मां पाटेश्वरी विश्वविद्यालय और दीनदयाल शोध संस्थान ने मिलाया हाथ
पांच वर्षों तक संयुक्त रूप से चलाए जाएंगे शिक्षा, अनुसंधान, कौशल विकास और ग्रामीण उत्थान के कार्यक्रम
बलरामपुर, 25 जून। पूर्वांचल में शिक्षा, अनुसंधान और ग्रामीण विकास को नई दिशा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की गई है। मां पाटेश्वरी विश्वविद्यालय, बलरामपुर और दीनदयाल शोध संस्थान, जयप्रभा ग्राम (गोंडा) के बीच गुरुवार को एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए। इस साझेदारी का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों के विकास, किसानों की आय में वृद्धि, युवाओं को रोजगारोन्मुख बनाना तथा थारू जनजाति के सामाजिक और शैक्षणिक उत्थान को गति प्रदान करना है।
समझौते के तहत दोनों संस्थाएं कृषि प्रसार, किसान कल्याण, महिला सशक्तिकरण, युवा नेतृत्व विकास, स्वास्थ्य एवं स्वच्छता जागरूकता, कौशल विकास तथा स्वरोजगार से संबंधित विभिन्न कार्यक्रमों का संयुक्त रूप से संचालन करेंगी। इसके अतिरिक्त ग्रामीण क्षेत्रों में विकास संबंधी शोध कार्यों को भी बढ़ावा दिया जाएगा, जिससे स्थानीय समस्याओं के समाधान के लिए व्यावहारिक मॉडल विकसित किए जा सकें।
विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. रवि शंकर सिंह ने बताया कि इस एमओयू के माध्यम से विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों को भी व्यापक लाभ प्राप्त होगा। उन्हें इंटर्नशिप, शैक्षणिक भ्रमण, अनुभवात्मक अधिगम, शोध परियोजनाओं तथा संकाय आदान-प्रदान जैसी गतिविधियों में भाग लेने का अवसर मिलेगा। इससे विद्यार्थियों को अकादमिक ज्ञान के साथ-साथ जमीनी स्तर पर कार्य करने का व्यावहारिक अनुभव भी प्राप्त होगा।
दोनों संस्थाएं संयुक्त रूप से सेमिनार, कार्यशालाएं, प्रशिक्षण शिविर तथा जनजागरूकता अभियान आयोजित करेंगी। साथ ही सतत कृषि, पर्यावरण संरक्षण और प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन के क्षेत्र में भी मिलकर कार्य किया जाएगा। विशेष रूप से थारू छात्र-छात्राओं की शिक्षा, कौशल विकास और आत्मनिर्भरता पर विशेष ध्यान केंद्रित किया जाएगा।
विश्वविद्यालय के कुलसचिव परमानंद सिंह तथा दीनदयाल शोध संस्थान के प्रभारी रामकृष्ण तिवारी को इस समझौते का समन्वयक बनाया गया है। यह एमओयू अगले पांच वर्षों तक प्रभावी रहेगा।
शिक्षा और सामाजिक विकास से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि यह साझेदारी न केवल बलरामपुर और गोंडा क्षेत्र के लिए लाभकारी सिद्ध होगी, बल्कि ग्रामीण विकास और जनजातीय कल्याण के क्षेत्र में एक प्रभावी मॉडल के रूप में भी उभर सकती है।








