सरकारी योजनाओं, महिला सुरक्षा कानूनों और साइबर अपराध से बचाव के उपायों की दी जानकारी
चंदौली, 27 अक्टूबर। महिलाओं एवं बालिकाओं की सुरक्षा, सम्मान और स्वावलंबन को बढ़ावा देने के लिए चंदौली जिले में मिशन शक्ति फेज-6.0 के तहत जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। पुलिस अधीक्षक आकाश पटेल के निर्देशन में जिले के सभी थानों की पुलिस टीमें बाजारों, कस्बों, ग्रामीण क्षेत्रों और भीड़भाड़ वाले स्थानों पर महिलाओं एवं बालिकाओं को उनके अधिकारों, सुरक्षा उपायों और सरकार की कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी दे रही हैं। अभियान के तहत एंटी रोमियो टीमें भी सक्रिय हैं।
जागरूकता कार्यक्रमों के दौरान महिलाओं और बालिकाओं को मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना, बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ, वन स्टॉप सेंटर, महिला हेल्पलाइन-181, निराश्रित महिला पेंशन योजना, महिला शरणालय, शक्ति सदन और सखी निवास जैसी योजनाओं के बारे में बताया जा रहा है। पुलिसकर्मी इन योजनाओं के उद्देश्यों और जरूरतमंद महिलाओं को मिलने वाली सहायता की जानकारी देकर उन्हें सरकारी सुविधाओं का लाभ उठाने के लिए प्रेरित कर रहे हैं।
महिला सुरक्षा से जुड़े कानूनी प्रावधानों की जानकारी भी अभियान का प्रमुख हिस्सा है। इसके तहत घरेलू हिंसा से महिलाओं का संरक्षण अधिनियम-2005, कार्यस्थल पर महिलाओं का लैंगिक उत्पीड़न (निवारण, प्रतिषेध और प्रतितोष) अधिनियम-2013, दहेज निषेध अधिनियम और लिंग चयन प्रतिषेध कानून के बारे में जागरूक किया जा रहा है। इसका उद्देश्य महिलाओं एवं बालिकाओं को उनके कानूनी अधिकारों से परिचित कराना और जरूरत पड़ने पर शिकायत दर्ज कराने के लिए प्रोत्साहित करना है।
पुलिस की ओर से थानों में स्थापित मिशन शक्ति केंद्रों के कार्यों, उद्देश्यों और वहां उपलब्ध सुविधाओं की जानकारी भी दी जा रही है। महिलाओं एवं बालिकाओं को आत्मनिर्भर बनने, आत्मविश्वास के साथ अपनी बात रखने और किसी भी तरह की परेशानी होने पर पुलिस या संबंधित सहायता केंद्रों से संपर्क करने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।
अभियान के दौरान साइबर सुरक्षा पर भी विशेष जोर दिया जा रहा है। महिलाओं और बालिकाओं को सोशल मीडिया का सुरक्षित इस्तेमाल करने, अपनी निजी जानकारी साझा करने में सावधानी बरतने, ऑनलाइन धोखाधड़ी से बचने और साइबर अपराध की स्थिति में शिकायत दर्ज कराने के तरीकों के बारे में बताया जा रहा है।
पुलिस का कहना है कि मिशन शक्ति फेज-6.0 का उद्देश्य महिलाओं एवं बालिकाओं को सुरक्षा संबंधी जानकारी उपलब्ध कराने के साथ उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करना और उन्हें आत्मनिर्भर व सशक्त बनाने के प्रयासों को बढ़ावा देना है।





















