पत्नी बोलीं- सीबीआई जांच पर पूरा भरोसा, निर्दोष हैं मेरे पति
अखिलानंद तिवारी
बलिया। पश्चिम बंगाल के चर्चित चंद्रनाथ हत्याकांड की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, उसके तार उत्तर प्रदेश के बलिया जनपद से जुड़ते नजर आ रहे हैं। इस हाई-प्रोफाइल मामले में बलिया के बांसडीह रोड थाना क्षेत्र स्थित शीतल दवनी गांव निवासी ज्ञानेंद्र सिंह उर्फ मोनू सिंह का नाम सामने आने के बाद क्षेत्र में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। इसी बीच मोनू सिंह ने बलिया की गैंगस्टर कोर्ट में आत्मसमर्पण कर दिया है।
नाम उछलने के बाद जारी किया था वीडियो संदेश
जानकारी के अनुसार, बंगाल हत्याकांड में नाम सामने आने के बाद पश्चिम बंगाल पुलिस और अन्य जांच एजेंसियां कई बार मोनू सिंह के गांव पहुंचीं। उन्होंने परिजनों और ग्रामीणों से पूछताछ भी की। खुद को चारों ओर से घिरता देख मोनू सिंह ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो जारी कर मामले में स्वयं को निर्दोष बताया था। वीडियो में उसने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ तथा केंद्रीय जांच एजेंसियों से निष्पक्ष जांच की मांग की थी।
पुराने मुकदमे में वारंट के आधार पर किया सरेंडर
मोनू सिंह के अधिवक्ता शार्दूल विक्रम सिंह ने बताया कि उनके मुवक्किल के खिलाफ उत्तर प्रदेश में पहले से एक मुकदमा दर्ज था, जिसमें न्यायालय द्वारा गैर-जमानती वारंट जारी किया गया था। उसी के अनुपालन में उन्होंने बलिया की गैंगस्टर कोर्ट में आत्मसमर्पण किया है।
उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल के चर्चित हत्याकांड में मोनू सिंह का नाम किस आधार पर जोड़ा गया है, इसकी कोई आधिकारिक जानकारी फिलहाल उनके पास नहीं है। हालांकि, परिजनों से उन्हें यह जानकारी मिली है कि पुलिस कई बार उनके घर पहुंच चुकी थी।
सीबीआई घर से ले गई डीवीआर, न्याय की उम्मीद
मोनू सिंह के आत्मसमर्पण के बाद उनकी पत्नी महिमा सिंह मीडिया के सामने आईं। उन्होंने कहा कि बंगाल हत्याकांड में उनके पति का नाम क्यों और कैसे जुड़ा, इसकी उन्हें कोई जानकारी नहीं है।
महिमा सिंह ने बताया कि बंगाल पुलिस और सीबीआई की टीम तीन से चार बार उनके घर पहुंच चुकी है तथा घर में लगे सीसीटीवी कैमरों का डीवीआर भी अपने साथ ले गई है। उन्होंने कहा कि उन्हें सीबीआई की निष्पक्ष जांच पर पूरा भरोसा है और उन्हें विश्वास है कि सत्य सामने आएगा तथा उनके पति को न्याय मिलेगा।
फेसबुक वीडियो में लगाई न्याय की गुहार
आत्मसमर्पण से पहले मोनू सिंह ने अपने फेसबुक अकाउंट पर एक वीडियो संदेश जारी किया था। वीडियो में उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और सीबीआई से मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की।
मोनू सिंह ने दावा किया कि उन्हें एक साजिश के तहत फंसाया जा रहा है और निष्पक्ष जांच होने पर सच्चाई सामने आ जाएगी।
गांव के एक प्रभावशाली व्यक्ति पर लगाए गंभीर आरोप
वीडियो में मोनू सिंह ने अपने गांव के एक प्रभावशाली व्यक्ति मुकेश सिंह पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि उक्त व्यक्ति के खिलाफ विभिन्न जनपदों में कई मुकदमे दर्ज हैं और स्थानीय पुलिस उसे संरक्षण देती है।
मोनू ने आरोप लगाया कि व्यक्तिगत विवाद के कारण उन्हें लगातार विभिन्न मामलों में फंसाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कुछ पुराने मामलों और कथित धोखाधड़ी के आरोपों का भी उल्लेख किया।
यूपी पुलिस पर अविश्वास जताया, एनकाउंटर का जताया डर
अपने वीडियो संदेश में मोनू सिंह ने कहा कि वह कानून का सम्मान करते हैं और न्यायालय के समक्ष आत्मसमर्पण कर रहे हैं, लेकिन उन्हें उत्तर प्रदेश पुलिस पर भरोसा नहीं है। उन्होंने आशंका जताई कि उन्हें फर्जी मुठभेड़ में फंसाया जा सकता है ताकि मामले की सच्चाई सामने न आ सके।
जांच में सहयोग का किया दावा
मोनू सिंह ने स्वयं को निर्दोष बताते हुए कहा कि यदि सीबीआई निष्पक्ष जांच करेगी तो सभी तथ्य स्पष्ट हो जाएंगे। उन्होंने जांच एजेंसियों के साथ पूरा सहयोग करने की बात भी कही।
यूपी से बंगाल तक मचा हड़कंप
पश्चिम बंगाल के इस चर्चित हत्याकांड में बलिया कनेक्शन सामने आने के बाद बंगाल की राजनीति के साथ-साथ उत्तर प्रदेश के पुलिस और प्रशासनिक महकमे में भी हलचल बढ़ गई है। एक छोटे से गांव से जुड़े इस मामले ने जांच एजेंसियों के सामने कई नए सवाल खड़े कर दिए हैं।
अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि मोनू सिंह के आत्मसमर्पण के बाद क्या पश्चिम बंगाल पुलिस अथवा सीबीआई उन्हें रिमांड पर लेने के लिए बलिया न्यायालय का रुख करती है या नहीं। मामले की आगामी जांच और न्यायिक प्रक्रिया पर पूरे क्षेत्र की निगाहें टिकी हुई हैं।




