गोंडा में लगातार करीब 60 घंटे से हो रही बारिश और तेज हवाओं ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। शहर के कई इलाकों में जलभराव की स्थिति बनी हुई है, वहीं जगह-जगह पेड़ टूटकर सड़कों पर गिर गए हैं। कई स्थानों पर बिजली के तार और खंभे भी क्षतिग्रस्त होने से लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। शनिवार शाम करीब 4:30 से 5:30 बजे तक जिलाधिकारी प्रियंका निरंजन ने एसडीएम सदर जितेंद्र गौतम और नगर पालिका अधिकारियों के साथ शहर के प्रभावित इलाकों का निरीक्षण किया।
निरीक्षण के दौरान डीएम ने जलभराव वाले स्थानों और सड़कों पर गिरे पेड़ों की स्थिति देखी। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि जहां पानी अधिक जमा है, वहां जेसीबी लगाकर निकासी की व्यवस्था तत्काल कराई जाए। नालों की सफाई कराने के साथ ही सड़कों पर गिरे पेड़ों को भी जल्द हटाने के निर्देश दिए गए, ताकि यातायात सुचारु रहे और लोगों को आने-जाने में परेशानी न हो। लटके बिजली के तारों और गिरे खंभों को लेकर डीएम ने बिजली विभाग के अधिकारियों को तत्काल मरम्मत कराने और बारिश के बीच किसी हादसे की आशंका को देखते हुए सतर्क रहने को कहा।
डीएम ने सभी संबंधित विभागों को अगले 24 घंटे अलर्ट मोड में रहने के निर्देश दिए हैं। लोगों से भी अपील की गई है कि मौसम खराब रहने की संभावना को देखते हुए बेहद जरूरी होने पर ही घर से बाहर निकलें। बारिश के बीच गौशालाओं में पशुओं की स्थिति पर भी नजर रखी जा रही है। पशु चिकित्सा अधिकारी को आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं, जबकि स्वास्थ्य और आपदा प्रबंधन विभाग की टीमें किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए तैयार रखी गई हैं। जिले के अलग-अलग इलाकों में अधिकारी लगातार स्थिति का जायजा ले रहे हैं।
जिलाधिकारी प्रियंका निरंजन ने बताया कि 27 सितंबर तक भारी बारिश और आंधी को लेकर चेतावनी मिली थी, जिसके बाद आपदा विभाग और ग्राम पंचायतों के माध्यम से लोगों को सतर्क रहने की एडवाइजरी जारी की गई। जिले की छोटी-बड़ी नदियों के जलस्तर पर भी लगातार नजर रखी जा रही है। मनकापुर क्षेत्र में कुआनो नदी खतरे के निशान से ऊपर बह रही है, हालांकि अभी तक आबादी में पानी पहुंचने की सूचना नहीं है। प्रशासन की टीमें जलभराव, पेड़ गिरने और अन्य समस्याओं वाले स्थानों पर राहत कार्य में जुटी हैं और अधिकारियों को मौके पर पहुंचकर स्थिति संभालने के निर्देश दिए गए हैं।




















