शिक्षक दिवस के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार से सम्मानित शिक्षकों के साथ संवाद किया। इस दौरान शिक्षा, बच्चों के व्यवहार और बदलती जीवनशैली से जुड़े कई अहम मुद्दों पर चर्चा हुई। बातचीत के बीच एक दिलचस्प क्षण तब आया, जब प्रधानमंत्री मोदी ने खुद एक शिक्षिका से बेहतर पब्लिक स्पीकर बनने का तरीका पूछ लिया। प्रधानमंत्री ने शिक्षिका से कहा कि अगर वह उनकी छात्रा होतीं और एक अच्छा वक्ता बनना चाहतीं, तो उन्हें क्या सलाह देतीं। इसके जवाब में शिक्षिका ने कहा कि सबसे पहले आत्मविश्वास जरूरी है और आत्मविश्वास लगातार अभ्यास से आता है।
‘आत्मविश्वास के लिए लगातार अभ्यास जरूरी’
शिक्षिका की बात पर प्रधानमंत्री ने बातचीत को आगे बढ़ाते हुए आत्मविश्वास के महत्व पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि व्यक्ति को खुद पर विश्वास होना चाहिए। आत्मविश्वास के साथ परिस्थितियों को समझकर उनका सामना करने की क्षमता विकसित होती है। प्रधानमंत्री ने महान वक्ता स्वामी विवेकानंद का उदाहरण भी दिया। उन्होंने बताया कि शिकागो में ऐतिहासिक भाषण से पहले विवेकानंद भी घबराए हुए थे। उन्होंने मां सरस्वती का स्मरण किया और अपने भीतर मौजूद शक्ति पर भरोसा करते हुए मंच पर पहुंचे। इसके बाद उनका संबोधन ऐतिहासिक बन गया। मोदी ने कहा कि जीवन में बड़े से बड़ा वक्ता या खिलाड़ी भी हमेशा सफल नहीं होता। असफलता के बाद परिस्थिति का आकलन कर दोबारा प्रयास करना ही आत्मविश्वास की असली पहचान है।
शिक्षकों से बोले- किताब और सिलेबस से आगे बढ़ें
प्रधानमंत्री मोदी ने शिक्षकों से बच्चों को केवल किताबों और निर्धारित पाठ्यक्रम तक सीमित न रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि शिक्षकों को बच्चों की रुचियों, क्षमताओं और उनके सामने आने वाली चुनौतियों को समझने की जरूरत है। उन्होंने बच्चों में जिज्ञासा, रचनात्मकता और आत्मविश्वास बनाए रखने पर जोर दिया। साथ ही अत्यधिक स्क्रीन टाइम को लेकर भी चिंता जताई और बच्चों को खेल तथा अन्य रचनात्मक गतिविधियों से जोड़ने की जरूरत बताई।
शिक्षकों ने साझा किए अपने अनुभव
प्रधानमंत्री के साथ संवाद के दौरान राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार विजेताओं ने अपनी शिक्षण पद्धतियों और छात्रों को पढ़ाई के प्रति रुचि जगाने के लिए अपनाए जा रहे नए तरीकों के बारे में बताया। पीएम मोदी ने शिक्षकों के समर्पण की सराहना करते हुए कहा कि देश के युवाओं को विकसित भारत के लिए तैयार करने की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी शिक्षकों के कंधों पर है। उन्होंने शिक्षकों से अपने सफल प्रयोग और अच्छे तरीकों को एक-दूसरे के साथ साझा करने का भी आग्रह किया।
‘ऑरा’ पर भी हुई मजेदार बातचीत
बातचीत के दौरान एक शिक्षिका ने प्रधानमंत्री के सामने बोलते समय अपनी घबराहट का जिक्र करते हुए उनके ‘ऑरा’ की बात कही। इस पर पीएम मोदी ने हल्के-फुल्के अंदाज में पूछा कि क्या एक अच्छे पब्लिक स्पीकर के लिए ऑरा नहीं होना चाहिए। शिक्षिका ने जवाब दिया कि प्रधानमंत्री का ऑरा पहले से ही है। इस पर मोदी ने मजाकिया अंदाज में कहा कि फिर लोग उनकी बात सुनने के बजाय उनका ऑरा ही देखते रह जाएंगे। इस बातचीत से माहौल काफी सहज और खुशनुमा हो गया। प्रधानमंत्री ने शिक्षक दिवस के अवसर पर शिक्षकों के योगदान को राष्ट्र निर्माण के लिए महत्वपूर्ण बताते हुए पूर्व राष्ट्रपति और महान शिक्षाविद डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन को भी श्रद्धांजलि दी।






















