Sharda Sinha: छठ का नाम आते ही जिन आवाजों की सबसे पहले याद आती है, उनमें शारदा सिन्हा का नाम सबसे ऊपर है। बिहार के लोकगीतों और खासकर छठ गीतों को अपनी आवाज से घर-घर तक पहुंचाने वाली शारदा सिन्हा भले ही आज हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनके गीत अब भी लोगों की भावनाओं का हिस्सा हैं। उनकी आवाज में लोक संस्कृति की ऐसी मिठास थी, जिसे सुनते ही बिहार और गांव-घर का माहौल आंखों के सामने आ जाता है। शारदा सिन्हा की पहचान केवल लोकगायिका के तौर पर नहीं रही। उन्होंने हिंदी सिनेमा में भी अपनी आवाज का जादू बिखेरा और कई लोकप्रिय फिल्मों के गीतों को यादगार बना दिया। उनकी फिल्मी यात्रा की एक खास कड़ी सलमान खान और भाग्यश्री की सुपरहिट फिल्म ‘मैंने प्यार किया’ से जुड़ी है।
सलमान खान की फिल्म में मिली खास जगह
साल 1989 में रिलीज हुई मैंने प्यार किया ने सलमान खान और भाग्यश्री को रातोंरात बड़ी पहचान दिलाई थी। फिल्म की कहानी के साथ-साथ इसके संगीत को भी दर्शकों ने खूब पसंद किया। इसी फिल्म में शारदा सिन्हा की आवाज भी सुनाई दी थी। फिल्म के गीत ‘कहे तोसे सजना’ में उनकी आवाज ने लोक रंग भरने का काम किया। उनकी गायकी का अंदाज बाकी गानों से बिल्कुल अलग था। आवाज में मौजूद सहजता और देसीपन ने गीत को एक अलग पहचान दी। यही वजह है कि इतने साल बाद भी यह गाना शारदा सिन्हा के फिल्मी सफर की याद दिलाता है।
‘कहे तोसे सजना’ आज भी है खास
‘कहे तोसे सजना’ शारदा सिन्हा के उन गीतों में शामिल है, जिन्हें सुनते ही उनकी खास गायकी याद आ जाती है। बॉलीवुड के बड़े पर्दे पर उनकी आवाज ने लोक संगीत की खुशबू पहुंचाई। यह उनके लिए इसलिए भी खास था क्योंकि इससे पहले ही वह बिहार और पूर्वी भारत के लोक संगीत में अपनी मजबूत पहचान बना चुकी थीं। शारदा सिन्हा ने आगे भी हिंदी फिल्मों में अपनी आवाज दी। ‘हम आपके हैं कौन’ के लोकप्रिय गीत ‘बाबुल जो तुमने सिखाया’ में भी उनकी आवाज सुनने को मिली। इस गीत ने भी श्रोताओं के बीच खास जगह बनाई।
लोकगीतों ने बनाया घर-घर का नाम
फिल्मों में पहचान मिलने से काफी पहले शारदा सिन्हा लोक संगीत की दुनिया में बड़ा नाम बन चुकी थीं। बिहार की लोक परंपरा, विवाह गीत और छठ के गीत उनकी गायकी की सबसे बड़ी पहचान रहे। उनकी आवाज में बनावटीपन नहीं था, यही वजह थी कि उनके गीत सीधे लोगों के दिल तक पहुंचते थे। उनके गानों में गांव की मिट्टी, रिश्तों की गर्माहट और लोक संस्कृति की झलक साफ महसूस होती थी। यही कारण है कि कई पीढ़ियों के लोग उनके गीतों से खुद को जोड़ पाए।
निधन के बाद भी जिंदा है आवाज
शारदा सिन्हा का निधन 5 नवंबर 2024 को हुआ, लेकिन उनकी आवाज आज भी लोगों के बीच मौजूद है। खासकर छठ पर्व के दौरान उनके गीत हर तरफ सुनाई देते हैं। कई परिवारों के लिए उनके छठ गीत त्योहार की परंपरा का हिस्सा बन चुके हैं। उनकी खासियत यही थी कि उन्होंने लोक संगीत को सिर्फ गाया नहीं, बल्कि उसे नई पीढ़ी तक पहुंचाने का काम भी किया। बॉलीवुड में गाए उनके गीत इस बात की याद दिलाते हैं कि लोक संगीत की सादगी और मिठास बड़े पर्दे पर भी लोगों के दिलों में जगह बना सकती है।






















