उन्नाव। बाल वाटिका से कक्षा तीन तक के छात्रों को निपुण बनाने की तैयारी शुरू हो गई है। एआरपी, एसआरजी और डायट मेंटर को स्कूलों को तय कर छात्रों को निपुण बनाने को कहा गया है। पिछले शिक्षा सत्र में निपुण रिजल्ट केवल 22 फीसदी रहा था।
बाल वाटिका के साथ 1883 प्राथमिक और 375 कंपोजिट स्कूलों में कक्षा एक से तीन तक के छात्रों को निपुण बनाने का लक्ष्य तय होता है। बाल वाटिका के बच्चों को भाषा में अक्षर पहचानना और सरल शब्दों को समझना होता है। गणित में आकृतियों और 10 तक की संख्याओं की गिनती करना शामिल है। कक्षा एक के छात्रों को भाषा में छोटे वाक्य पढ़ना और गणित में 99 तक की संख्याएं पढ़ना-लिखना आना चाहिए।
कक्षा दो के छात्रों को भाषा में 45-60 शब्द प्रति मिनट की गति से पढ़ना और प्रश्नों के उत्तर देना है। गणित में 99 तक की संख्याओं को जोड़ना-घटाना और पहाड़ों की मदद से गुणा करना शामिल है। कक्षा तीन के छात्रों को भाषा में 60 शब्द प्रति मिनट की गति से धाराप्रवाह पढ़ना और अपनी राय लिखना होता है। गणित में अंकीय संख्याओं का जोड़-घटाना, गुणा और भाग के बुनियादी सवाल हल करना आवश्यक है। एआरपी को महीने में 30, एसआरजी को 20 और डायट मेंटर को 10 स्कूलों को निपुण करने की जिम्मेदारी दी गई है।
बीएसए शैलेश पांडेय ने बताया कि छात्रों को निपुण बनाने का प्रयास जारी है। शिक्षकों के साथ एआरपी और एसआरजी अपना काम कर रहे हैं। जिन ब्लॉकों में एआरपी कम हैं, वहां जल्द ही तैनाती की जाएगी।
सभी ब्लॉकों में एआरपी नहीं, छात्र कैसे होंगे निपुण
जिले के 16 ब्लॉक और नगर क्षेत्र मिलाकर 85 एआरपी की तैनाती होनी चाहिए। नियमानुसार एक ब्लॉक में विषयवार पांच एआरपी की तैनाती जरूरी है लेकिन मौजूदा समय में सिर्फ 61 की तैनाती है। शेष की भर्ती की प्रक्रिया अभी चल रही है। शिक्षासत्र शुरू हुए चार महीने हो हैं, ऐसे में एआरपी की तैनाती न होना निपुण लक्ष्य को पूरा करने में आने वाली दिक्कतों को बढ़ाएगा।







