बाराबंकी। कोटवा धाम के प्राचीन एवं पवित्र कुंड का अब संरक्षण और विकास किया जाएगा। धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व को बरकरार रखते हुए कुंड के आसपास श्रद्धालुओं के लिए आवश्यक सुविधाओं का विस्तार किया जाएगा। शनिवार को जिलाधिकारी ईशान प्रताप सिंह ने कोटवा धाम पहुंचकर प्राचीन कुंड का स्थलीय निरीक्षण किया और संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने कहा कि विकास कार्य कराते समय कुंड की मूल संरचना, ऐतिहासिक स्वरूप और धार्मिक महत्व से किसी भी तरह की छेड़छाड़ नहीं होनी चाहिए। उन्होंने सीएनडीएस के प्रोजेक्ट मैनेजर देवब्रत पवार को स्थल की आवश्यकताओं के अनुसार विस्तृत कार्ययोजना तैयार करने और सभी कार्य गुणवत्तापूर्ण ढंग से कराने के निर्देश दिए।
महिलाओं के लिए चेंजिंग रूम, सुरक्षा के लिए बैरिकेडिंग
डीएम ने कुंड के आसपास महिलाओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए चेंजिंग रूम बनाने के निर्देश दिए। इसके अलावा श्रद्धालुओं की सुरक्षा और भीड़ को व्यवस्थित रखने के लिए स्थायी बैरिकेडिंग की व्यवस्था करने को कहा। जिलाधिकारी ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि कोटवा धाम में विकास कार्य इस तरह कराए जाएं कि श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं मिलें और साथ ही धार्मिक एवं ऐतिहासिक विरासत का स्वरूप भी सुरक्षित रहे। उन्होंने सुविधा और संरक्षण के बीच संतुलन बनाए रखने पर विशेष जोर दिया।
356 वर्ष पुराना है मंदिर और समाधि स्थल
कोटवा धाम धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण स्थल माना जाता है। यहां करीब 356 वर्ष पुराना समर्थ साहेब बाबा जगजीवन दास जी का मंदिर और समाधि स्थल स्थित है। कोटवा धाम सतनाम पंथ की प्रमुख तपोस्थली के रूप में प्रसिद्ध है। यहां उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों के अलावा दूसरे राज्यों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन-पूजन के लिए पहुंचते हैं। मुख्यमंत्री पर्यटन विकास परियोजना के तहत कोटवा धाम में करीब 202.51 लाख रुपये की लागत से पर्यटन विकास और यात्री सुविधाओं से जुड़े विभिन्न कार्य स्वीकृत किए गए हैं। इन कार्यों के पूरा होने के बाद श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं मिलने की उम्मीद है।
निरीक्षण के बाद जिलाधिकारी ने मंदिर में दर्शन-पूजन कर आशीर्वाद लिया। इस दौरान एसडीएम सिरौलीगौसपुर अनिल सरोज, सीएनडीएस के प्रोजेक्ट मैनेजर देवब्रत पवार, महंत नीलेश दास समेत अन्य अधिकारी और कर्मचारी मौजूद रहे।






