सुल्तानपुर। आजादी के जश्न के बीच गुरुवार को सुल्तानपुर शहर तिरंगों से सजा नजर आया। स्कूली बच्चों से लेकर आम नागरिकों तक हजारों लोगों ने तिरंगा यात्रा में उत्साह के साथ हिस्सा लिया। हाथों में तिरंगा और जुबां पर देशभक्ति के नारे थे। शहर का माहौल पूरी तरह उत्सव में बदल गया, लेकिन इसी बीच यात्रा में उमड़ी भीड़ ने शहर की यातायात व्यवस्था की भी परीक्षा ले ली।
तिरंगा यात्रा के दौरान प्रमुख मार्गों पर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं और कई जगह लोगों को काफी देर तक जाम में फंसे रहना पड़ा। बताया गया कि मुख्य विकास अधिकारी की गाड़ी भी जाम में फंस गई। आम राहगीरों के लिए भी स्थिति आसान नहीं रही। एक ओर लोग देशभक्ति के इस आयोजन का हिस्सा बन रहे थे, तो दूसरी ओर अपने जरूरी काम के लिए निकलने वाले लोगों को रास्ते में काफी इंतजार करना पड़ा।
सबसे ज्यादा चिंता स्कूली बच्चों को लेकर सामने आई। बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं यात्रा में शामिल हुए और उन्हें लंबी दूरी तक पैदल चलना पड़ा। तेज धूप के बीच कुछ छात्राएं प्यास और थकान से परेशान नजर आईं। इतने बड़े आयोजन में पेयजल, प्राथमिक चिकित्सा और बच्चों के आराम की पर्याप्त व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठे। लोगों का कहना है कि जब पहले से हजारों लोगों के जुटने की संभावना थी, तो ट्रैफिक डायवर्जन और जरूरी सुविधाओं की तैयारी और बेहतर होनी चाहिए थी।
तिरंगा यात्रा ने निश्चित तौर पर सुल्तानपुर में देशभक्ति और एकता का माहौल बनाया, लेकिन साथ ही व्यवस्थाओं को लेकर कुछ सवाल भी छोड़ दिए। ऐसे आयोजनों में भीड़ का उत्साह अपनी जगह है, मगर बच्चों और आम लोगों की सुविधा भी उतनी ही जरूरी है। तिरंगा पूरे सम्मान के साथ लहराता रहे और लोगों को किसी परेशानी का सामना न करना पड़े, इसके लिए प्रशासन और आयोजकों के बीच बेहतर तालमेल की जरूरत साफ दिखाई दी।






















