जानें पूजा मुहूर्त और तारों को देखने का समय
संतान की सुख-समृद्धि और दीर्घायु के लिए महिलाएं रखेंगी निर्जला व्रत, शाम 5:24 से 6:41 बजे तक होगा पूजन
लखनऊ। संतान की सुख-समृद्धि, आरोग्य और दीर्घायु की कामना के लिए रखा जाने वाला अहोई अष्टमी व्रत इस वर्ष 1 नवंबर को मनाया जाएगा। कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को यह पर्व मनाया जाता है। ज्योतिषाचार्य एसएस नागपाल के अनुसार, अष्टमी तिथि 1 नवंबर को दोपहर 2:51 बजे शुरू होगी और 2 नवंबर को दोपहर 1:10 बजे समाप्त होगी। प्रदोषकाल में अष्टमी तिथि की व्याप्ति होने के कारण 1 नवंबर को ही अहोई अष्टमी का व्रत रखा जाएगा।
इस दिन महिलाएं संतान की सुख-समृद्धि और लंबी आयु की कामना से व्रत रखकर माता पार्वती के अहोई स्वरूप की पूजा-अर्चना करती हैं। मान्यता है कि नि:संतान महिलाएं भी संतान प्राप्ति की कामना से यह व्रत रखती हैं। अनेक महिलाएं पूरे दिन निर्जला उपवास करती हैं और शाम को पूजा तथा व्रत कथा के पाठ के बाद तारों को अर्घ्य देकर व्रत का पारण करती हैं। कुछ स्थानों पर चंद्रमा को अर्घ्य देने की परंपरा भी प्रचलित है।
अहोई अष्टमी के अवसर पर महिलाएं घर की दीवार पर आठ कोणों वाली अहोई माता की आकृति बनाती हैं। इसके पास स्याऊ माता और उनके बच्चों की आकृतियां भी बनाई जाती हैं। शाम को विधि-विधान से पूजा करने के बाद अहोई अष्टमी की व्रत कथा सुनी और सुनाई जाती है।
पूजा और अर्घ्य का समय
ज्योतिषाचार्य एसएस नागपाल, स्वास्तिक ज्योतिष केंद्र, अलीगंज, लखनऊ के अनुसार, 1 नवंबर को अहोई अष्टमी पूजा का शुभ मुहूर्त शाम 5:24 बजे से 6:41 बजे तक रहेगा। तारों को देखने का समय शाम 5:48 बजे बताया गया है। वहीं, चंद्रोदय रात 11:28 बजे होगा। महिलाएं अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार तारों अथवा चंद्रमा को अर्घ्य देकर व्रत पूर्ण करेंगी।





















