अमृत उजाला ब्यूरो
पीलीभीत। माँ गोमती के संरक्षण, पुनर्जीवन एवं उद्गम क्षेत्र में जलस्तर वृद्धि को लेकर गोमती दर्शन संस्था के प्रतिनिधिमंडल ने जिलाधिकारी से मुलाकात कर विस्तृत विचार-विमर्श किया। इस अवसर पर संस्था के संयोजक एडवोकेट अनुराग पांडे, अध्यक्ष श्वेता सिंह एवं सोशल मीडिया प्रभारी गुड्डू पांडे उपस्थित रहे।
प्रतिनिधिमंडल ने जिलाधिकारी को प्रशस्ति पत्र भेंट कर माँ गोमती के पुनरुद्धार एवं संरक्षण के क्षेत्र में किए जा रहे उत्कृष्ट कार्यों के लिए सम्मानित किया। संस्था की ओर से नदी संरक्षण के प्रति उनके संवेदनशील एवं सक्रिय प्रयासों की सराहना की गई।
बैठक में माँ गोमती के उद्गम स्थल फुलहर झील में जलस्तर वृद्धि, वेटलैंड्स संरक्षण, तटीय एवं डब क्षेत्रों से अतिक्रमण हटाने तथा शारदा नहर के जल को उद्गम स्थल से जोड़ने जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर गंभीर चर्चा हुई। इस दौरान इस बात पर विशेष बल दिया गया कि ऐसे प्रयास किए जाएँ जिनसे किसानों का भविष्य सुरक्षित रहे और माँ गोमती की अविरल धारा निरंतर प्रवाहित होती रहे।
गोमती दर्शन संस्था की ओर से सुझाव दिया गया कि नदी तटीय क्षेत्रों में बनाए गए हरियाली पट्टों को निरस्त कर जिलाधिकारी एवं तहसील प्रशासन के माध्यम से व्यापक वृक्षारोपण कराया जाए। इस प्रस्ताव पर सकारात्मक चर्चा हुई और सहमति के संकेत भी मिले।
बैठक में नदियों के संरक्षण एवं पुनर्जीवन के क्षेत्र में कार्य कर रहे विशेषज्ञों और सामाजिक कार्यकर्ताओं के साथ समन्वय स्थापित कर सामूहिक रूप से कार्य करने की योजना पर भी चर्चा की गई।
प्रतिनिधिमंडल ने माँ गोमती के बेसिन क्षेत्र में खुदाई के बाद निकाली जा रही मिट्टी के वैज्ञानिक एवं सुव्यवस्थित प्रबंधन की आवश्यकता पर भी ध्यान आकर्षित किया। संस्था का कहना था कि यदि मिट्टी का उचित प्रबंधन नहीं किया गया तो वर्षा के दौरान वही मिट्टी पुनः बहकर नदी बेसिन में पहुँच सकती है, जिससे नदी का प्रवाह प्रभावित होगा।
इसके अतिरिक्त प्राचीन जलस्रोतों एवं जलधाराओं के चिन्हीकरण, नदी में प्लास्टिक एवं अन्य अपशिष्ट न डालने के लिए जनजागरण अभियान चलाने तथा मानव श्रृंखला बनाकर अधिक से अधिक लोगों को माँ गोमती संरक्षण अभियान से जोड़ने जैसे मुद्दों पर भी विस्तार से चर्चा हुई।
जिलाधिकारी ने विषय की गंभीरता को स्वीकार करते हुए नदी संरक्षण एवं पुनर्जीवन के लिए जनसहभागिता आधारित प्रयासों को आवश्यक बताया तथा समन्वित कार्यवाही का आश्वासन दिया।
गोमती दर्शन संस्था ने कहा कि माँ गोमती केवल एक नदी नहीं, बल्कि प्रदेश की सांस्कृतिक, पर्यावरणीय एवं आध्यात्मिक धरोहर हैं, जिनकी निर्मलता और अविरलता बनाए रखना समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है।




