ठाकरे बंधुओं की रैली पर आशीष शेलार का हमला
मुंबई। महाराष्ट्र सरकार में मंत्री और भाजपा नेता आशीष शेलार ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ शिवसेना (यूबीटी) और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) की ओर से निकाली गई विरोध रैली पर तीखा हमला बोला है। शेलार ने विश्व पशु दिवस के मौके पर आयोजित रैली पर तंज कसते हुए इसे ‘गरजना मोर्चा’ के बजाय ‘लोमड़ियों का मार्च’ बताया।
चुनाव हारने के बाद ईवीएम पर सवाल उठाने का आरोप
शेलार ने आरोप लगाया कि उद्धव ठाकरे, राज ठाकरे और विपक्षी दल चुनाव में अपेक्षित परिणाम नहीं मिलने के बाद इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) और चुनाव आयोग पर सवाल उठा रहे हैं। उन्होंने कहा कि जब कोई पार्टी चुनाव जीतती है तो ईवीएम पर सवाल नहीं उठाए जाते, लेकिन हार के बाद उसी व्यवस्था पर संदेह जताया जाता है।
भाजपा नेता ने कहा कि उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे को चुनाव आयोग पर सवाल उठाने से पहले अपने राजनीतिक मतभेदों और हालिया एकजुटता पर विचार करना चाहिए। उन्होंने दोनों नेताओं से ‘पहले खुद को आईना देखने’ की बात कही।
ईवीएम के इतिहास का दिया हवाला
बैलेट पेपर से चुनाव कराने की मांग पर शेलार ने कहा कि ईवीएम भाजपा सरकार की बनाई व्यवस्था नहीं है। उनके मुताबिक, ईवीएम के विकास की प्रक्रिया 1970 के दशक के आखिर में शुरू हुई थी और 1982 में केरल में इसका पहली बार इस्तेमाल किया गया था। उन्होंने यह भी कहा कि 1989 में तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी के कार्यकाल में जनप्रतिनिधित्व कानून में इससे संबंधित संशोधन किए गए थे।
शेलार ने दावा किया कि उद्धव ठाकरे की पार्टी ने 2007 और 2012 में मुंबई नगर निकाय चुनाव जीते और 2017 में भी ईवीएम के जरिए सत्ता बरकरार रखी। उन्होंने कहा कि मनसे ने भी 2009 के महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में 13 सीटें जीती थीं। इसी आधार पर उन्होंने विपक्ष के ईवीएम संबंधी रुख पर सवाल उठाया।
SIR को लेकर भी राज ठाकरे पर निशाना
शेलार ने विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर को लेकर भी राज ठाकरे पर निशाना साधा। उन्होंने दावा किया कि एसआईआर शुरू होने से पहले राज ठाकरे मतदाता सूची में दोहरे, मृत और कथित फर्जी मतदाताओं के नामों को लेकर चिंता जता चुके थे। शेलार के अनुसार, राज ठाकरे ने अक्टूबर-नवंबर 2025 और जनवरी 2026 में भी मतदाता सूची में सुधार की जरूरत बताई थी।
शेलार ने दावा किया कि एसआईआर के तहत करीब 90 फीसदी मतदाताओं की मैपिंग पूरी हो चुकी है और शेष मामलों की प्रक्रिया जारी है। उन्होंने कहा कि इस प्रक्रिया का उद्देश्य मतदाता सूची को अधिक व्यवस्थित और मजबूत बनाना है।
सीईसी को हटाने और दोबारा चुनाव की मांग पर सवाल
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने और महाराष्ट्र में दोबारा विधानसभा चुनाव कराने की मांग पर भी शेलार ने सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि ज्ञानेश कुमार ने 19 फरवरी 2025 को मुख्य चुनाव आयुक्त का पद संभाला था, जबकि महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव नवंबर 2024 में ही हो चुके थे।
शेलार ने दावा किया कि ज्ञानेश कुमार के कार्यकाल में छह राज्यों में चुनाव हुए, जिनमें तीन राज्यों में भाजपा या एनडीए की सरकार बनी, जबकि तीन राज्यों में गैर-भाजपा दलों की सरकारें आईं। उन्होंने इसी आंकड़े का हवाला देते हुए विपक्ष के चुनाव आयोग पर लगाए जा रहे आरोपों पर सवाल उठाया।




















