अयोध्या। प्रभु श्रीराम की नगरी अयोध्या इन दिनों महाराष्ट्र की वारकरी परंपरा की भक्ति रसधारा से सराबोर है। महाराष्ट्र, गोवा और कर्नाटक से आए 2500 से अधिक वारकरी श्रद्धालु यहां आयोजित तुकाराम गाथा पारायण उत्सव में शामिल होकर संत परंपरा का संदेश जन-जन तक पहुंचा रहे हैं।
उत्सव का नेतृत्व कर रहे राणा महाराज वासकर ने बताया कि यह आयोजन उनके पूज्य पिता की पुण्यतिथि के अवसर पर किया जा रहा है। कार्यक्रम में संत तुकाराम महाराज के अभंगों का पाठ, भजन-कीर्तन और सामूहिक पारायण के माध्यम से श्रद्धालु भक्ति में लीन हैं।
राणा महाराज वासकर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तर प्रदेश सरकार से आग्रह किया कि वारकरी संतों की शिक्षाओं और उनकी आध्यात्मिक विरासत को राष्ट्रीय ही नहीं बल्कि वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाने के लिए विशेष प्रयास किए जाएं। उन्होंने कहा कि संत ज्ञानेश्वर महाराज, संत तुकाराम महाराज, संत एकनाथ महाराज और संत नामदेव महाराज की परंपरा मानवता, भक्ति और सामाजिक समरसता का संदेश देती है, जिसे दुनिया तक पहुंचाने की आवश्यकता है।
उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी से वारकरी पदयात्रा और संत परंपरा से जुड़कर इसके प्रचार-प्रसार में सहयोग करने की अपील भी की। राणा महाराज ने कहा कि वारकरी समाज ने कभी सरकारों से विशेष अपेक्षाएं नहीं रखीं, लेकिन संतों के विचारों को नई पीढ़ी और अंतरराष्ट्रीय समुदाय तक पहुंचाना समय की मांग है।
राजनीतिक समर्थन के सवाल पर उन्होंने कहा कि वारकरी संप्रदाय सभी सरकारों का सम्मान करता है और समाज को जोड़ने तथा आध्यात्मिक मूल्यों को मजबूत करने का कार्य करता है।
अयोध्या से देश और समाज के लिए मंगलकामना व्यक्त करते हुए राणा महाराज वासकर ने संत ज्ञानेश्वर महाराज की प्रार्थना दोहराई— “दुरितांचे तिमिर जावो, विश्वस्व धर्म सूर्य पावो”, अर्थात संसार से अज्ञान और बुराइयों का अंधकार दूर हो तथा सदाचार और धर्म का प्रकाश पूरे विश्व में फैलता रहे।







