इस वर्ष श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पर्व विशेष धार्मिक और ज्योतिषीय संयोग के साथ मनाया जाएगा। गृहस्थों के साथ-साथ वैष्णव और रामानंदी संप्रदाय भी 4 सितंबर को ही जन्माष्टमी का उत्सव मनाएंगे। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण का जन्म द्वापर युग में मध्यरात्रि के समय अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र में हुआ था। इस बार भी अष्टमी तिथि के साथ रोहिणी नक्षत्र का संयोग बन रहा है, जिसे करीब 15 साल बाद बनने वाला विशेष संयोग माना जा रहा है। 4 सितंबर को रोहिणी नक्षत्र और हर्षण योग रहेगा। जन्मोत्सव के लिए मध्यरात्रि 11:57 बजे से रात 12:43 बजे तक का समय विशेष रूप से शुभ माना गया है। रामानंदी परंपरा में रोहिणी नक्षत्र का विशेष महत्व होने के कारण इस संयोग को भक्तों के लिए बेहद खास माना जा रहा है।
ज्योतिषीय दृष्टि से भी इस बार की जन्माष्टमी को काफी महत्वपूर्ण बताया जा रहा है। गणनाओं के अनुसार कई प्रमुख ग्रह अनुकूल स्थिति में रहेंगे। मन के कारक चंद्रमा अपनी उच्च राशि वृषभ में, जबकि ज्ञान और भाग्य के कारक बृहस्पति अपनी उच्च राशि कर्क में स्थित रहेंगे। वहीं सूर्य अपनी स्वराशि सिंह में और शुक्र अपनी स्वराशि तुला में रहेंगे। बुध भी मित्र राशि में स्थित होकर शुभ प्रभाव देने की स्थिति में बताए जा रहे हैं। मंगल और शुक्र के बीच बनने वाला नवपंचम राजयोग भी इस जन्माष्टमी की विशेषता माना जा रहा है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार ग्रहों की ऐसी स्थिति धार्मिक साधना, सकारात्मक ऊर्जा और सुख-समृद्धि की दृष्टि से विशेष फलदायी हो सकती है।
जन्माष्टमी के दिन राशि के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण का पूजन करने की भी परंपरा है। मेष राशि के जातक कान्हा को लाल या केसरिया वस्त्र पहनाकर मिश्री-गुड़ का भोग लगाएं और ‘ॐ क्लीं कृष्णाय नमः’ मंत्र का जाप करें। वृषभ राशि के लोग सफेद या चांदी रंग के वस्त्र, माखन-मिश्री और चांदी की छोटी बांसुरी अर्पित कर सकते हैं। मिथुन राशि के जातक हरे वस्त्र पहनाकर धनिया की पंजीरी में तुलसी डालकर भोग लगाएं। कर्क राशि वालों के लिए सफेद या पीले वस्त्र, खीर अथवा पेड़े का भोग और शंख से अभिषेक शुभ माना गया है। सिंह राशि के लोग गुलाबी, सुनहरे या नारंगी वस्त्र अर्पित कर ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ का जाप करें। कन्या राशि वाले हरे वस्त्र, मोरपंख, माखन-मिश्री और हरी इलायची अर्पित कर सकते हैं। तुला राशि के जातक भगवा या हल्के पीले वस्त्रों के साथ धनिया पंजीरी, मिश्री और कलाकंद का भोग लगाएं, जबकि वृश्चिक राशि वालों के लिए लाल या मैरून वस्त्र और गुड़ का हलवा अथवा माखन-मिश्री का भोग शुभ रहेगा।
धनु राशि के जातक श्रीकृष्ण को पीतांबर पहनाकर पीले फल, बेसन के लड्डू या केसर की खीर अर्पित करें। मकर राशि वाले नीले या बहुरंगी वस्त्र पहनाकर मिश्री, माखन और काली मिर्च का भोग लगा सकते हैं। कुंभ राशि के जातक नीले या आसमानी वस्त्रों से श्रृंगार कर धनिया की पंजीरी, मेवे और तुलसी अर्पित करें। वहीं मीन राशि के लोग गहरे पीले या केसरिया वस्त्र पहनाकर केसरयुक्त पंचामृत, मिश्री और माखन का भोग लगाएं तथा पूजा के समय पीला चंदन लगाकर कान्हा को झूला झुलाएं। ज्योतिर्विद डॉ. प्रीती पवन तिवारी, संस्थापक अध्यक्ष, ज्योतिष सेवा संस्थान के अनुसार, जन्माष्टमी केवल एक पर्व नहीं बल्कि भगवान श्रीकृष्ण के प्रति भक्ति, श्रद्धा और आस्था प्रकट करने का अवसर है। ऐसे में अपनी सामर्थ्य के अनुसार पूजा, भोग और मंत्र जाप करें तथा इस पावन अवसर पर परिवार के साथ मिलकर श्रीकृष्ण जन्मोत्सव का आनंद लें।






















