ज्योतिषाचार्य-एस.एस.नागपाल
अक्षय तृतीया हर साल वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाता है. इस दिन देवी लक्ष्मी और भगवान विष्णु की पूजा अर्चना की जाती है. अक्षय तृतीया को किए जाने वाले शुभ काम की अक्षय फल प्राप्ति होती है. इस दिन दान करना, सोना और वाहन खरीदना अच्छा होता है.क्योंकि इस दिन अबूझ मुहूर्त रहता है. इस दिन आप किसी नए काम की शुरूआत, विवाह, मुंडन आदि कर सकते हैं. यह तिथि बहुत फलदायी माना जाता है.
इस वर्ष अक्षय तृतीया किस दिन है इसको लेकर कुछ असमंजस है द्रिक पंचांग के अनुसार तृतीया तिथि 19 अप्रैल, रविवार के दिन प्रात: 10 बजकर 49 मिनट पर आरंभ हो जाएगी इसके उपरांत 20 अप्रैल, सोमवार के दिन प्रात: 7 बजकर 27 मिनट तक तृतीया तिथि समाप्त हो जाएगी ।
काशी पंचांग अनुसार तृतीया तिथि 19 अप्रैल, रविवार को दिन में 1 बजकर 01 मिनट आरंभ हो जाएगी इसके उपरांत 20 अप्रैल, सोमवार को प्रात: 10 बजकर 39 मिनट पर तृतीया तिथि समाप्त हो जाएगी । उदयातिथि अनुसार अक्षय तृतीया 20 अप्रैल को है
अक्षय तृतीया 19 अप्रैल रविवार को चूंकि दोपहर मध्याह्वव्यापिनी और प्रदोष व्यापिनी 19 अप्रैल में ही मिलेगी। इसलिए अक्षय तृतीया 19 अप्रैल रविवार को मनाना श्रेष्ठ रहेगा
अक्षय तृतीया स्वयं सिद्व मुहूर्त अबुझ मुहूर्त है। इसमें विवाह, गृह प्रवेश, नया व्यापार आदि सभी कार्य किये जा सकते है। इस दिन परशुराम जयन्ती , त्रेतायुग का प्रारम्भ इसी तिथि को हुआ था। इसे युगादि तिथि भी कहते है। इस दिन भगवान विष्णु एवं लक्ष्मी जी की पूजा की जाती है। भगवान विष्णु के नर नारायण, हयग्रीव अवतार इसी दिन हुआ था। भगवान ब्रहमा जी के पुत्र अक्षय कुमार का जन्म भी इसी दिन हुआ था। श्री बद्रीनारायण के पट भी इसी दिन खुलते है और वृन्दावन में श्रीबिहारी जी के चरणों को दर्शन वर्ष में इसी दिन होता है।
अक्षय तृतीया में तीर्थो में स्नान, जप, तप, हवन आदि शुभ कार्याे का अनंत फल मिलता है। इस दिन किया गया दान अक्षय यानि की जिसका क्षय न हो माना जाता है। पुराणों में भी इस दिन का वर्णन है।



