जज का 10 साल की रेप पीड़ित बच्ची को खास संदेश
नई दिल्ली। दिल्ली की एक ट्रायल कोर्ट की जज ने नाबालिग से दुष्कर्म के मामले में फैसला सुनाने के बाद पीड़ित बच्ची के नाम एक भावनात्मक संदेश लिखा। जज रजनी रंगा ने अपने पत्र में बच्ची के साहस की सराहना करते हुए कहा कि अदालत उसका बचपन वापस नहीं ला सकती, लेकिन उसके साहस को हमेशा याद रखेगी।
दिल्ली हाईकोर्ट ने अब इस संदेश को बच्ची या उसके परिवार तक पहुंचाने का आदेश दिया है। हाईकोर्ट ने इसे ‘मैसेज ऑफ करेज’ यानी साहस का संदेश बताया है। उत्तर-पश्चिम दिल्ली जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (DLSA) को निर्देश दिया गया है कि वह पत्र को प्रिंट कराकर दो सप्ताह के भीतर बच्ची या उसके परिवार को सौंपे।
सात साल की उम्र में हुई थी घटना
मामला 23 जुलाई 2023 का है। उस समय बच्ची सात साल की थी। मामले में सुमित शक्य को आरोपी बनाया गया था। बच्ची आरोपी को ‘अंकल’ कहती थी। सुनवाई के दौरान बच्ची ने अदालत से कहा था कि उसे तब तक जेल में रखा जाए, जब तक वह बूढ़ा न हो जाए।
ट्रायल कोर्ट की अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश (POCSO) रजनी रंगा ने फैसला सुनाते समय इसी बात का उल्लेख करते हुए बच्ची को सीधे संबोधित करते हुए एक संदेश लिखा। दिल्ली हाईकोर्ट के 22 सितंबर 2026 के आदेश के बाद यह संदेश अब बच्ची तक पहुंचाया जाएगा।
‘डियर चाइल्ड’ से शुरू किया जज ने संदेश
जज ने अपने संदेश की शुरुआत ‘डियर चाइल्ड’ से की। उन्होंने बच्ची के अदालत में आकर आरोपी की पहचान करने और अपनी बात बताने के साहस की सराहना की।
संदेश में कहा गया कि बच्ची चुप नहीं रही और उसने अपनी मां को पूरी बात बताई। अदालत ने उसके इस साहस को महत्वपूर्ण माना। जज ने लिखा कि बच्ची की बात सुनी गई और उसकी उस अपील का जवाब अदालत ने अपने फैसले के जरिए दिया है।
‘अंकल’ को लेकर बच्ची की बात का भी जिक्र
जज ने बच्ची की उस बात का भी उल्लेख किया, जिसमें उसने आरोपी को तब तक जेल में रखने की इच्छा जताई थी, जब तक वह बूढ़ा न हो जाए। फैसले में आरोपी को प्राकृतिक जीवन के शेष समय तक कठोर कारावास की सजा सुनाई गई है।
जज ने अपने संदेश में बच्ची को आश्वस्त किया कि दोषी दोबारा उसे, उसकी छोटी बहन या किसी अन्य बच्चे को नुकसान नहीं पहुंचा सकेगा। संदेश के अंत में उन्होंने बच्ची से कहा कि अब वह अपनी जिंदगी जिए, स्कूल जाए, दोस्त बनाए, हंसे, खेले और अपने सपने देखे।
आरोपी को प्राकृतिक जीवन के शेष समय तक जेल
ट्रायल कोर्ट ने सुमित शक्य को 12 वर्ष से कम उम्र की बच्ची के खिलाफ गंभीर यौन अपराध के मामले में POCSO कानून के तहत दोषी ठहराया। अदालत ने उसे प्राकृतिक जीवन के शेष समय तक कठोर कारावास की सजा सुनाई और एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया।
आपराधिक धमकी के मामले में उसे पांच साल की कठोर कैद और 20 हजार रुपये जुर्माने की सजा भी दी गई। दोनों सजाएं साथ चलने का आदेश है।
बच्ची को 10.50 लाख रुपये मुआवजा
ट्रायल कोर्ट ने बच्ची के लिए 10.50 लाख रुपये का मुआवजा तय किया था। दिल्ली हाईकोर्ट ने उत्तर-पश्चिम दिल्ली DLSA के सचिव से मुआवजे के भुगतान की स्थिति पर रिपोर्ट मांगी है। अदालत ने निर्देश दिया है कि संदेश के साथ मुआवजे की राशि भी बच्ची या उसके परिवार तक पहुंचाई जाए। इस मामले में भुगतान की स्थिति पर अगली सुनवाई 4 नवंबर 2026 को होगी।
हाईकोर्ट ने सजा पर रोक और जमानत देने से किया इनकार
आरोपी की ओर से सजा पर तत्काल रोक लगाने और जमानत देने की मांग की गई थी। दिल्ली हाईकोर्ट ने फिलहाल यह राहत देने से इनकार कर दिया। अदालत ने मामले में उपलब्ध साक्ष्यों, जिसमें फोरेंसिक साक्ष्य भी शामिल हैं, पर विचार करने के बाद सजा निलंबित करने के लिए तत्काल हस्तक्षेप नहीं किया।
आरोपी की अपील को 20 जनवरी 2027 को सूचीबद्ध किया गया है।
2024 में दिल्ली में POCSO के 1,553 मामले
NCRB के 2024 के आंकड़ों के अनुसार दिल्ली में POCSO Act के तहत 1,553 मामले दर्ज हुए थे। यह औसतन प्रतिदिन चार से अधिक मामलों के बराबर है। 2024 में दिल्ली में बच्चों के खिलाफ अपराध के कुल 7,662 मामले दर्ज हुए थे।
नोट: नाबालिग पीड़िता की पहचान कानून के तहत संरक्षित है, इसलिए उसकी पहचान से जुड़ी कोई व्यक्तिगत जानकारी प्रकाशित नहीं की गई है।





















