड़ीं। मां ने पहले बेटे का पोस्टमार्टम कराने से भी इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि उनके बेटे को कभी एक खरोंच तक नहीं आई थी।
परिजनों ने बताया कि शरद के पिता की 14 वर्ष पहले बीमारी से मौत हो गई थी। इसके बाद शरद ने ही परिवार की जिम्मेदारी संभाली थी। वह अपनी मां और बहन की हर जरूरत का ध्यान रखते थे। बेटे की मौत से गमगीन मां बार-बार कहती रहीं कि अब परिवार का सहारा कौन बनेगा। रक्षाबंधन पर बहन के लिए साड़ी और उपहार लाने वाला अब कभी नहीं आएगा। यह कहते-कहते वह बेहोश हो गईं।
बस चालक के खिलाफ पहले भी हो चुके हैं 12 चालान
परिवहन विभाग की जांच में डंपर और रोडवेज बस के फिटनेस सहित सभी दस्तावेज सही पाए गए हैं। हालांकि जांच में यह भी सामने आया कि बस चालक के खिलाफ इस वर्ष नो पार्किंग में वाहन खड़ा करने, जाम का कारण बनने और यातायात नियमों के उल्लंघन के मामलों में 12 चालान हो चुके हैं। अधिकारियों का कहना है कि बार-बार चालान होना चालक की लापरवाही को दर्शाता है। मामले की जांच जारी है।








