बस पर 19 चालान फिर भी जारी रहा संचालन
ग्रेटर नोएडा। यमुना एक्सप्रेसवे पर बुधवार देर रात हुए भीषण बस अग्निकांड ने यात्री सुरक्षा और परिवहन व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। दिल्ली के कश्मीरी गेट से महोबा जा रही स्लीपर बस में आग लगने से नौ यात्रियों की मौत हो गई। हादसे के समय बस में करीब 30 से 35 यात्री सवार थे। कई यात्रियों ने खिड़कियों के शीशे तोड़कर और बस से कूदकर अपनी जान बचाई।
हादसा यमुना एक्सप्रेसवे पर जेवर क्षेत्र में 33वें किलोमीटर के आसपास रात करीब 11:30 बजे हुआ। पुलिस और दमकल टीमों ने मौके पर पहुंचकर आग पर काबू पाया। चालक और परिचालक को हिरासत में लेकर मामले की जांच की जा रही है।
यात्रियों ने ड्राइवर पर लगाया बस नहीं रोकने का आरोप
हादसे से जुड़े यात्रियों के बयानों में ड्राइवर की भूमिका को लेकर सवाल उठे हैं। एक यात्री के मुताबिक बस में आग लगने से पहले धुआं और बदबू महसूस हो रही थी, लेकिन बस तत्काल नहीं रोकी गई। बाद में धुआं बढ़ने पर स्थिति बेकाबू हो गई। इन आरोपों की पुलिस जांच कर रही है, इसलिए ड्राइवर की लापरवाही को फिलहाल जांच का विषय माना जा रहा है।
धुआं तेजी से बस के भीतर फैलने के कारण यात्रियों में अफरा-तफरी मच गई। कुछ लोग दरवाजे से बाहर निकलने में सफल रहे, जबकि कई यात्रियों ने खिड़कियों के शीशे तोड़कर बाहर निकलने की कोशिश की। आग इतनी तेजी से फैली कि नौ यात्रियों की जान नहीं बचाई जा सकी।
हादसे के बाद सामने आए 19 चालान
हादसे के बाद बस के पुराने रिकॉर्ड की जांच में कई नियम उल्लंघन सामने आए हैं। उपलब्ध सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार बस के खिलाफ अलग-अलग उल्लंघनों को लेकर कुल 19 चालान दर्ज थे, जिनकी रकम करीब 1.75 लाख रुपये बताई गई है। इसके बावजूद बस का संचालन जारी रहा।
रिपोर्ट के मुताबिक इनमें परमिट से जुड़े उल्लंघन, रेट्रोफिटिंग और ईंधन से संबंधित नियमों के उल्लंघन के मामले शामिल थे। जनवरी 2026 में कम उम्र के चालक से बस चलवाने को लेकर भी चालान किए जाने की जानकारी सामने आई है। जून 2025 में ईंधन परिवर्तन और रेट्रोफिटिंग से जुड़े नियमों के उल्लंघन पर भी कार्रवाई हुई थी।
इंजन से आवाज आने की शिकायत का भी दावा
बस के इंजन से असामान्य आवाज आने की शिकायतों का भी उल्लेख सामने आया है। रिपोर्टों के अनुसार इन शिकायतों के बावजूद बस के संचालन को रोककर उसकी तकनीकी जांच कराने के बजाय यातायात चालान किए जाते रहे।
बस के रंग को लेकर भी रिकॉर्ड और मौके की स्थिति में अंतर की बात सामने आई है। रिपोर्ट के अनुसार पंजीकरण प्रमाणपत्र में बस का रंग काला दर्ज था, जबकि हादसे के समय बस पीले और सफेद रंग की दिखाई दे रही थी। रेट्रोफिटिंग से जुड़े चालानों के संदर्भ में भी इस पहलू की जांच की जा रही है।
हादसे की वजह की जांच जारी
पुलिस हादसे के वास्तविक कारण का पता लगाने में जुटी है। प्रारंभिक जांच में एसी सिस्टम से चिंगारी या विस्फोट के बाद आग फैलने की आशंका जताई गई है, हालांकि अंतिम कारण जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा।
इस घटना ने यह सवाल भी खड़ा किया है कि जिन यात्री वाहनों के खिलाफ बार-बार नियम उल्लंघन के मामले दर्ज होते हैं, उनकी फिटनेस, परमिट और तकनीकी स्थिति की निगरानी किस स्तर पर की जाती है। नौ यात्रियों की मौत के बाद अब बस के पुराने चालानों और शिकायतों की भूमिका भी जांच के दायरे में है।





















