महाराष्ट्र में दही हांडी उत्सव के बीच अलग-अलग हादसों ने जश्न का माहौल गमगीन कर दिया। पुणे के पिंपरी-चिंचवड़ इलाके में उत्सव के बाद लोहे का ढांचा हटाने के दौरान एक लोहे की रॉड नीचे गिर गई। इसकी चपेट में आने से एक महिला की मौत हो गई। वहीं मुंबई में दही हांडी के दौरान इंसानी पिरामिड बनाने की कोशिश में 22 गोविंदा घायल हो गए।
पुणे में लोहे की रॉड गिरने से महिला की मौत
पिंपरी-चिंचवड़ के सांगवी इलाके में दही हांडी कार्यक्रम खत्म होने के बाद लोहे का ढांचा हटाया जा रहा था। इसी दौरान ऊपर से एक लोहे की रॉड नीचे आ गिरी। रॉड की चपेट में आने से एक महिला गंभीर रूप से घायल हो गई। उसे तत्काल अस्पताल ले जाया गया, लेकिन इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। बताया गया है कि मृतका का बेटा दही हांडी मंडल से जुड़ा हुआ था। हादसे के बाद परिवार में मातम पसर गया।
मुंबई में 22 गोविंदा घायल
मुंबई में भी दही हांडी उत्सव के दौरान कई गोविंदाओं के घायल होने की खबर है। मानव पिरामिड बनाकर ऊंचाई पर टंगी हांडी फोड़ने के दौरान गिरने से दोपहर तक 22 गोविंदा घायल हुए। घायलों को अलग-अलग अस्पतालों में उपचार के लिए ले जाया गया। दही हांडी में ऊंचे मानव पिरामिड बनाए जाते हैं, जिसके कारण हर वर्ष गिरने और चोट लगने की घटनाएं सामने आती हैं। इस साल प्रशासन और नगर निकायों ने संभावित हादसों को देखते हुए पहले से ही चिकित्सा व्यवस्था मजबूत की थी।
अस्पतालों में पहले से की गई थी तैयारी
मुंबई में बीएमसी ने दही हांडी से पहले अपने अस्पतालों में 100 से ज्यादा बेड तैयार रखने की घोषणा की थी। घायल गोविंदाओं के लिए नगर निगम अस्पतालों में मुफ्त इलाज की व्यवस्था भी की गई थी। इसके अलावा राज्य में गोविंदाओं के लिए दुर्घटना बीमा कवर भी बढ़ाया गया है। इस वर्ष दुर्घटना की स्थिति में अस्पताल में भर्ती होने का कवर बढ़ाकर दो लाख रुपये किया गया है, जबकि दुर्घटना में मृत्यु या स्थायी पूर्ण विकलांगता के लिए 10 लाख रुपये तक का कवर है।
जश्न के साथ सुरक्षा पर भी सवाल
दही हांडी महाराष्ट्र की प्रमुख सांस्कृतिक और धार्मिक परंपराओं में शामिल है। हजारों लोग इस उत्सव में हिस्सा लेते हैं और गोविंदा मंडल ऊंचे मानव पिरामिड बनाकर हांडी फोड़ते हैं। लेकिन हर साल होने वाले हादसे आयोजकों और प्रशासन के सामने सुरक्षा को लेकर गंभीर चुनौती खड़ी करते हैं। पुणे में महिला की मौत और मुंबई में गोविंदाओं के घायल होने की घटनाओं ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा किया है कि उत्सव के दौरान सुरक्षा इंतजामों और कार्यक्रम समाप्त होने के बाद ढांचे हटाने की प्रक्रिया को कितना सुरक्षित बनाया जा रहा है।






















