हरीश पाल
बस्ती। अयोध्या से निकट होने के कारण बस्ती जनपद के अनेक स्थान मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम के चरित्र एवं संदर्भों से जुड़े हुए हैं। पुत्र प्राप्ति के लिए अयोध्या के राजा दशरथ द्वारा बस्ती जनपद के मखौड़ा धाम में पुत्रेष्टि यज्ञ कराए जाने के अलावा अन्य स्थान मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम से संबंधित हैं जिसमें राम जानकी मार्ग रामरेखा नदी रहिरहिया अर्थात हरैया आदि प्रमुख हैं। श्री राम जानकी मार्ग पर बस्ती जनपद मुख्यालय से पूरब दक्षिण दिशा में लगभग 35 किलोमीटर दूर देवडाड़ टीला है। जहां पर अयोध्या से बिहार प्रांत के जनकपुर जाते समय भगवान राम की बारात ने रात्रि विश्राम किया था।
कालांतर में थारू जाति के लोगों ने टीले पर अपनी बस्ती बसा ली थी । टीले पर पानी की उपलब्धता के लिए थारू जाति के लोगों ने लगभग डेढ़ मीटर व्यास के आधा दर्जन कुओं का निर्माण किया था। टीले के निकट स्थित हरदही गांव के बुजुर्गों का कहना है की बरसात के मौसम में ज्यादा बारिश होने पर मिट्टी के क्षरण से चादी के सिक्के पाए जाते हैं। यह भी कहा जाता है कि जो व्यक्ति सिक्कों को अपने घर ले जाता है वह आर्थिक रूप से बदहाल हो जाता है।
वर्तमान में टीले पर लगभग तीन दशक पहले भगवान श्री राम के परम भक्त हनुमान जी का एक मंदिर बनाया गया जहां मंगलवार और शनिवार को भक्तों की भारी भीड़ लगती है। कहां है अभी जाता है कि सच्चे मन से मांगी गई हर मुराद पूरी होती है। टीले के संबंध में लोगों में भारी जिज्ञासा है क्योंकि जन श्रुति के अनुसार थारू जाति के लोगों द्वारा तंत्र-मंत्र से तांबे के खड़े क्यों जीवधारी बना दिया गया था जिसमें चांदी के सिक्कों को रखकर वह उन गहरे कुएं मे फेंक देते थे। जरूरत पड़ने पर चांदी के सिक्कों से भरे घड़े को वह कुएं से वापस बुला लेते थे। आवश्यकता के अनुसार रुपया निकल कर घड़े को फिर कुएं में डाल देते थे। इन तमाम जिज्ञासाओं के कारण क्षेत्र के तमाम प्रबुद्ध लोगों के अलावा जनपद के कई अधिवक्ताओं ने पुरातत्व विभाग को पत्र लिखकर टीले की खुदाई करने का आग्रह किया लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। शासन प्रशासन को लिखे गए पत्र का भी कोई परिणाम नहीं निकला इसलिए टीले के रहस्य के बारे में आज भी तमाम तथ्य अंधकार में पड़े हुए हैं।




