21 अक्टूबर तक मिली राहत, 2007 के नंदीग्राम आंदोलन से जुड़े मामलों में हुई थी गिरफ्तारी; चुनाव लड़ने और प्रचार करने का मिलेगा मौका
कोलकाता। नंदीग्राम उपचुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान को कलकत्ता हाईकोर्ट से अंतरिम जमानत मिल गई है। न्यायमूर्ति तीर्थंकर घोष की अदालत ने उन्हें 21 अक्टूबर तक अंतरिम राहत दी है। छह अक्टूबर को होने वाले नंदीग्राम उपचुनाव में चुनाव लड़ने और प्रचार करने के लिए प्रधान ने अदालत से अंतरिम जमानत की मांग की थी।
मिलन प्रधान की गिरफ्तारी वर्ष 2007 के नंदीग्राम आंदोलन से जुड़े पुराने मामलों में हुई थी। सुनवाई के दौरान अदालत ने इस तथ्य पर भी गौर किया कि प्रधान ने नामांकन पत्र दाखिल किया था और इसके बाद उन्हें गिरफ्तार किया गया।
अदालत ने कहा कि राज्य की ओर से ऐसा कोई साक्ष्य पेश नहीं किया गया, जिससे यह पता चले कि वर्ष 2007 के बाद किसी अन्य अपराध के सिलसिले में पुलिस प्रधान की तलाश कर रही थी। अदालत ने यह भी ध्यान में रखा कि संबंधित मामलों की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने की थी।
करीब 19 साल पुराने मामलों का मामला
कोर्ट ने कहा कि प्रधान उस समय राजनीतिक कार्यकर्ता थे और 2007 के नंदीग्राम आंदोलन में शामिल रहे थे। इसके बाद भी वह लगातार राजनीति में सक्रिय रहे। अदालत ने यह भी देखा कि जिन मामलों का राज्य सरकार ने हवाला दिया, उनमें नामांकन दाखिल करने के बाद किसी अन्य व्यक्ति की गिरफ्तारी नहीं की गई थी।
अदालत के मुताबिक, करीब 19 वर्ष पुराने मामलों में जारी वारंट पर कार्रवाई के लिए पुलिस के पास पर्याप्त समय था। चुनाव नजदीक होने के मद्देनजर अदालत ने मामले पर व्यापक दृष्टिकोण अपनाते हुए फिलहाल अंतरिम जमानत देने का फैसला किया।
केजरीवाल मामले के फैसले का भी उल्लेख
अंतरिम जमानत देते समय हाईकोर्ट ने दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल से संबंधित मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले का भी उल्लेख किया। प्रधान के अधिवक्ता ने अपनी दलीलों के समर्थन में इस फैसले का हवाला दिया था।
राज्य सरकार ने किया जमानत का विरोध
राज्य सरकार ने मिलन प्रधान की अंतरिम जमानत का विरोध किया। सरकार की ओर से अदालत में कहा गया कि संबंधित मामलों में हत्या के आरोप भी शामिल हैं और वारंट समेत कानूनी कार्रवाई शुरू की जा चुकी है। राज्य ने यह आशंका भी जताई कि रिहाई के बाद प्रधान गवाहों को प्रभावित कर सकते हैं।
वहीं, प्रधान के अधिवक्ता ने दलील दी कि उनकी गिरफ्तारी उम्मीदवारी घोषित होने के बाद हुई और अभियोजन पक्ष की ओर से उनकी भूमिका साबित करने वाला ठोस साक्ष्य अदालत के सामने नहीं रखा गया है।
हाईकोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद मिलन प्रधान को 21 अक्टूबर तक अंतरिम जमानत देने का आदेश दिया है।
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