अमृत उजाला
Tuesday, Jul 14, 2026 15:14
Sign In
  • होम
  • उत्तर प्रदेश
        • लखनऊ
        • आगरा
        • कानपुर
        • अलीगढ
        • वाराणसी
        • मथुरा
        • प्रयागराज
        • मेरठ
        • गोरखपुर
        • बरेली
        • नोएडा
        • अयोध्या
        • गाजियाबाद
        • मुरादाबाद
        • View All Cities
          • आगरा
          • अलीगढ
          • अम्बेडकर नगर
          • अमेठी
          • अमरोहा
          • औरैया
          • अयोध्या
          • आज़मगढ़
          • बागपत
          • बहराइच
          • बलिया
          • बलरामपुर
          • बांदा
          • बाराबंकी
          • बरेली
          • बस्ती
          • भदोही
          • बिजनौर
          • बदायूं
          • बुलंदशहर
          • चंदौली
          • चित्रकूट
          • देवरिया
          • एटा
          • इटावा
          • फर्रुखाबाद
          • फतेहपुर
          • फिरोजाबाद
          • गाजियाबाद
          • ग़ाज़ीपुर
          • गोंडा
          • गोरखपुर
          • हमीरपुर
          • हापुड़
          • हरदोई
          • हाथरस
          • जालौन
          • जौनपुर
          • झांसी
          • कन्नौज
          • कानपुर
          • कासगंज
          • कौशाम्बी
          • खेरी
          • कुशीनगर
          • ललितपुर
          • लखनऊ
          • महाराजगंज
          • महोबा
          • मैनपुरी
          • मथुरा
          • मऊ
          • मेरठ
          • मिर्जापुर
          • मुरादाबाद
          • मुज़फ्फरनगर
          • नोएडा
          • पीलीभीत
          • प्रतापगढ़
          • प्रयागराज
          • रायबरेली
          • रामपुर
          • सहारनपुर
          • सम्भल
          • संत कबीर नगर
          • शाहजहांपुर
          • शामली
          • श्रावस्ती
          • सिद्धार्थनगर
          • सीतापुर
          • सोनभद्र
          • सुल्तानपुर
          • उन्नाव
          • वाराणसी
        • Hide All Cities
  • देश
  • राजनीति
  • स्पॉटलाइट
  • खेल
  • विदेश
  • क्राइम
  • हैल्थ
  • एजुकेशन/करियर
  • धर्म
  • बिज़नेस
  • मनोरंजन
  • टेक्नोलॉजी
Notification
Font ResizerAa
Advertisement
  • होम
  • उत्तर प्रदेश
    • लखनऊ
    • कानपुर
    • वाराणसी
    • प्रयागराज
    • गोरखपुर
    • नोएडा
    • गाजियाबाद
    • आगरा
    • अलीगढ
    • मथुरा
    • मेरठ
    • बरेली
    • अयोध्या
    • मुरादाबाद
  • देश
  • विदेश
  • खेल
  • स्पॉटलाइट
  • राजनीति
  • क्राइम
  • हैल्थ
  • एजुकेशन/करियर
  • धर्म
  • बिज़नेस
  • मौसम
  • टेक्नोलॉजी
अमृत उजाला
Tuesday, Jul 14, 2026 15:14
  • होम
  • उत्तर प्रदेश
    • लखनऊ
    • कानपुर
    • वाराणसी
    • प्रयागराज
    • गोरखपुर
    • नोएडा
    • गाजियाबाद
    • आगरा
    • अलीगढ
    • मथुरा
    • मेरठ
    • बरेली
    • अयोध्या
    • मुरादाबाद
    • आज़मगढ़
    • अम्बेडकर नगर
    • अमेठी
    • अमरोहा
    • औरैया
    • बागपत
    • बहराइच
    • बलिया
    • बलरामपुर
    • बांदा
    • बाराबंकी
    • बस्ती
    • भदोही
    • बिजनौर
    • बदायूं
    • बुलंदशहर
    • चंदौली
    • चित्रकूट
    • देवरिया
    • एटा
    • इटावा
    • फर्रुखाबाद
    • फतेहपुर
    • फिरोजाबाद
    • गौतम बुद्ध नगर
    • ग़ाज़ीपुर
    • गोंडा
    • हमीरपुर
    • हापुड़
    • हरदोई
    • हाथरस
    • जालौन
    • जौनपुर
    • झांसी
    • कन्नौज
    • कासगंज
    • कौशाम्बी
    • खेरी
    • कुशीनगर
    • ललितपुर
    • महाराजगंज
    • महोबा
    • मैनपुरी
    • मऊ
    • मिर्जापुर
    • मुज़फ्फरनगर
    • पीलीभीत
    • प्रतापगढ़
    • रायबरेली
    • रामपुर
    • सहारनपुर
    • सम्भल
    • संत कबीर नगर
    • शाहजहांपुर
    • शामली
    • श्रावस्ती
    • सिद्धार्थनगर
    • सीतापुर
    • सोनभद्र
    • सुल्तानपुर
    • उन्नाव
  • देश
  • राजनीति
  • स्पॉटलाइट
  • खेल
  • विदेश
  • क्राइम
  • हैल्थ
  • एजुकेशन/करियर
  • धर्म
  • बिज़नेस
  • मनोरंजन
  • टेक्नोलॉजी
Search
  • होम
  • उत्तर प्रदेश
        • लखनऊ
        • आगरा
        • कानपुर
        • अलीगढ
        • वाराणसी
        • मथुरा
        • प्रयागराज
        • मेरठ
        • गोरखपुर
        • बरेली
        • नोएडा
        • अयोध्या
        • गाजियाबाद
        • मुरादाबाद
        • View All Cities
          • आगरा
          • अलीगढ
          • अम्बेडकर नगर
          • अमेठी
          • अमरोहा
          • औरैया
          • अयोध्या
          • आज़मगढ़
          • बागपत
          • बहराइच
          • बलिया
          • बलरामपुर
          • बांदा
          • बाराबंकी
          • बरेली
          • बस्ती
          • भदोही
          • बिजनौर
          • बदायूं
          • बुलंदशहर
          • चंदौली
          • चित्रकूट
          • देवरिया
          • एटा
          • इटावा
          • फर्रुखाबाद
          • फतेहपुर
          • फिरोजाबाद
          • गाजियाबाद
          • ग़ाज़ीपुर
          • गोंडा
          • गोरखपुर
          • हमीरपुर
          • हापुड़
          • हरदोई
          • हाथरस
          • जालौन
          • जौनपुर
          • झांसी
          • कन्नौज
          • कानपुर
          • कासगंज
          • कौशाम्बी
          • खेरी
          • कुशीनगर
          • ललितपुर
          • लखनऊ
          • महाराजगंज
          • महोबा
          • मैनपुरी
          • मथुरा
          • मऊ
          • मेरठ
          • मिर्जापुर
          • मुरादाबाद
          • मुज़फ्फरनगर
          • नोएडा
          • पीलीभीत
          • प्रतापगढ़
          • प्रयागराज
          • रायबरेली
          • रामपुर
          • सहारनपुर
          • सम्भल
          • संत कबीर नगर
          • शाहजहांपुर
          • शामली
          • श्रावस्ती
          • सिद्धार्थनगर
          • सीतापुर
          • सोनभद्र
          • सुल्तानपुर
          • उन्नाव
          • वाराणसी
        • Hide All Cities
  • देश
  • राजनीति
  • स्पॉटलाइट
  • खेल
  • विदेश
  • क्राइम
  • हैल्थ
  • एजुकेशन/करियर
  • धर्म
  • बिज़नेस
  • मनोरंजन
  • टेक्नोलॉजी
Have an existing account? Sign In
Follow US
  • Advertise
© 2024. All Rights Reserved.
अमृत उजाला > उत्तर प्रदेश > उन्नाव > Explainer: मशीन गाइडेड तकनीक से बने पहले एक्सप्रेसवे का हुआ उद्घाटन,
उत्तर प्रदेशउन्नाव

Explainer: मशीन गाइडेड तकनीक से बने पहले एक्सप्रेसवे का हुआ उद्घाटन,

Amrit Ujala
Last updated: July 13, 2026 11:59 pm
Amrit Ujala 15 hours पहले
Share
SHARE

कानपुर-लखनऊ के बीच बना यह मार्ग क्यों खास

लखनऊ-कानपुर के बीच बना यह एक्सप्रेसवे भारत का पहला ऐसा एक्सप्रेस-वे है जिसे ‘ऑटोमेटेड इंटेलिजेंस मशीन-गाइडेड कंस्ट्रक्शन’ (एआईएमजीसी) तकनीक का इस्तेमाल करके बनाया गया है। यह तकनीक न सिर्फ निर्माण की गुणवत्ता सुनिश्चित करता है, बल्कि बेवजह के खर्चों और मैटेरियल की बर्बादी को भी कम करता है। इससे पहले इस उन्नत तकनीक का इस्तेमाल केवल अमेरिका और जर्मनी जैसे देशों में ही होता था।

विकास की गाड़ी पर सवार उत्तर प्रदेश को आज एक और एक्सप्रेस-वे मिलने वाला है। सोमवार (13 जुलाई) को बहुप्रतीक्षित कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेस-वे का उद्घाटन हो गया। नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एनएचएआई) की परियोजना के अंतर्गत 4200 करोड़ रुपये से तैयार इस एक्सप्रेसवे पर चार बड़े पुल, 25 छोटे पुल, चार फ्लाईओवर, 11 पैदल अंडरपास और हल्के वाहनों के लिए 13 अंडरपास बनाए गए हैं।

सरकार का दावा है कि इस एक्सप्रेस-वे के शुरू होने के बाद कानपुर-लखनऊ की दूरी पहले के मुकाबले अब महज 35-45 मिनट की ही रह जाएगी। हालांकि, मजेदार बात यह है कि जिस एक्सप्रेस-वे को कानपुर-लखनऊ के बीच कहा जा रहा है, वह असल में कानपुर से शुरू ही नहीं होता। इसकी शुरुआत होती है कानपुर के करीब स्थित शुक्लागंज-उन्नाव के एक इंटरसेक्शन वाले बायपास से। वहीं, इसका अंत होता है लखनऊ के शहीद पथ पर, जो कि लखनऊ के बाहरी क्षेत्र में मौजूद है और मुख्य ट्रेन या बस स्टेशन से कुछ दूरी पर स्थित है।
आइये जानते हैं कि आज जिस कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेस-वे की शुरुआत हो रही है, उसकी क्या खासियत हैं? इस एक्सप्रेस-वे को किस खास तकनीक से बनाया गया है, जिसका भारत में पहली बार इस्तेमाल किया गया है? यह तकनीक काम कैसे करती है और इसका क्या फायदा है? आइये जानते हैं…

पहले जानें- कितना खास है कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेस-वे?
भारत का पहला मशीन-गाइडेड एक्सप्रेस-वे
यह भारत का पहला ऐसा एक्सप्रेस-वे है जिसे ‘ऑटोमेटेड इंटेलिजेंस मशीन-गाइडेड कंस्ट्रक्शन’ (एआईएमजीसी) तकनीक का इस्तेमाल करके बनाया गया है। इससे पहले इस उन्नत तकनीक का इस्तेमाल केवल अमेरिका और जर्मनी जैसे देशों में ही होता था।

यात्रा के समय में भारी कमी
केंद्र और राज्य सरकार का दावा है कि इस एक्सप्रेस-वे के शुरू होने से लखनऊ और कानपुर के बीच का सफर, जिसमें पहले दो घंटे या इससे ज्यादा लगते थे, वह अब घटकर मात्र 35-45 मिनट रह जाएगा। यह एक्सप्रेसवे लखनऊ के साथ-साथ सीतापुर, हरदोई, अयोध्या और सुलतानपुर से भी कानपुर पहुंचना आसान बनाएगा। इन जिलों से लखनऊ आने वाले यात्री उन्नाव, कानपुर जाने के लिए आउटर रिंग रोड के जरिये बनी पहुंचेंगे। वहां से सीधे एक्सप्रेसवे पर चढ़कर जाम से बच सकेंगे। शहीदपथ से कानपुर रोड आने वाले लोग एलिवेटेड रोड से बनी पहुंचेंगे। वहां से भी सीधे एक्सप्रेसवे पर चढ़ा जा सकेगा।

स्मार्ट और सुरक्षित सफर
इसे स्मार्ट ट्रैफिक मैनेजमेंट के लिए तैयार किया गया है। इसमें सुरक्षा और निगरानी के लिए लगभग 100 एआई-सक्षम सर्विलांस (सीसीटीवी) कैमरे और एक इंटीग्रेटेड ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम लगाया गया है। इसके लिए 63 विशेष पीटीजेड सीसीटीवी और 16 वीडियो डिटेक्शन इंसिडेंट सिस्टम तैनात किए गए हैं। एक्सप्रेसवे में सेफ्टी फीचर्स और रिएक्शन टाइम का विशेष ध्यान रखा गया है। हादसा होने पर 15 मिनट में मदद के लिए टीमें मौके पर पहुंच जाएंगी। ये सिस्टम हादसा होने पर तत्काल कंट्रोल रूम को सूचित करेंगे, जिससे रेस्क्यू टीम भेजी जा सकेगी।

इतना ही नहीं, 120 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ चालान के लिए एटीएमएस (एडवांस ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम) लगाए गए हैं, जो तत्काल चालान की कार्रवाई के लिए विवरण भेजेंगे। एक कंट्रोल सेंटर से पूरे एक्सप्रेसवे पर नजर रखी जाएगी।

विशाल संरचना और निवेश
4200 करोड़ की रुपये की लागत से बने इस प्रोजेक्ट में बनी से कानपुर के बीच 45 किलोमीटर का ग्रीनफील्ड सेक्शन और लखनऊ के अमौसी के पास 13 किलोमीटर का एलिवेटेड (ऊपर उठा हुआ) हिस्सा शामिल है।
ये भी पढ़ें: यूपी: लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे का लोकार्पण कल, 120 किमी प्रतिघंटा से दौड़ सकेंगे वाहन; जानिए टोल दरें

निर्माण में बेहतर गुणवत्ता
रीयल-टाइम मॉनिटरिंग और मशीन-नियंत्रित निर्माण के कारण इसमें सड़क की परत की मोटाई, सतह के समतलीकरण और तापमान को बिल्कुल सटीक रखा गया है। इससे सड़क की गुणवत्ता और टिकाऊपन में सुधार हुआ है और निर्माण सामग्री की बर्बादी भी कम हुई है।

रणनीतिक और आर्थिक महत्व
यह एक्सप्रेस-वे उत्तर प्रदेश डिफेंस कॉरिडोर के लखनऊ और कानपुर नोड्स के बीच बेहतर कनेक्टिविटी प्रदान करेगा, जिससे क्षेत्र में उद्योगों, लॉजिस्टिक्स और माल ढुलाई को बड़ा फायदा होगा।

सरकार का कहना है कि कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेस-वे केवल दो शहरों को जोड़ने वाली एक सामान्य सड़क नहीं है, बल्कि यह एनएचएआई का बेहद सफल पायलट प्रोजेक्ट है जो भारत में भविष्य के सड़क निर्माण के लिए एक नया वैश्विक मानक स्थापित करने जा रहा है।

सफर के लिए कितना चुकाना होगा टोल?
वाहन सिंगल जर्नी 24 घंटे में वापसी मासिक
कार, जीप, वैन 275 रुपये 415 रुपये 9220 रुपये
हल्वे कॅामर्शियल वाहन 445 रुपये 670 रुपये 14890 रुपये
बस व ट्रक 935 रुपये 1405 रुपये 31200 रुपये
थ्री एक्सल कॅामर्शियल वाहन 1020 रुपये 1530 रुपये 34040 रुपये

(नोट: नियमित यात्रियों के लिए 3075 रुपये का वार्षिक पास बनेगा। इसमें एक साल में 200 ट्रिप शामिल होंगे। लखनऊ-कानपुर राष्ट्रीय राजमार्ग का टोल सिर्फ 95 रुपये है)

अब जानें- किस खास तकनीक से बना है कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेस-वे
कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेस-वे के निर्माण में जिस विशेष तकनीक का उपयोग किया गया है, उसे ऑटोमेटेड एंड इंटेलिजेंट मशीन-एडेड कंस्ट्रक्शन (एआईएमजीसी) कहा जाता है। यह भारत में अपनी तरह का पहला प्रोजेक्ट है जिसमें इस उन्नत तकनीक का इस्तेमाल हुआ है, जो इससे पहले मुख्य रूप से अमेरिका और जर्मनी जैसे देशों में ही इस्तेमाल होती थी।

3डी ऑटोमेटेड मशीन गाइडेंस: इस तकनीक में जियोस्पेशियल डेटा (भौगोलिक डेटा), ग्लोबल नेविगेशन सैटेलाइट सिस्टम (जीएनएसएस) और 3डी इंजीनियरिंग डिजाइन मॉडल का इस्तेमाल किया जाता है। इसके जरिए कंस्ट्रक्शन साइट पर मौजूद मशीनों को रियल-टाइम में बेहद सटीकता के साथ कंप्यूटर और सैटेलाइट से निर्देशित किया जाता है।

जीपीएस-सक्षम मोटर ग्रेडर: यह मशीन सड़क की सतह को समतल करने और मिट्टी के काम के लिए इस्तेमाल की जाती है। इसमें 3डी मशीन कंट्रोल तकनीक होती है, जो लोकेशन बताने वाले जीएनएसएस और एंगल सेंसर से डेटा हासिल करके रियल-टाइम में ग्रेडर के ब्लेड की स्थिति और दिशा को 3डी डिजाइन के मुताबिक बिल्कुल सटीक रखती है। यानी मानवीय स्तर पर होने वाली चूक को खत्म करने में लगभग 100 फीसदी की एक्यूरेसी।
इंटेलिजेंट कॉम्पैक्टर: सड़क की परतों (मिट्टी और कंक्रीट) को मजबूती से दबाने के लिए इस स्मार्ट मशीन का उपयोग किया जाता है। जीपीएस से लैस ये कॉम्पैक्टर ट्रैक करते हैं कि मशीन ने किस जगह पर कितनी बार दबाव डाला है और मिट्टी का कितना हिस्सा अभी ढीला है। इससे सड़क में हवा या पानी के लिए कोई खाली जगह नहीं बचती, जिससे सड़क की उम्र बढ़ती है और वह जल्दी नहीं टूटती।

स्ट्रिंगलेस पेवर: सड़क पर डामर या कंक्रीट बिछाने के लिए इनका उपयोग होता है। यह तकनीक बिना किसी भौतिक तार के सीधे 3डी मॉडल के आधार पर काम करती है, जिससे सड़क की परत की मोटाई बिल्कुल एकसमान रहती है और बिछाते समय डामर के तापमान पर भी निगरानी रखी जाती है।

क्यों खास है यह तकनीक, इसका फायदा क्या?
इस तकनीक की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह इंटरनेट ऑफ थिंग्स (आईओटी) की तरह काम करती है। निर्माण स्थल पर मौजूद सभी मशीनें एक-दूसरे से जुड़ी होती हैं और रियल-टाइम डेटा सीधे कंट्रोल रूम या सड़क-परिवहन मंत्रालय के अधिकारियों तक भेजती हैं। इससे हर चरण के बाद मैनुअल सर्वे करने की जरूरत खत्म हो जाती है, मानवीय गलतियों की गुंजाइश नहीं रहती और निर्माण कार्य दिन-रात बिना रुके तेज गति से किया जा सकता है।

निवेश की जल्द वापसी: शुरुआत में इन हाई-टेक मशीनों और तकनीक को खरीदने का खर्च काफी ज्यादा होता है। कई बार यह तकनीक खुद मशीन की कीमत के बराबर होती है)। लेकिन इसका रिटर्न ऑन इन्वेस्टमेंट (आरओआई) इतना ज्यादा है कि इस तकनीक पर किए गए खर्च की भरपाई महज 6 से 7 महीनों में हो जाती है।

सामग्री की बर्बादी और री-वर्क का अंत: 3डी ऑटोमेटेड मशीन गाइडेंस तकनीक रियल-टाइम डेटा पर काम करती है। इससे सड़क की खुदाई, भराई और डामर बिछाने का काम बेहद सटीकता से होता है। इससे निर्माण सामग्री की बर्बादी रुकती है और काम में हुई गलती को सुधारने के लिए उसे दोबारा करने का खर्च बचता है।
श्रम लागत में कमी: ऑटोमेशन (स्वचालन) के कारण ऑन-साइट काम में हाथ से काम करने वालों (मैनपावर) की जरूरत कम हो जाती है, जिससे लेबर कॉस्ट घटती है और काम की गति बढ़ती है।

रखरखाव खर्च में कमी: चूंकि इस तकनीक से बनाई गई सड़कों की गुणवत्ता, परत की मोटाई और मिट्टी का दबाव बिल्कुल सटीक होता है, इसलिए सड़क की उम्र और टिकाऊपन काफी बढ़ जाता है। इससे सड़क के लाइफसाइकिल और भविष्य के रखरखाव पर होने वाला भारी खर्च कम हो जाता है।

भारत में इस तकनीक का क्या है भविष्य?
लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेस-वे की सफलता के बाद सरकार इसे पूरे देश में लागू करने की ठोस तैयारी कर रही है। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं में एआईजीएमसी को अपनाने के लिए 2025 की शुरुआत में एक व्यापक मसौदा (ड्राफ्ट) नीति पेश की है। सरकार की योजना है कि भविष्य में बनने वाले अन्य सभी ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे और एक्सेस-नियंत्रित कॉरिडोर के निर्माण में इसी तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा।

विजन 2047 और बड़े लक्ष्य: भारत सरकार विजन 2047 और भारतमाला परियोजना के तहत 2047 तक 45,000 किलोमीटर के नए राजमार्ग बनाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य लेकर चल रही है। इन मशीनों की गति और सटीकता का लाभ उठाकर भारत का लक्ष्य अपने लॉजिस्टिक्स (माल ढुलाई) खर्च को जीडीपी के 14% से घटाकर 9% तक लाना है।

बीआरओ के साथ सीमाई सड़कों के विकास की योजना: इस नीति का दायरा केवल एनएचएआई तक ही सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसे रक्षा मंत्रालय के तहत आने वाले सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) के साथ मिलकर भी लागू किया जाएगा। इससे सीमावर्ती और दुर्गम इलाकों में भी तेजी से बेहतर सड़कें बन सकेंगी।

चरणबद्ध रोडमैप लाने की तैयारी: सरकार इस तकनीक को चरणबद्ध तरीके से लागू करेगी। शुरुआत में सीमित मशीनों का उपयोग करके मॉड्यूलर सिस्टम स्थापित किए जाएंगे और धीरे-धीरे इसे सड़क निर्माण उद्योग का एक अनिवार्य मानक बना दिया जाएगा।

कार्बन क्रेडिट्स और हरित निर्माण को बढ़ावा: भविष्य में एआईजीएमसी तकनीक को कार्बन ट्रेडिंग प्रणाली से जोड़ने का भी प्रस्ताव है। इससे सड़क निर्माण में कार्बन क्रेडिट्स दिए जा सकेंगे, जो ठेकेदारों को पर्यावरण के अनुकूल और टिकाऊ निर्माण के लिए प्रोत्साहित करेंगे। इसके अलावा इलेक्ट्रिक और हाइड्रोजन से चलने वाली मशीनों को भी बढ़ावा दिया जा रहा है।
कौशल विकास का मौका: चूंकि यह तकनीक पुरानी मैन्युअल लेबर की जगह ऑटोमेशन और डेटा पर निर्भर करती है, इसलिए भविष्य में वर्कफोर्स की ट्रेनिंग और स्किल डेवलपमेंट पर भारी निवेश किया जाएगा। इससे निर्माण क्षेत्र युवाओं के लिए अधिक आकर्षक बनेगा और लाखों नए तकनीकी रोजगार के अवसर पैदा होंगे।

डेटा-संचालित सड़क प्रबंधन: इन इंटेलिजेंट मशीनों से जो सटीक डेटा मिलेगा, उसका इस्तेमाल भविष्य में सड़क प्रबंधन प्रणाली का आधार तैयार करने के लिए किया जाएगा। इससे बनने के बाद भी सड़क की सेहत और रखरखाव पर रीयल-टाइम नजर रखी जा सकेगी।

You Might Also Like

Unnao News: रोजगार मेले में पहुंचे 400 प्रतिभागी, 79 का चयन

लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे पर टोल दरें जारी

राम मंदिर दान गबन मामले में कार्रवाई न होने पर वकीलों का प्रदर्शन, मुकदमा दर्ज करने की मांग

उन्नाव में ट्रैक्टर की टक्कर से स्कूटी सवार बीए छात्रा की मौत, कोचिंग से लौटते समय हुआ हादसा

Unnao News: जनपद के 2258 स्कूल को शत-प्रतिशत निपुण बनाने का लक्ष्य

TAGGED:उन्नाव
Previous Article Unnao News: 16 ब्लॉक और शहर में सिर्फ छह बीईओ
Next Article साक्षी महाराज का तंज: गिरगिट की तरह रंग बदल रहे विपक्षी

ताजा खबरें

Unnao News: रोजगार मेले में पहुंचे 400 प्रतिभागी, 79 का चयन

14 minutes पहले

लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे पर टोल दरें जारी

17 minutes पहले

राम मंदिर दान गबन मामले में कार्रवाई न होने पर वकीलों का प्रदर्शन, मुकदमा दर्ज करने की मांग

21 minutes पहले

उन्नाव में ट्रैक्टर की टक्कर से स्कूटी सवार बीए छात्रा की मौत, कोचिंग से लौटते समय हुआ हादसा

23 minutes पहले

Unnao News: जनपद के 2258 स्कूल को शत-प्रतिशत निपुण बनाने का लक्ष्य

28 minutes पहले

सपा और कांग्रेस को राम का नाम लेने का नैतिक अधिकार नहीं: साक्षी महाराज

31 minutes पहले

रसौली रेलवे स्टेशन पर बड़ा हादसा: मालगाड़ी के डिब्बे पर चढ़ा युवक हाईटेंशन लाइन की चपेट में आया, गंभीर रूप से झुलसा

35 minutes पहले

बाराबंकी में विवादित होर्डिंग से गरमाई सियासत, सपा कार्यकर्ताओं ने किया विरोध

39 minutes पहले

खेत की रखवाली कर रहे 70 वर्षीय किसान की झोपड़ी में जलकर मौत, जांच में जुटी पुलिस

45 minutes पहले

हर बच्चा विद्यालय जाए, तभी बनेगा आत्मनिर्भर भारत’: धनघटा में स्कूल चलो अभियान रैली निकली

51 minutes पहले
Advertisement

Get Connected with us on social networks

X-twitter Threads

Popular Categories

  • होम
  • उत्तर प्रदेश
  • देश
  • राजनीति
  • स्पॉटलाइट
  • खेल
  • विदेश
  • क्राइम
  • हैल्थ
  • एजुकेशन/करियर
  • धर्म
  • बिज़नेस
  • मनोरंजन
  • टेक्नोलॉजी

Download APP

  • About Us
  • Privacy Policy
  • Editorial Policy
  • Terms and Condition
  • Ownership Funding Disclosure
  • Contact us
आभार एवं धन्यवाद!
अमृत उजाला डिजिटल न्यूज़ प्लेटफॉर्म के सफल शुभारंभ के अवसर पर मैं उन सभी सम्मानित अतिथियों, शुभचिंतकों, सहयोगियों, पत्रकार साथियों, विज्ञापनदाताओं एवं पाठकों का हृदय से आभार व्यक्त करता हूँ, जिन्होंने अपने स्नेह, विश्वास और शुभकामनाओं से हमें प्रेरित किया।

आपके सहयोग और समर्थन ने हमारे इस नए प्रयास को शक्ति प्रदान की है। हमारा संकल्प है कि हम निष्पक्ष, विश्वसनीय और जनहित से जुड़ी खबरों को सबसे पहले और सबसे बेहतर तरीके से आप तक पहुँचाते रहेंगे।

आपका विश्वास ही हमारी सबसे बड़ी पूंजी है।

सादर,
डॉ. अखंड प्रताप सिंह
एडिटर इन चीफ एवं सीईओ
अमृत उजाला डिजिटल न्यूज़ नेटवर्क
“अब सच की रोशनी, हर जिले में”

डॉ. अखंड प्रताप सिंह

Welcome Back!

Sign in to your account

Lost your password?