सदर मालखाने से कैसे गायब हुए मुकदमे के जेवरात? जांच में सामने आई चौंकाने वाली सच्चाई
सुल्तानपुर। सदर कोतवाली के मालखाने से एक मुकदमे से संबंधित जेवरात गायब होने के मामले में पुलिस जांच पूरी हो गई है। लंबे समय से चर्चा में रहे इस प्रकरण में जांच अधिकारियों ने महत्वपूर्ण निष्कर्ष सामने रखते हुए अंतिम रिपोर्ट न्यायालय को भेज दी है। जांच में यह तथ्य सामने आया है कि जेवरात से जुड़ी ‘पीएम पोटली’ वर्षों पहले मालखाने से गायब हुई थी और इसके लिए जिम्मेदार माने जा रहे दोनों तत्कालीन कर्मचारी अब जीवित नहीं हैं।
क्या है पूरा मामला?
पुलिस के अनुसार, इस मामले में तत्कालीन हेड मोहर्रिर सुधीर कुमार की तहरीर पर कोतवाली सदर में वर्ष 2025 में भारतीय दंड संहिता की धारा 409 के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था। मामले की विवेचना उपनिरीक्षक अरविंद कुमार तिवारी द्वारा की गई।
जांच के दौरान पता चला कि यह प्रकरण वर्ष 2007 में दर्ज एक पुराने मुकदमे से जुड़ा है। उस मुकदमे में मृतका के शव से बरामद कपड़ों और जेवरात को एक ‘पीएम पोटली’ के रूप में मालखाने में जमा कराया गया था।
जांच में क्या आया सामने?
विवेचना के दौरान मालखाने के अभिलेखों और चार्ज संबंधी दस्तावेजों की पड़ताल की गई। जांच में सामने आया कि संबंधित पीएम पोटली का प्रभार तत्कालीन हेड मोहर्रिर चंद्रिका प्रसाद के पास था। वर्ष 2009 में उनके निधन के बाद मालखाने का कार्यभार अन्य कर्मियों को सौंपा गया।
पुलिस के अनुसार, चंद्रिका प्रसाद के बाद हेड मोहर्रिर रहे रामबक्श पाल का भी निधन हो चुका है। वहीं अभिलेखों में यह भी दर्ज है कि उनके बाद नियुक्त हुए हेड मोहर्रिर संजय सिंह को संबंधित पीएम पोटली का चार्ज प्राप्त नहीं हुआ था।
कब गायब हुई पोटली?
जांच में यह निष्कर्ष निकाला गया कि पीएम पोटली चंद्रिका प्रसाद और रामबक्श पाल के कार्यकाल के दौरान ही सदर मालखाने से गायब हुई थी। हालांकि यह स्पष्ट नहीं हो सका कि पोटली किस परिस्थिति में और कब मालखाने से बाहर हुई।
क्यों बंद हुई जांच?
पुलिस का कहना है कि जांच में जिन कर्मचारियों की जिम्मेदारी सामने आई, उनका पहले ही निधन हो चुका है। भारतीय कानून के तहत मृत व्यक्तियों के विरुद्ध आपराधिक मुकदमे की कार्यवाही आगे नहीं बढ़ाई जा सकती। इसी कारण सभी वैधानिक प्रक्रियाओं का पालन करते हुए मामले में अंतिम रिपोर्ट तैयार कर न्यायालय को भेज दी गई है।
पुराने अभिलेखों और मालखाना व्यवस्था पर उठे सवाल
इस प्रकरण ने एक बार फिर पुराने मुकदमों से जुड़े मालखाना रिकॉर्ड और जब्त संपत्तियों की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। हालांकि पुलिस का कहना है कि उपलब्ध अभिलेखों और साक्ष्यों के आधार पर जांच पूरी कर ली गई है और मामले में आगे की कार्रवाई अब न्यायालय के स्तर पर होगी।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, मालखानों में रखे गए मुकदमों से संबंधित सामान की निगरानी और रिकॉर्ड प्रबंधन को और अधिक व्यवस्थित बनाने पर भी जोर दिया जा रहा है, ताकि भविष्य में ऐसी स्थिति उत्पन्न न हो।







