तेहरान/वॉशिंगटन: जॉर्डन में अमेरिकी सैन्य ठिकाने पर हुए हमले में दो अमेरिकी सैनिकों की मौत के बाद अमेरिका ने ईरान के खिलाफ जवाबी कार्रवाई तेज कर दी है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के निर्देश पर अमेरिकी सेना ने रविवार को लगातार आठवीं रात ईरान से जुड़े सैन्य ठिकानों पर हवाई हमले किए।
अमेरिकी सेना की सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जारी बयान में कहा कि इन हमलों का उद्देश्य होर्मुज जलडमरूमध्य में वाणिज्यिक जहाजों को खतरा पहुंचाने की ईरान की क्षमता को कमजोर करना है। अमेरिका का कहना है कि हाल के दिनों में ईरान की सैन्य गतिविधियों और समुद्री सुरक्षा के लिए बढ़ते खतरे को देखते हुए यह कार्रवाई की गई।
जॉर्डन हमले में दो अमेरिकी सैनिकों की मौत
अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, शुक्रवार को जॉर्डन स्थित अल-अजराक अमेरिकी सैन्य अड्डे पर ईरानी बैलिस्टिक मिसाइल और ड्रोन हमले के दौरान दो अमेरिकी सैनिक मारे गए, जबकि एक सैनिक अब भी लापता है। चार घायल सैनिकों को इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जिन्हें बाद में छुट्टी दे दी गई। मामूली रूप से घायल अन्य सैनिक अपनी ड्यूटी पर लौट चुके हैं।
ईरान का दावा
दूसरी ओर, ईरानी सरकारी मीडिया का दावा है कि जॉर्डन के अल-अजराक बेस पर मौजूद ईंधन भंडारण टैंकों को सफलतापूर्वक निशाना बनाया गया। हालांकि, इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
बढ़ता जा रहा है तनाव
अमेरिका का कहना है कि 28 फरवरी से शुरू हुए इस संघर्ष में अब तक 16 अमेरिकी सैनिकों की मौत हो चुकी है। इससे पहले भी अमेरिका ने ईरान पर होर्मुज जलडमरूमध्य में व्यापारिक जहाजों को निशाना बनाने का आरोप लगाया था। इसके बाद से दोनों देशों के बीच सैन्य कार्रवाई और जवाबी हमलों का सिलसिला लगातार तेज होता जा रहा है।
मुख्य बातें
- जॉर्डन हमले में दो अमेरिकी सैनिकों की मौत, एक अब भी लापता।
- राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के आदेश पर अमेरिका ने ईरान पर नए हवाई हमले किए।
- लगातार आठवीं रात अमेरिकी सैन्य कार्रवाई जारी।
- अमेरिका का दावा—हमलों का उद्देश्य होर्मुज जलडमरूमध्य में ईरान की सैन्य क्षमता को कमजोर करना।
- ईरानी मीडिया ने अल-अजराक अमेरिकी बेस पर ईंधन टैंकों को निशाना बनाने का दावा किया।
- दोनों देशों के बीच सैन्य तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है।







