एसआईआर में नाम कटा तो घर आएंगे अफसर, दस्तावेज लेकर जुड़वाएंगे नाम
अब तक 30 राज्यों-केंद्र शासित प्रदेशों में 13.37 करोड़ नाम ड्राफ्ट मतदाता सूची से हटे; दिल्ली-महाराष्ट्र में दावे-आपत्तियों की समयसीमा 30 अक्टूबर तक बढ़ी
नई दिल्ली। विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर जारी विवाद के बीच निर्वाचन आयोग ने मतदाताओं को राहत देने वाला अहम कदम उठाया है। आयोग ने स्पष्ट किया है कि यदि किसी पात्र व्यक्ति का नाम एसआईआर की प्रारूप मतदाता सूची से छूट गया है तो वह फार्म-6 के जरिए नाम शामिल कराने का दावा कर सकता है। जरूरत पड़ने पर निर्वाचन अधिकारी संबंधित मतदाता के घर जाकर दस्तावेज भी एकत्र करेंगे और उन्हें आयोग की वेबसाइट पर अपलोड करेंगे। दावे पर संबंधित निर्वाचन अधिकारी तय प्रक्रिया के तहत निर्णय करेंगे।
निर्वाचन आयोग के अनुसार एसआईआर के तीन चरणों में अब तक 30 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की प्रारूप मतदाता सूचियों से 13.37 करोड़ नाम हटे हैं। यह संख्या एसआईआर से पहले के मतदाता आधार की करीब 14.1 प्रतिशत है। आयोग ने अलग-अलग राज्यों में मृत, स्थानांतरित, दोहरे या अन्य कारणों से अपात्र पाए गए नामों की जांच के बाद प्रारूप सूची तैयार की है। प्रारूप सूची में नाम हटना अंतिम रूप से मताधिकार समाप्त होना नहीं है; पात्र मतदाता निर्धारित अवधि में दावा कर सकता है।
दिल्ली-महाराष्ट्र में 30 अक्टूबर तक दावा
शनिवार को नई दिल्ली स्थित निर्वाचन भवन में हुई बैठक में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू व विवेक जोशी मौजूद रहे। आयोग ने दिल्ली और महाराष्ट्र में दावे एवं आपत्तियां दाखिल करने की अंतिम तिथि 30 अक्टूबर 2026 तक बढ़ाने का फैसला किया। दिल्ली में दावों का निपटारा 30 नवंबर और महाराष्ट्र में 10 नवंबर तक किया जाना है।
गोवा में छूटे पात्र मतदाताओं के लिए बूथ स्तर के अधिकारी घर-घर जाकर फार्म-6 एकत्र करेंगे। आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि नाम जोड़ने के लिए फार्म-6 की व्यवस्था लागू है और पात्र व्यक्ति इसका इस्तेमाल कर सकता है। आयोग के नागरिक सेवा पोर्टल पर एसआईआर-2026 के तहत नाम खोजने और फार्म-6 जमा करने की सुविधा भी उपलब्ध है।
आयोग ने आयुक्तों के पत्र पर भी दी सफाई
एसआईआर को लेकर उठे विवाद के बीच आयोग ने उन रिपोर्टों पर भी स्पष्टीकरण दिया जिनमें दो चुनाव आयुक्तों के बीच असहमति का दावा किया गया था। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में आयोग के कुछ फैसलों पर 14 बार आपत्ति दर्ज की थी। आयोग ने कहा कि दोनों आयुक्तों की ओर से कैबिनेट सचिव को भेजा गया पत्र एसआईआर या आयोग के किसी निर्णय से संबंधित नहीं था, बल्कि प्रतिनियुक्ति पर आए एक अधिकारी के कामकाज से जुड़ा था।
कांग्रेस ने उठाए सवाल
एसआईआर को लेकर कांग्रेस समेत विपक्षी दल निर्वाचन आयोग की प्रक्रिया पर सवाल उठा रहे हैं। कांग्रेस ने आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त पर मनमानी के आरोप लगाते हुए देशभर में प्रदर्शन भी किया है। दूसरी ओर आयोग लगातार यह कह रहा है कि एसआईआर का उद्देश्य मतदाता सूची को अद्यतन और शुद्ध करना है। इस विवाद के बीच आयोग ने पात्र मतदाताओं के लिए दावा दाखिल करने और जरूरत पड़ने पर दस्तावेज जुटाने की व्यवस्था स्पष्ट की है।





















