मायावती का सपा पर हमला
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव से पहले राज्यसभा चुनाव को लेकर सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। बहुजन समाज पार्टी (बसपा) प्रमुख मायावती ने समाजवादी पार्टी के राज्यसभा प्रत्याशियों के चयन पर सवाल उठाते हुए सपा पर निशाना साधा है। मायावती ने कहा कि सपा को चुनाव में पीडीए यानी पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक वर्गों का समर्थन चाहिए, लेकिन टिकट वितरण में परिवार और बड़े पूंजीपतियों को प्राथमिकता दी जाती है।
मायावती ने शुक्रवार को जारी अपने बयान में सपा के दो राज्यसभा प्रत्याशियों के नामों का जिक्र किया। उन्होंने सपा नेता रामगोपाल यादव को अखिलेश यादव का करीबी रिश्तेदार बताते हुए उनके दोबारा प्रत्याशी बनाए जाने पर सवाल उठाया। वहीं, दूसरे प्रत्याशी धनराज परिमल नथवानी को लेकर उन्होंने कहा कि वह एक बड़े उद्योग समूह से जुड़े हुए हैं। दोनों उम्मीदवारों ने 30 सितंबर को राज्यसभा चुनाव के लिए नामांकन दाखिल किया था।
तीसरे प्रत्याशी को लेकर क्या बोलीं मायावती?
सपा की ओर से तीसरे राज्यसभा प्रत्याशी के नाम की घोषणा अभी नहीं हुई है। इसी को लेकर मायावती ने दावा किया कि सपा का तीसरा प्रत्याशी केवल ‘फेस सेविंग’ के लिए मैदान में उतारा जाएगा और उसके चुनाव हारने की संभावना होगी। यह मायावती का राजनीतिक आकलन और आरोप है; सपा की ओर से तीसरे उम्मीदवार की जीत-हार को लेकर ऐसा कोई अंतिम निष्कर्ष सामने नहीं आया है।
दरअसल, उत्तर प्रदेश में राज्यसभा की 10 सीटों के लिए चुनाव होना है। सपा पहले ही रामगोपाल यादव और धनराज परिमल नथवानी को प्रत्याशी बना चुकी है। पार्टी की ओर से तीसरे उम्मीदवार को लेकर अभी सस्पेंस बना हुआ है। सपा नेताओं की ओर से तीसरा प्रत्याशी उतारने की बात कही गई है और संभावित नाम को लेकर राजनीतिक चर्चाएं जारी हैं।
पीडीए के मुद्दे पर सपा को घेरा
मायावती ने सपा की पीडीए राजनीति पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि सपा चुनाव के दौरान पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक वर्गों से समर्थन मांगती है, लेकिन अपने राजनीतिक पदों और टिकटों में परिवार तथा संपन्न वर्गों को प्राथमिकता देती है। उन्होंने इसे सपा की घोषित सामाजिक राजनीति और उसके टिकट वितरण के बीच विरोधाभास बताया।
बसपा प्रमुख ने अपने बयान में यह भी कहा कि उनकी पार्टी गरीब, मध्यम वर्ग और कमजोर तबकों के कार्यकर्ताओं को राजनीतिक अवसर देने की नीति पर काम करती है। यह मायावती और बसपा का राजनीतिक दावा है।
राज्यसभा चुनाव ने बढ़ाई सियासी हलचल
उत्तर प्रदेश की 10 राज्यसभा सीटों के चुनाव को लेकर सपा के तीसरे उम्मीदवार पर सभी की नजरें टिकी हैं। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक सपा के पास तीसरे उम्मीदवार को मैदान में उतारने की संभावनाओं पर विचार करने के लिए पर्याप्त अतिरिक्त वोटों का गणित है, हालांकि जीत के लिए उसे अतिरिक्त समर्थन की जरूरत पड़ सकती है। तीसरे प्रत्याशी के नाम और उसके समर्थन में संभावित विधायकों को लेकर अभी तस्वीर पूरी तरह साफ नहीं है।
राज्यसभा चुनाव से पहले मायावती के इस बयान ने सपा की रणनीति, पीडीए के सामाजिक समीकरण और तीसरे प्रत्याशी को लेकर चल रही राजनीतिक चर्चाओं को और तेज कर दिया है।





















