लखनऊ: उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में कलेक्ट्रेट परिसर स्थित कथित अवैध मस्जिद के खिलाफ चल रही ध्वस्तीकरण की कार्रवाई को लेकर बहुजन समाज पार्टी की प्रमुख मायावती ने प्रदेश सरकार से इसे रोकने की मांग की है। उन्होंने कहा कि धार्मिक स्थलों से जुड़े विवादों में जल्दबाजी के बजाय कानूनी प्रक्रिया और दूसरे शांतिपूर्ण विकल्पों पर विचार किया जाना चाहिए। मायावती ने शनिवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X के जरिए अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि सरकार की जिम्मेदारी है कि वह सभी धर्मों के लोगों और उनके धार्मिक स्थलों के प्रति समान रवैया अपनाए। उनका कहना है कि किसी भी विवाद को इस तरह आगे नहीं बढ़ाया जाना चाहिए, जिससे सामाजिक माहौल प्रभावित हो।
धार्मिक स्थलों को लेकर सरकार को सावधानी बरतने की सलाह
बसपा प्रमुख ने उत्तर प्रदेश में मस्जिदों को कथित तौर पर अवैध बताकर कार्रवाई किए जाने के तरीके पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में प्रशासन को जल्दबाजी से बचना चाहिए और विवाद के समाधान के लिए वैकल्पिक रास्ते तलाशने चाहिए। मायावती ने धार्मिक स्थलों की सुरक्षा को सरकार की संवैधानिक जिम्मेदारी बताते हुए कहा कि देश में सभी धर्मों के अनुयायियों को समान सम्मान मिलना चाहिए। उन्होंने मस्जिदों के धार्मिक महत्व का उल्लेख करते हुए कहा कि इस तरह के मामलों को संवेदनशीलता और भारतीय सामाजिक परंपरा को ध्यान में रखते हुए संभालने की जरूरत है।
आरोपियों के मकान गिराने की कार्रवाई पर भी सवाल
मायावती ने कथित आरोपियों के खिलाफ बुलडोजर कार्रवाई के तरीके पर भी चिंता जताई। उनका कहना है कि किसी व्यक्ति पर आरोप लगने मात्र से उसके परिवार को भी कार्रवाई का सामना नहीं करना चाहिए। उन्होंने कहा कि किसी आरोपी के खिलाफ कार्रवाई करते समय निर्धारित कानूनी प्रक्रिया का पालन जरूरी है। उनके मुताबिक, किसी व्यक्ति के कथित अपराध की सजा उसके परिवार के अन्य सदस्यों को देना उचित नहीं है। उन्होंने न्यायपालिका से भी ऐसे मामलों पर गंभीरता से विचार करने की अपील की। साथ ही मायावती ने लोगों से अपील की कि संवेदनशील माहौल में शांति और आपसी सौहार्द बनाए रखें।
क्या है सहारनपुर मस्जिद विवाद?
यह पूरा मामला सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर में स्थित एक मस्जिद से जुड़ा है, जिसे प्रशासन ने सरकारी जमीन पर अवैध निर्माण बताया है। मामले में सिटी मजिस्ट्रेट की अदालत ने 17 जुलाई को ढांचे को अवैध घोषित करते हुए उसे हटाने का आदेश दिया था। आदेश में सरकारी जमीन के कथित अतिक्रमण और उसके इस्तेमाल को लेकर करीब 6.41 करोड़ रुपये के मुआवजे का भी उल्लेख किया गया था। इस फैसले के खिलाफ दायर अपील को खारिज किए जाने के बाद मामला जिला जज की अदालत तक पहुंचा। 4 सितंबर को जिला जज की अदालत ने भी सिटी मजिस्ट्रेट के आदेश को बरकरार रखा। इसके बाद प्रशासन ने मस्जिद को हटाने की कार्रवाई शुरू कर दी।
पुलिस ने सुरक्षा को लेकर क्या बताया?
सहारनपुर के डीआईजी अभिषेक सिंह के मुताबिक, संबंधित अदालत ने जांच के बाद निर्माण को सरकारी जमीन पर अवैध रूप से किया गया पाया था। उन्होंने बताया कि निचली अदालत के फैसले के खिलाफ की गई अपील भी खारिज हो चुकी है। कार्रवाई को देखते हुए प्रशासन ने संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया है। कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए PAC और RAF की कंपनियों को भी लगाया गया है। पुलिस सोशल मीडिया पर प्रसारित होने वाली सूचनाओं और अफवाहों पर नजर रख रही है, ताकि किसी तरह की भ्रामक जानकारी से माहौल खराब न हो। प्रशासन का कहना है कि मस्जिद के खिलाफ कार्रवाई अदालत के आदेश और निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के तहत की जा रही है।





















