महिलाओं को सुनाई संघर्ष से सफलता की कहानी
ड्रोन तकनीक और जरदोजी के जरिए आत्मनिर्भर बनने का दिया संदेश, प्रदेशभर की 500 महिलाओं के बीच साझा किए अनुभव
उन्नाव। राष्ट्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) के 45 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में लखनऊ में आयोजित कार्यक्रम में उन्नाव की ‘ड्रोन दीदी’ ललिता और स्वयं सहायता समूह की संचालिका सरोजनी देवी ने अपने संघर्ष और सफलता की प्रेरक कहानी साझा की। दोनों ने महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने के लिए मेहनत, आत्मविश्वास और कौशल विकास का संदेश दिया।
नाबार्ड की ओर से 13 जुलाई को आयोजित इस कार्यक्रम में उन्नाव जिले के बीघापुर क्षेत्र के सथनी बालाखेड़ा गांव की ड्रोन दीदी के नाम से पहचान बना चुकी ललिता तथा मियागंज की समूह संचालिका सरोजनी देवी को विशेष रूप से आमंत्रित किया गया था। कार्यक्रम में उन्नाव की 20 महिलाओं सहित प्रदेशभर से करीब 500 महिलाओं ने हिस्सा लिया।
कार्यक्रम में मंच से अपने अनुभव साझा करते हुए ललिता ने बताया कि शुरुआत में ड्रोन संचालन को लेकर उन्हें कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। महिला होने के कारण कई किसान ड्रोन के माध्यम से कीटनाशक और उर्वरक का छिड़काव कराने में हिचकिचाते थे। बावजूद इसके उन्होंने हार नहीं मानी और लगातार काम करती रहीं। धीरे-धीरे किसानों का भरोसा बढ़ा और उन्हें लगातार काम मिलने लगा। उन्होंने बताया कि अब तक वह करीब एक हजार एकड़ क्षेत्र में ड्रोन के जरिए छिड़काव कर चुकी हैं और इसके लिए उन्हें 300 रुपये प्रति एकड़ मेहनताना मिलता है।
वहीं, समूह संचालिका सरोजनी देवी ने बताया कि उन्होंने स्वयं सहायता समूह से तीन हजार रुपये का ऋण लेकर जरदोजी का काम शुरू किया था। आज वह अपने पैरों पर खड़ी हैं और अन्य महिलाओं को भी रोजगार से जोड़ रही हैं। उन्होंने कहा कि कोई भी काम छोटा नहीं होता, सफलता के लिए केवल मेहनत, धैर्य और लगन की जरूरत होती है।
कार्यक्रम में दोनों महिलाओं की सफलता की कहानी ने उपस्थित महिलाओं को प्रेरित किया और आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ने का संदेश दिया।







