ज्योतिषाचार्य-एस.एस.नागपाल
परशुराम जयंती (19 अप्रैल) और अक्षय तृतीया का विशेष संयोग बन रहा है, जिसे भगवान विष्णु के छठे अवतार परशुरामजी के जन्म के रूप में मनाया जाता है। इस दिन त्रिपुष्कर और सर्वार्थ सिद्धि जैसे शुभ योगों के साथ-साथ, अक्षय तृतीया होने के कारण यह अबूझ मुहूर्त है, जो सोना, वाहन और नई संपत्ति खरीदने के लिए अत्यंत उत्तम है।
परशुराम जयन्ती, भगवान विष्णु के छठवें अवतार के जन्म की वर्षगाँठ के रूप में मनायी जाती है। यह वैशाख माह में शुक्ल पक्ष तृतीया के समय पड़ता है। ऐसा माना जाता है कि, परशुराम का जन्म प्रदोष काल के समय हुआ था तथा इसीलिये जिस दिन प्रदोष काल के दौरान तृतीया तिथि होती है उस दिन को परशुराम जयन्ती का उत्सव मानाया जाता है। भगवान विष्णु ने पापी, विनाशकारी तथा अधार्मिक राजाओं का विनाश कर पृथ्वी का भार हरने हेतु परशुराम जी के रूप में छठवाँ अवतार धारण किया था। इन दुष्ट राजाओं ने पृथ्वी के संसाधनों को लूटा तथा राजाओं के रूप में अपने कर्तव्यों की उपेक्षा की थी। परशुरामजी को चिरंजीवी (अमर) माना जाता है, जो अभी भी धरती पर मौजूद हैं और वीरता, ज्ञान व भक्ति के प्रतीक हैं।




