उन्नाव। बीघापुर क्षेत्र के दांदामऊ गांव में गुरुवार को उस समय माहौल गमगीन हो गया, जब सेना के सूबेदार शैलेंद्र पांडेय का पार्थिव शरीर तिरंगे में लिपटकर उनके पैतृक गांव पहुंचा। शव के पहुंचते ही परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया। गांव में शोक की लहर दौड़ गई और अंतिम दर्शन के लिए बड़ी संख्या में ग्रामीण जुट गए।
बताया जा रहा है कि कोलकाता के पानागढ़ में तैनात सूबेदार शैलेंद्र पांडेय की पत्नी साधना की मंगलवार रात मौत हो गई थी। इसके बाद बुधवार को शैलेंद्र की भी मृत्यु हो गई। दो दिनों के भीतर परिवार में हुई इन घटनाओं ने पूरे गांव को स्तब्ध कर दिया है।
सेना ने दी अंतिम सलामी
पार्थिव शरीर गुरुवार सुबह लखनऊ एयरपोर्ट लाया गया, जहां से सेना के जवान उसे उन्नाव स्थित पैतृक गांव लेकर पहुंचे। घर पहुंचते ही परिजनों की चीख-पुकार से माहौल भावुक हो गया।
इसके बाद पार्थिव शरीर को पूरे सम्मान के साथ बक्सर घाट ले जाया गया। सेना की ओर से गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया और अंतिम सलामी के साथ उन्हें विदाई दी गई। अंतिम संस्कार के दौरान “शैलेंद्र पांडेय अमर रहें” के नारों से घाट गूंज उठा।


बच्चों को सौंपा गया तिरंगा
अंतिम संस्कार के दौरान सेना के अधिकारियों ने सूबेदार के बेटे यथार्थ और बेटी सान्वी को तिरंगा सौंपा। यह दृश्य वहां मौजूद लोगों को भावुक कर गया। दोनों बच्चे पूरे समय अपने परिजनों के साथ रहे।
ग्रामीणों का कहना था कि कुछ ही दिनों में माता-पिता दोनों को खो देने से बच्चों के सामने बड़ा जीवन संकट खड़ा हो गया है।
परिजनों ने लगाए गंभीर आरोप
मृतक के परिजनों ने घटना के लिए ससुराल पक्ष को जिम्मेदार ठहराते हुए आरोप लगाया कि लगातार तनाव और कथित प्रताड़ना के कारण परिवार इस दुखद स्थिति तक पहुंचा। हालांकि इन आरोपों की अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
पुलिस जांच का इंतजार
पुलिस का कहना है कि अभी तक किसी भी पक्ष की ओर से औपचारिक तहरीर नहीं दी गई है। अधिकारियों के अनुसार, उपलब्ध रिपोर्टों और शिकायतों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
पूरे क्षेत्र में शोक का माहौल
दांदामऊ गांव में दो दिनों के भीतर हुई इस पारिवारिक त्रासदी की चर्चा हर ओर है। ग्रामीणों का कहना है कि व्यक्तिगत विवादों और तनाव का सबसे बड़ा असर अक्सर बच्चों और परिवार पर पड़ता है। फिलहाल पूरा गांव शोक में डूबा हुआ है और लोग परिवार को ढांढस बंधाने में जुटे हैं।







