अवैध प्रवासियों और जाली दस्तावेजों पर सख्ती, पासपोर्ट को नागरिकता की ढाल नहीं बनाया जा सकता
नई दिल्ली। पासपोर्ट को नागरिकता का अंतिम प्रमाण मानने और विभिन्न सरकारी योजनाओं में इसके उपयोग को लेकर बढ़ रही भ्रांतियों के बीच केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि भारतीय पासपोर्ट केवल एक यात्रा दस्तावेज है। इसे भारतीय नागरिकता का निर्णायक अथवा अंतिम प्रमाण नहीं माना जाना चाहिए।
विदेश मंत्रालय की ओर से पासपोर्ट एवं मोबिलिटी इकोसिस्टम पर आयोजित एक विस्तृत ब्रीफिंग के दौरान अधिकारियों ने कहा कि भारतीय पासपोर्ट भारतीय नागरिकों को ही जारी किया जाता है, लेकिन इसका मुख्य उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय यात्रा को सुगम बनाना और विदेशों में धारक की पहचान स्थापित करना है। इसे नागरिकता संबंधी विवादों या दावों में अंतिम कानूनी दस्तावेज के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया कि यदि किसी व्यक्ति ने जाली दस्तावेजों अथवा गलत जानकारी के आधार पर पासपोर्ट प्राप्त किया है, तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है। अधिकारियों ने कहा कि नागरिकता का निर्धारण संबंधित कानूनों, अभिलेखों और सक्षम प्राधिकारियों द्वारा उपलब्ध तथ्यों के आधार पर किया जाता है।
सरकार ने यह भी संकेत दिया कि अवैध प्रवासियों और फर्जी दस्तावेजों के माध्यम से पहचान स्थापित करने के प्रयासों पर निगरानी बढ़ाई जा रही है। ऐसे मामलों में पासपोर्ट को नागरिकता का स्वतः प्रमाण मानकर संरक्षण नहीं दिया जा सकता।
विदेश मंत्रालय के इस स्पष्टीकरण को नागरिकता, पहचान और सरकारी योजनाओं में दस्तावेजों के उपयोग से जुड़े बढ़ते भ्रम को दूर करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।








