केरल की नई यूडीएफ सरकार ने अपना पहला बजट पेश कर दिया है। वित्त मंत्री और मुख्यमंत्री वी. डी. सतीशन ने ऐसे समय में बजट रखा है जब राज्य पर 5.07 लाख करोड़ रुपये का कर्ज है और सरकार राजस्व की कमी से भी जूझ रही है। इसके बावजूद सरकार ने स्वास्थ्य, शिक्षा, रोजगार, किसानों, महिलाओं और बुजुर्गों के लिए कई बड़ी घोषणाएं की हैं।
सबसे ज्यादा बजट किन क्षेत्रों को मिला?
इस बार सबसे अधिक बजट लोक निर्माण विभाग (PWD) को दिया गया है।
- लोक निर्माण विभाग (सड़क और पुल) – ₹5,952 करोड़
- अनुसूचित जाति उपयोजना – ₹2,979 करोड़
- ग्रामीण विकास – ₹2,138 करोड़
- स्वास्थ्य एवं चिकित्सा – ₹2,076 करोड़
- परिवहन – ₹1,578 करोड़
- कृषि एवं संबद्ध क्षेत्र – ₹1,535 करोड़
- सामान्य शिक्षा – ₹1,478 करोड़
- ऊर्जा क्षेत्र – ₹1,285 करोड़
- उद्योग क्षेत्र – ₹1,115 करोड़
सरकार का संदेश साफ है कि बुनियादी ढांचे, स्वास्थ्य और रोजगार सृजन को विकास की धुरी बनाया जाएगा।
‘मिशन समुद्र’ बना बजट का सबसे बड़ा आकर्षण
बजट की सबसे चर्चित घोषणा ‘मिशन समुद्र’ है। इसके लिए 400 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं।
इस योजना के तहत केरल के 600 किलोमीटर लंबे समुद्री तट, बंदरगाहों और जलमार्गों को जोड़कर अगले पांच वर्षों में राज्य को समुद्री अर्थव्यवस्था का बड़ा केंद्र बनाने की तैयारी है।
सरकार विजिंजम बंदरगाह को भारत का पहला “ग्रीन बंकरिंग पोर्ट” बनाने की दिशा में भी काम करेगी। अलप्पुझा को “ब्लू इकोनॉमी कैपिटल” के रूप में विकसित करने की योजना है।
स्वास्थ्य क्षेत्र में बड़ा दांव
स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत करने के लिए सरकार ने कई महत्वपूर्ण घोषणाएं की हैं।
सबसे बड़ी योजना “ऊमन चांडी स्वास्थ्य बीमा योजना” है, जिसके तहत प्रत्येक पात्र परिवार को 25 लाख रुपये तक का मुफ्त स्वास्थ्य बीमा मिलेगा।
इसके अलावा:
- चार मेडिकल कॉलेजों के उन्नयन के लिए 100 करोड़ रुपये
- कैंसर सेंटर और सुपर स्पेशियलिटी अस्पतालों का विस्तार
- ग्रामीण क्षेत्रों में 10 मोबाइल जांच प्रयोगशालाएं
- मधुमेह पीड़ित बच्चों के लिए विशेष सहायता
रोजगार और उद्योग पर विशेष जोर
राज्य सरकार ने रोजगार बढ़ाने के लिए अगले चरण की औद्योगिक नीति पेश की है।
मुख्य घोषणाएं:
- 10,000 नए MSME स्थापित करने का लक्ष्य
- 100 करोड़ रुपये की MSME ग्रोथ स्कीम
- “इन्वेस्ट केरलम” सिंगल विंडो सिस्टम
- स्पेस टेक्नोलॉजी और निजी सैटेलाइट निर्माण के लिए 5 करोड़ रुपये
- युवाओं के लिए ग्लोबल प्लेसमेंट सेल
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ये योजनाएं जमीन पर उतरती हैं तो राज्य से बाहर रोजगार के लिए पलायन कम हो सकता है।
शिक्षा को वैश्विक स्तर से जोड़ने की तैयारी
केरल नॉलेज वैली के लिए 100 करोड़ रुपये दिए गए हैं।
सरकार विदेशी विश्वविद्यालयों को राज्य में आने की अनुमति देने के लिए कानूनी बदलाव भी करेगी। इसके साथ ही रिसर्च पार्क और अंतरराष्ट्रीय कौशल प्रशिक्षण केंद्र स्थापित किए जाएंगे।
महिलाओं और सामाजिक सुरक्षा पर फोकस
सरकार ने अपनी कल्याणकारी योजनाओं को जारी रखा है।
- सामाजिक सुरक्षा पेंशन 2,000 रुपये प्रतिमाह जारी रहेगी
- महिलाओं को केएसआरटीसी बसों में मुफ्त यात्रा
- आशा कार्यकर्ताओं का मानदेय 9,000 से बढ़ाकर 12,000 रुपये
- आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के मानदेय में 1,000 रुपये की वृद्धि
- देखभाल कार्य (Care Economy) से जुड़ी महिलाओं को 1,000 रुपये मासिक सहायता
किसानों और मछुआरों के लिए क्या है?
कृषि और मत्स्य क्षेत्र को भी बजट में विशेष महत्व मिला है।
- रबर का समर्थन मूल्य बढ़ाकर 250 रुपये प्रति किलो
- डेयरी विकास के लिए 102 करोड़ रुपये
- मत्स्य क्षेत्र के लिए 200 करोड़ रुपये
- मछुआरों के लिए विशेष आवास योजना
- समुद्र में न जा पाने वाले दिनों के लिए मजदूरी सहायता
- नारियल भंडारण केंद्रों की स्थापना
भूमि सुधार 2.0: निवेश बढ़ाने की कोशिश
सरकार ने “लैंड रिफॉर्म्स 2.0” का ऐलान किया है।
इसके तहत:
- सरकारी खाली जमीनों का लैंड बैंक
- व्यावसायिक उपयोग के लिए भूमि परिवर्तन की प्रक्रिया आसान
- बड़े प्रोजेक्ट्स के लिए लैंड पूलिंग व्यवस्था
- भूमि मूल्यांकन में तकनीक का इस्तेमाल
सरकार का दावा है कि इससे निवेश आकर्षित करने और उद्योग लगाने में आसानी होगी।
पर्यटन और फिल्म उद्योग को भी बढ़ावा
पर्यटन को उद्योग का दर्जा देने की दिशा में कदम बढ़ाया गया है।
- पर्यटन क्षेत्र के लिए 325 करोड़ रुपये
- कोच्चि में 100 करोड़ रुपये की लागत से जे.सी. डेनियल इंटरनेशनल फिल्म सिटी
- मुजिरिस हेरिटेज प्रोजेक्ट के लिए 19 करोड़ रुपये
- धार्मिक पर्यटन सर्किट का विकास
चुनौती भी बड़ी, उम्मीदें भी
बजट पेश करते समय सरकार ने स्वीकार किया कि राज्य के सामने वित्तीय संकट गंभीर है। कुल राजस्व का लगभग 77 प्रतिशत हिस्सा वेतन, पेंशन और ब्याज भुगतान में खर्च हो जाता है। इसके बावजूद सरकार ने विकास और कल्याणकारी योजनाओं के बीच संतुलन बनाने की कोशिश की है।
केरल का यह बजट सिर्फ खर्च का दस्तावेज नहीं, बल्कि समुद्री अर्थव्यवस्था, स्वास्थ्य, शिक्षा, पर्यटन और रोजगार के जरिए राज्य की अर्थव्यवस्था को नई दिशा देने का रोडमैप भी है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि इन घोषणाओं को जमीन पर कितनी तेजी और पारदर्शिता से उतारा जाता है, क्योंकि किसी भी बजट की असली सफलता उसके क्रियान्वयन में ही छिपी होती है।







