निर्माण विवरण प्रश्नश्रृंग
बिछिया से सफीपुर तक करीब 22 किमी क्षेत्र में 18 स्थानों पर आई समस्या, शुरुआत
युन्नान. गंगा एक्सप्रेसवे के उन्नाव खंड में बिछिया से सफीपुर तक करीब 22 किमी क्षेत्र में सर्विस लेन पर कई स्थानों पर धंसने से निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल उठाए गए हैं। जानकारी के अनुसार, वर्ग 397 से 419 के बीच लगभग 18 स्थानों पर सर्विस लेन क्षतिग्रस्त हो गई है। केस की जानकारी से लाइव निर्माण एजेंसी पटेल पिक्चर्स ने सीवेज का काम शुरू कर दिया है।
प्लेस के दौरान सर्विस लेन पर प्रतिबंध के लिए कई फर्मों को बंद कर दिया गया है। इस तरह की पारंपरिक रीति-रिवाजों, किसानों और क्षेत्रीय यातायात को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
रिजर्वेशन से फाइनल तक बन रहे गंगा एक्सप्रेसवे के इस हिस्से में सर्विस लेन धंसने के फैसले को लेकर अलग-अलग दावे सामने आ रहे हैं। निर्माण एजेंसी का कहना है कि बीच में भारी बारिश से यह समस्या उत्पन्न हो रही है, जबकि स्थानीय ग्रामीण इसे निर्माण कार्यों में विविधता के बारे में बता रहे हैं।
आरोप है कि जिले में सड़क निर्माण के दौरान निर्माण कार्य तो हुआ, लेकिन मानक के अनुसार पुनर्निर्माण नहीं हुआ। उनका कहना है कि इसी वजह से पहली बार ही बारिश में सर्विस लेन पर कई जगहों पर धांसू बारिश हुई। शाहजहाँपुर से लेकर सफीपुर तककॉम 397, 400, 405, 408, 410 और 419 सहित कई स्थानों पर यह समस्या सामने है।
अजगैन क्षेत्र के अजेय के पास कार्य समिति ने चार्पहिया एंड हेवी सोसायटी के लिए सर्विस लेन पर प्रवेश पर रोक लगा दी है। साथ ही पुलिस से सहयोग की मांग करते हुए हेवी आतंकियों को सेवा लेन पर रोक लगाने और उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई है।
वैज्ञानिक बताते हैं कि इसी साल 23 फरवरी को बिछिया क्षेत्र के सराय कटियां गांव के पास गंगा एक्सप्रेसवे की मुख्य सड़क का करीब आठ मीटर हिस्सा धंस गया था। इस दौरान सड़क के नीचे से बड़ी संख्या में गरीब परिवारों की बैठक में निर्माण की गुणवत्ता को लेकर गंभीर सवाल उठे। उस समय भी स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया था कि सड़क निर्माण में मानकों की अनदेखी की गई और बसहा झील की अनुपयुक्त काली मिट्टी का उपयोग किया गया।
गंगा एक्सप्रेसवे परियोजना की कुल लंबाई लगभग 594 किलोमीटर है, लागत लगभग 36,500 करोड़ रुपये है। इलिनोइस जिले में 105 किमी लंबे खंड के निर्माण पर लगभग 6,400 करोड़ रुपये खर्च किये जा रहे हैं, जबकि 1,354 हेक्टेयर भूमि के अधिग्रहण पर लगभग 625 करोड़ रुपये खर्च किये जा रहे हैं। निरीक्षण सेवा लेन धंसने की घटना के बाद निर्माण गुणवत्ता और पर्यवेक्षण व्यवस्था को लेकर नए जांच से पूछताछ की गई।








