Zimbabwe Ferry Accident: जिम्बाब्वे की करिबा झील में इस सप्ताह एक बड़ा नाव हादसा हो गया। यात्रियों से भरी एक फेरी तेज लहरों के बीच पलट गई, जिसके बाद राहत और बचाव अभियान चलाया गया। शनिवार तक बरामद शवों के बाद पुलिस ने हादसे में 72 लोगों की मौत की पुष्टि की है। मृतकों में कई बच्चे भी शामिल हैं। पुलिस के मुताबिक, शनिवार को तलाशी अभियान के दौरान 26 और शव मिले। इसके बाद हादसे में जान गंवाने वालों की संख्या बढ़कर 72 हो गई। बताया जा रहा है कि हादसे का शिकार हुई फेरी मंगलवार को करिबा शहर से झील के दूसरी ओर बसे ग्रामीण और मछुआरा समुदायों की तरफ जा रही थी।
90 यात्रियों की क्षमता, सवार थे करीब 153 लोग
हादसे को लेकर सबसे चिंताजनक बात फेरी में यात्रियों की संख्या को लेकर सामने आई है। शुरुआती अनुमान के मुताबिक नाव में करीब 153 लोग मौजूद थे, जबकि इसकी निर्धारित क्षमता केवल 90 यात्रियों की थी। ज्यादा वजन और झील में उठ रही तेज लहरों के कारण नाव का संतुलन बिगड़ने की आशंका जताई जा रही है। हालांकि हादसा आखिर किस वजह से हुआ, इसकी आधिकारिक जांच अभी जारी है।
77 लोगों को सुरक्षित निकाला गया
जिम्बाब्वे की डिजास्टर मैनेजमेंट एजेंसी के अनुसार बचाव अभियान के दौरान 77 यात्रियों को सुरक्षित निकाल लिया गया। उन्हें झील के एक छोटे से द्वीप तक पहुंचाया गया, जहां से वापस लाने के लिए बचाव नौकाएं भेजी गईं। अधिकारियों के सामने यात्रियों की सही संख्या तय करना भी एक चुनौती रहा। खासकर छोटे बच्चों का अलग से टिकट नहीं होने के कारण शुरुआती आंकड़ों में उन्हें शामिल नहीं किया गया था। बाद में पुलिस की ओर से जारी सूची से पता चला कि मृतकों में 18 बच्चे शामिल थे। इनमें 16 बच्चे 10 साल या उससे कम उम्र के थे। हादसे में जान गंवाने वाला सबसे छोटा बच्चा महज एक साल का बताया गया है।
ग्रामीण इलाकों के लिए अहम थी यह फेरी
हादसे का शिकार हुई फेरी एक पुरानी नाव थी और इसका संचालन सरकारी एजेंसी के जिम्मे था। इसका इस्तेमाल करिबा झील के आसपास रहने वाले ग्रामीणों और मछुआरा समुदायों को करिबा शहर तक पहुंचाने के लिए किया जाता था। इन इलाकों में सड़कों की स्थिति अच्छी नहीं है और सार्वजनिक परिवहन के साधन भी सीमित हैं। ऐसे में झील के रास्ते चलने वाली नावें स्थानीय लोगों के लिए आने-जाने का महत्वपूर्ण साधन हैं।
करिबा झील की क्या है खासियत?
करिबा झील दुनिया की सबसे बड़ी मानव निर्मित झीलों में गिनी जाती है। इसका निर्माण 1950 के दशक के अंत और 1960 के दशक की शुरुआत के दौरान जाम्बेजी नदी पर बांध बनाए जाने के बाद हुआ था। यह झील 200 किलोमीटर से अधिक लंबाई में फैली हुई है और कुछ हिस्सों में इसकी चौड़ाई करीब 40 किलोमीटर तक पहुंचती है। इसका एक हिस्सा जिम्बाब्वे में और दूसरा जाम्बिया में आता है। दोनों देशों की सीमा भी झील के बीच से होकर गुजरती है।
इस हादसे के बाद फेरी की क्षमता, सुरक्षा व्यवस्था और यात्रियों की संख्या से जुड़े नियमों को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। बचाव अभियान के साथ-साथ अधिकारी हादसे के कारणों और लापता यात्रियों की जानकारी जुटाने में लगे हैं।






















