25 घायल; बारिश के बीच संकरे रास्ते में फंसी भीड़, सात गिरफ्तार
कोलकाता। पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता के चोरबागान दुर्गा पूजा पंडाल में शनिवार रात मची भगदड़ में 19 लोगों की मौत हो गई, जबकि 25 लोग घायल हो गए। हादसे के बाद सामने आए वीडियो में बारिश के बीच सैकड़ों लोगों को पंडाल में प्रवेश करने के लिए दौड़ते हुए देखा जा सकता है। पंडाल के अंदर संकरे रास्ते में भीड़ इस कदर फंस गई कि लोगों के लिए हिलना-डुलना भी मुश्किल हो गया। महिलाएं और बच्चे मदद के लिए चीखते नजर आए। घायलों में पांच को गहन चिकित्सा इकाई (आईसीयू) में भर्ती कराया गया है, जबकि एक की हालत गंभीर बताई गई है।
घटना के बाद पुलिस ने पूजा समिति के सचिव और उपाध्यक्ष समेत सात लोगों को गिरफ्तार किया है। मामले में गैर-इरादतन हत्या का मुकदमा दर्ज किया गया है। पश्चिम बंगाल सरकार ने हादसे की जांच के लिए हाईकोर्ट के मौजूदा न्यायाधीश से जांच कराने की बात कही है। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के मुताबिक, जांच समिति की सिफारिशें मिलने के बाद एक से डेढ़ महीने के भीतर रिपोर्ट सार्वजनिक की जाएगी।
बारिश के बीच पंडाल में घुसी भीड़, संकरे रास्ते में फंसे लोग
हादसे से जुड़े 27 सेकेंड के एक वीडियो में बारिश के दौरान बड़ी संख्या में लोगों को तेजी से पंडाल के अंदर जाते हुए देखा जा सकता है। इनमें महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग भी शामिल थे। अधिकांश लोगों के हाथों में छाते थे। वीडियो में प्रवेश द्वार पर भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पर्याप्त सुरक्षाकर्मी नजर नहीं आ रहे हैं।
पंडाल के भीतर का एक अन्य वीडियो भीड़ प्रबंधन की गंभीर स्थिति दिखाता है। संकरे रास्ते में लोग एक-दूसरे से सटकर खड़े थे। भीड़ का दबाव इतना अधिक था कि लोगों को आगे बढ़ने या पीछे हटने की जगह नहीं मिल रही थी। कुछ लोग खुद को गिरने से बचाने के लिए दीवारों का सहारा लेते दिखाई दिए। महिलाओं और बच्चों की चीख-पुकार के बीच लोग बाहर निकलने की कोशिश कर रहे थे।
प्रारंभिक जानकारियों के अनुसार, बारिश के कारण रास्ते में फिसलन भी थी। ऐसे में भीड़ के दबाव और सीमित निकास मार्ग ने स्थिति को और खतरनाक बना दिया। हालांकि, भगदड़ की वास्तविक वजह और घटनाक्रम की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।
भीड़ संभालने के इंतजाम पर उठे सवाल
घटना से पहले पंडाल में भीड़ प्रबंधन को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। वहां मौजूद एक स्थानीय पत्रकार के अनुसार, प्रवेश और निकास का रास्ता संकरा था और लगभग 300 मीटर लंबी कतार को संभालने के लिए केवल दो सुरक्षा गार्ड तैनात थे। रास्ते के बीच में पर्याप्त सुरक्षाकर्मी मौजूद नहीं थे।
प्रत्यक्षदर्शियों के हवाले से बताया गया कि पंडाल के भीतर रोशनी भी कम थी। लोगों को अलग-अलग रास्तों से जाने के निर्देश दिए जा रहे थे, लेकिन भीड़ के अनुपात में सुरक्षा व्यवस्था पर्याप्त नहीं थी। जांच में यह पता लगाना महत्वपूर्ण होगा कि आयोजन स्थल की क्षमता, प्रवेश-निकास मार्ग, पुलिस बल की तैनाती और आपातकालीन निकासी की व्यवस्था निर्धारित मानकों के अनुरूप थी या नहीं।
पंडाल खाली करने की घोषणा के बीच मची अफरातफरी
रिपोर्टों के मुताबिक, हादसे से पहले पंडाल के भीतर माइक से लोगों को बाहर निकलने की घोषणा की जा रही थी। कथित तौर पर कहा गया कि पंडाल की हालत खराब है और उसके गिरने का खतरा हो सकता है। इसके बाद लोगों के बीच बाहर निकलने की जल्दबाजी बढ़ गई।
बताया जा रहा है कि 360 डिग्री आकार में तैयार किए गए पंडाल के भीतर से निकलने का रास्ता संकरा था। बारिश और फिसलन के बीच जब बड़ी संख्या में लोगों ने एक साथ बाहर निकलने की कोशिश की, तो धक्का-मुक्की बढ़ गई। हालांकि, पंडाल की संरचनात्मक स्थिति और घोषणा के कारणों की आधिकारिक पुष्टि जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।
49 रुपये के वीआईपी पास को लेकर भी विवाद
हादसे से पहले कोलकाता और आसपास के 26 बड़े दुर्गा पूजा पंडालों में वीआईपी प्रवेश देने वाले पास फ्लिपकार्ट मिनट्स पर 49 रुपये में उपलब्ध होने की जानकारी सामने आई है। सोशल मीडिया पर कुछ लोगों ने इन पास का प्रचार भी किया था। एक वीडियो में कथित तौर पर वीआईपी पास के जरिए प्रवेश करते हुए भीड़ से बचने का दावा किया गया।
हादसे के बाद इस व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। जांच में यह स्पष्ट करना जरूरी होगा कि वीआईपी पास के जरिए प्रवेश की व्यवस्था किसने तय की थी, इससे पंडाल में आने वाले लोगों की संख्या पर क्या प्रभाव पड़ा और प्रवेश नियंत्रण के लिए क्या इंतजाम किए गए थे। केवल पास की बिक्री को हादसे का कारण मानना उचित नहीं होगा; इसके लिए जांच में सामने आने वाले तथ्यों का इंतजार करना होगा।
बिहार के पिता-पुत्र की भी मौत
इस हादसे में बिहार के मुजफ्फरपुर के अभिषेक कुमार श्रीवास्तव और उनके बेटे आयुष कुमार श्रीवास्तव की मौत की जानकारी सामने आई है। अभिषेक की पत्नी निवा कुमारी भी परिवार के साथ कोलकाता आई थीं। मृतक के भाई राजेश कुमार श्रीवास्तव के मुताबिक, परिवार दुर्गा पूजा देखने के लिए कोलकाता पहुंचा था।
त्योहार के दौरान हुए इस हादसे ने कई परिवारों को गहरे सदमे में डाल दिया है। अस्पतालों और शवगृह के बाहर परिजन अपनों के बारे में जानकारी लेने और शव मिलने का इंतजार करते रहे। पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंपे जाने की प्रक्रिया जारी रही।
घायलों को निजी अस्पताल भेजने पर राजनीतिक विवाद
भगदड़ के बाद घायलों को सरकारी अस्पताल से निजी अस्पताल में स्थानांतरित किए जाने को लेकर भी विवाद खड़ा हो गया। तृणमूल कांग्रेस के प्रवक्ता और विधायक कुणाल घोष ने सवाल उठाया कि कोलकाता मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में इलाज शुरू होने के बाद मरीजों को दूसरे अस्पतालों में क्यों भेजा गया।
कुणाल घोष ने सोशल मीडिया पर आरोप लगाया कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के अस्पताल दौरे के दौरान सरकार की छवि बेहतर दिखाने के उद्देश्य से घायलों को निजी अस्पतालों में स्थानांतरित किया गया। उन्होंने आशंका जताई कि इससे मरीजों से मुलाकात करने और उनकी बात जानने में कठिनाई हो सकती है। ये आरोप तृणमूल कांग्रेस की ओर से लगाए गए हैं; इनके संबंध में स्वतंत्र पुष्टि सामने आना बाकी है।
रविवार सुबह केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह घायलों से मिलने अपोलो अस्पताल पहुंचे। इस बीच घायलों को स्थानांतरित करने के फैसले और इलाज की व्यवस्था को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है।
टीएमसी ने मुख्यमंत्री से मांगा इस्तीफा
तृणमूल कांग्रेस ने हादसे को लेकर भाजपा और राज्य सरकार पर निशाना साधा। पार्टी ने दावा किया कि मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के भतीजे का पंडाल से करीबी संबंध है और पूजा समिति के अध्यक्ष भाजपा विधायक हैं। टीएमसी ने सवाल उठाया कि यदि आयोजन में किसी प्रकार की लापरवाही हुई है, तो जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई कब होगी। पार्टी ने मुख्यमंत्री से इस्तीफे की मांग भी की।
वहीं, कांग्रेस नेता सुमन रॉय चौधरी ने मृतकों और घायलों की संख्या को लेकर सरकार के आंकड़ों पर सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि उनके पास उपलब्ध जानकारी के अनुसार, हादसे में प्रभावित लोगों की संख्या घोषित आंकड़ों से अधिक हो सकती है। इन दावों की पुष्टि के लिए आधिकारिक आंकड़ों और जांच के निष्कर्षों का इंतजार है।
तीन दिन के लिए कुछ इलाकों में प्रतिबंध
कोलकाता के कुछ इलाकों में 18 से 20 अक्टूबर तक भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 163 लागू की गई है। पुलिस आयुक्त के आदेश के अनुसार, प्रतिबंध बोबाजार थाना क्षेत्र के उस हिस्से में लागू होगा, जो कॉलेज स्ट्रीट, सीआर एवेन्यू, कोलूटोला स्ट्रीट और ईडन हॉस्पिटल रोड के बीच आता है।
आदेश के तहत पांच या उससे अधिक लोगों के गैरकानूनी जमावड़े, ल





















