यूपी की 11 समेत चार राज्यों की 28 सीटों पर नजर, भाजपा-सपा के बीच अहम मुकाबला
लखनऊ। उत्तर प्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र और कर्नाटक में विधान परिषद की खाली सीटों के लिए 23 अक्टूबर को हुए मतदान के बाद आज, 27 अक्टूबर को मतगणना कराई जा रही है। चारों राज्यों में मतों की गिनती को लेकर राजनीतिक दलों और प्रत्याशियों की निगाहें नतीजों पर टिकी हैं। उत्तर प्रदेश में विधान परिषद की 11 सीटों पर होने वाली मतगणना विशेष रूप से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। यहां सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और समाजवादी पार्टी (सपा) के बीच मुकाबले पर सबकी नजर है।
यूपी में सुबह आठ बजे से शुरू होगी मतगणना
उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा के अनुसार, प्रदेश के पांच खंड स्नातक और छह खंड शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों की मतगणना मंगलवार सुबह आठ बजे से शुरू होगी। इसके लिए लखनऊ, वाराणसी, आगरा, मेरठ, झांसी, बरेली और गोरखपुर में मतगणना केंद्र बनाए गए हैं। मतगणना रिटर्निंग अधिकारियों के निर्देशन और प्रेक्षकों की निगरानी में कराई जाएगी। निर्वाचन अधिकारियों ने प्रक्रिया को शांतिपूर्ण, पारदर्शी और व्यवस्थित ढंग से पूरा कराने के लिए आवश्यक तैयारियां की हैं। नतीजे देर शाम तक आने की उम्मीद है।
प्रदेश की सभी 11 सीटों पर भाजपा और समाजवादी पार्टी ने अपने प्रत्याशी उतारे हैं। 23 अक्टूबर को हुए मतदान में प्रदेश के 75 में से 72 जिलों के 2,697 मतदान केंद्रों पर 14.81 लाख से अधिक मतदाताओं ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया था। चुनाव में कुल 152 प्रत्याशियों की किस्मत दांव पर है।
सपा के लिए प्रतिष्ठा के साथ नेता प्रतिपक्ष का सवाल
उत्तर प्रदेश में विधान परिषद चुनाव के नतीजे समाजवादी पार्टी के लिए खास मायने रखते हैं। पार्टी के सामने सदन में नेता प्रतिपक्ष का पद बरकरार रखने की चुनौती है। विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष का पद पाने के लिए संबंधित दल के पास सदन की कुल सदस्य संख्या का कम से कम 10 प्रतिशत प्रतिनिधित्व होना आवश्यक है। 100 सदस्यीय विधान परिषद में इसके लिए 10 सदस्यों की जरूरत होती है।
रिपोर्ट के मुताबिक, सपा के वर्तमान में 10 सदस्य हैं और इनमें से तीन का कार्यकाल छह दिसंबर को समाप्त हो रहा है। ऐसे में पार्टी के लिए अपनी संख्या बनाए रखना महत्वपूर्ण है। चुनाव परिणाम यह तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे कि सदन में सपा की स्थिति कितनी मजबूत रहती है।
बिहार में आठ सीटों पर चुनाव, 150 प्रत्याशियों की किस्मत का फैसला
बिहार में विधान परिषद की आठ सीटों के लिए चुनाव कराया गया है। इनमें चार स्नातक और चार शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र शामिल हैं। इन सीटों पर 150 प्रत्याशी मैदान में हैं और 5.32 लाख से अधिक मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया है।
स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों में पटना, दरभंगा, तिरहुत और कोसी शामिल हैं, जबकि शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों में पटना, दरभंगा, तिरहुत और सारण की सीटें हैं। बिहार के नतीजों को राज्य की राजनीतिक परिस्थितियों के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यहां भाजपा के नेतृत्व वाले राजनीतिक गठबंधन और विपक्षी दलों के प्रदर्शन पर नजर रहेगी।
महाराष्ट्र में पांच सीटों पर दिलचस्प मुकाबला
महाराष्ट्र में विधान परिषद की पांच सीटों के लिए मतदान हुआ है। इन सीटों में पुणे, नागपुर और छत्रपति संभाजीनगर के स्नातक निर्वाचन क्षेत्र तथा पुणे और अमरावती के शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र शामिल हैं। चुनाव में 182 प्रत्याशियों की किस्मत का फैसला होना है।
सत्तारूढ़ गठबंधन ने नागपुर स्नातक, पुणे स्नातक और पुणे शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों में भाजपा के उम्मीदवार उतारे हैं। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) ने पुणे और छत्रपति संभाजीनगर स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों में प्रत्याशी खड़े किए हैं, जबकि शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) अमरावती शिक्षक सीट पर चुनाव लड़ रही है। कांग्रेस भी नागपुर स्नातक और पुणे शिक्षक सीटों पर अपनी दावेदारी पेश कर रही है। परिणाम राज्य में विभिन्न दलों की राजनीतिक स्थिति का संकेत देंगे।
कर्नाटक में कांग्रेस और भाजपा-जेडीएस गठबंधन की परीक्षा
कर्नाटक में विधान परिषद की चार सीटों के लिए चुनाव कराया गया है। यहां सत्तारूढ़ कांग्रेस और भाजपा-जेडीएस गठबंधन के बीच मुकाबला माना जा रहा है। बंगलूरू और उत्तर-पूर्व शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों के साथ-साथ पश्चिम और दक्षिण-पूर्व स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों के परिणामों पर भी नजर रहेगी।
चारों राज्यों के नतीजों पर राजनीतिक दलों की निगाहें
उत्तर प्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र और कर्नाटक में विधान परिषद की कुल 28 सीटों के लिए मतगणना हो रही है। इन चुनावों में राजनीतिक दलों के साथ निर्दलीय प्रत्याशियों का भविष्य भी तय होगा। उत्तर प्रदेश में भाजपा और सपा के बीच मुकाबला, बिहार में विभिन्न दलों की चुनावी स्थिति, महाराष्ट्र में गठबंधन के समीकरण और कर्नाटक में कांग्रेस तथा भाजपा-जेडीएस गठबंधन का प्रदर्शन प्रमुख राजनीतिक पहलू होंगे।
मतगणना पूरी होने के बाद स्पष्ट होगा कि किस राज्य में किस दल को बढ़त मिली और विधान परिषदों में राजनीतिक समीकरण किस दिशा में आगे बढ़ेंगे।





















