उपजिलाधिकारी स्टेनो 8 साल से एक ही कुर्सी पर
गौरीगंज, अमेठी। जनपद मुख्यालय की गौरीगंज तहसील में भ्रष्टाचार का बड़ा मामला सामने आया है। तहसील में उपजिलाधिकारी के स्टेनो शशि प्रकाश पर एक प्राइवेट व्यक्ति कुलदीप को अपनी कुर्सी पर बिठाकर आम जनता से अवैध वसूली कराने के गंभीर आरोप लगे हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि स्टेनो शशि प्रकाश की कुर्सी पर कुलदीप नामक प्राइवेट व्यक्ति बैठकर उपजिलाधिकारी कार्यालय से संबंधित सभी काम देखता है। जन्म प्रमाण पत्र,जाति प्रमाण पत्र समेत अन्य कार्यों के लिए कुलदीप द्वारा लोगों से मोटी रकम मांगी जाती है। पैसा देने वालों की फाइल आगे बढ़ जाती है, जबकि पैसा न देने वालों की पत्रावलियां महीनों लावारिस पड़ी रहती हैं।स्थानीय निवासी दीपक ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि “कुलदीप के जरिए जो भी पैसा आता है, उसका आधा हिस्सा उपजिलाधिकारी स्टेनो शशि प्रकाश खुद रख लेते हैं।” वहीं एक किसान ने आरोप लगाया कि “मैंने अपनी नातिन का जन्म प्रमाण पत्र बनवाने के लिए कुलदीप को पैसे दिए थे, लेकिन न तो पैसा वापस मिला और न ही प्रमाण पत्र जारी हुआ।जब इस संबंध में स्टेनो शशि प्रकाश से बात की गई तो उन्होंने कथित तौर पर कहा कि “मेरा जो मन वो करूंगा, मैं यहां का प्रशासनिक अधिकारी हूं।” कई मौकों पर शशि प्रकाश को उपजिलाधिकारी की ओर से ज्ञापन लेते हुए भी देखा गया है। पूछने पर वे खुद को “प्रशासनिक अधिकारी” बताते हैं, जबकि तहसील के कर्मचारियों के अनुसार वे उपजिलाधिकारी के स्टेनो हैं।सूत्रों के मुताबिक शशि प्रकाश पिछले 8 वर्षों से गौरीगंज तहसील में ही जमे हुए हैं। शासनादेश के अनुसार ग्रुप सी का कोई भी कर्मचारी 3 साल से अधिक एक ही पटल पर नहीं रह सकता, लेकिन यहां नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। चर्चा है कि उनकी “ऊपर तक लंबी पहुंच” है।राजस्व परिषद उत्तर प्रदेश का स्पष्ट आदेश है कि किसी भी तहसील परिसर में प्राइवेट व्यक्ति को नहीं रखा जाएगा। इसके बावजूद गौरीगंज तहसील में खुलेआम प्राइवेट व्यक्ति से सरकारी काम कराया जा रहा है और गरीब जनता से धन उगाही की जा रही है।
इस संबंध में उपजिलाधिकारी प्रीति तिवारी से पक्ष जानने का प्रयास किया गया, लेकिन संपर्क नहीं हो सका। वहीं जिलाधिकारी अमेठी से जब इस प्रकरण पर बात करने की कोशिश की गई तो उनका पक्ष नहीं मिल सका।तहसील में दलालों के सक्रिय होने से आम जनता में भारी आक्रोश है। लोगों का कहना है कि बिना दलाल के तहसील में कोई काम नहीं होता। पीड़ितों ने मामले की उच्च स्तरीय जांच और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है।








