लखनऊ। बहुजन समाज पार्टी (BSP) प्रमुख मायावती ने देश में युवाओं, खासकर Gen-Z के बीच बढ़ती निराशा को लेकर चिंता जताई है। उन्होंने आरोप लगाया कि युवाओं के सामने रोजगार और भविष्य को लेकर कई चुनौतियां हैं, लेकिन इन मुद्दों पर गंभीरता से काम करने के बजाय राजनीति का फोकस दूसरे विषयों पर ज्यादा दिखाई दे रहा है। मायावती ने कहा कि नई पीढ़ी अपने भविष्य को लेकर जवाब चाहती है और उसकी उम्मीदों को नजरअंदाज करना ठीक नहीं होगा।
मायावती ने आरक्षण के मुद्दे को लेकर भी भाजपा और कांग्रेस पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि दोनों प्रमुख दल आरक्षण व्यवस्था को लेकर गंभीर नहीं हैं और इसे कमजोर या खत्म करने की साजिश की जा रही है। मायावती ने कहा कि आरक्षण केवल नौकरी या शिक्षा में हिस्सेदारी का विषय नहीं है, बल्कि यह लंबे समय से वंचित और पिछड़े वर्गों को आगे बढ़ने का अवसर देने वाली व्यवस्था है। ऐसे में इससे जुड़े किसी भी बदलाव का सीधा असर उन वर्गों पर पड़ सकता है, जो अभी भी बराबरी की लड़ाई लड़ रहे हैं।
BSP प्रमुख ने कहा कि युवाओं में बढ़ती बेचैनी को केवल राजनीतिक नजरिए से देखने के बजाय उनके रोजगार, शिक्षा और सामाजिक सुरक्षा जैसे वास्तविक मुद्दों पर ध्यान देना जरूरी है। उन्होंने कहा कि Gen-Z की सोच और जरूरतें पहले की पीढ़ियों से अलग हैं। आज का युवा सवाल पूछता है, अपने अधिकारों को लेकर जागरूक है और अपने भविष्य को लेकर स्पष्ट जवाब चाहता है। ऐसे में राजनीतिक दलों को युवाओं की आवाज सुनने और उनके लिए ठोस नीतियां बनाने की जरूरत है।
मायावती ने भाजपा और कांग्रेस दोनों से आरक्षण और युवाओं से जुड़े मुद्दों पर अपनी स्थिति स्पष्ट करने की मांग की। उन्होंने कहा कि समाज के कमजोर और वंचित वर्गों के हितों की अनदेखी नहीं होनी चाहिए। साथ ही, उन्होंने युवाओं से भी अपने अधिकारों और संवैधानिक व्यवस्था को समझने तथा जागरूक रहने की अपील की। मायावती के इस बयान के बाद आरक्षण, युवा रोजगार और सामाजिक न्याय के मुद्दे पर राजनीतिक बहस एक बार फिर तेज होने के संकेत हैं।






