अमेठी। जिले के जामों थाना क्षेत्र से पुलिस कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करने वाला एक मामला सामने आया है। एक बुजुर्ग व्यक्ति ने आरोप लगाया है कि मुख्यमंत्री पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराने के बाद स्थानीय पुलिस लगातार उसके परिवार पर दबाव बना रही है। पीड़ित का कहना है कि पहले उसकी बेटी के साथ कथित अभद्रता की गई और अब उसे स्वयं निशाना बनाया जा रहा है।
हालांकि, मामले में लगाए गए आरोप अभी एक पक्ष के दावे हैं और उनकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। पुलिस प्रशासन ने शिकायत को संज्ञान में लेते हुए जांच के आदेश दिए हैं।
क्या है पूरा मामला?
जामों थाना क्षेत्र के एक गांव निवासी बुजुर्ग ने पुलिस अधीक्षक को दिए गए प्रार्थना पत्र में आरोप लगाया है कि 18 जून की रात वह अपने रिश्तेदारों से मिलकर लौट रहा था। रास्ते में कुछ पुलिसकर्मियों ने उसे रोक लिया और कथित रूप से मारपीट करते हुए मुख्यमंत्री पोर्टल पर की गई शिकायत वापस लेने का दबाव बनाया।
पीड़ित का दावा है कि यह पूरा विवाद एक भूमि संबंधी मामले से जुड़ा हुआ है, जिसमें उसके रिश्तेदार और गांव के दूसरे पक्ष के बीच लंबे समय से विवाद चल रहा है। आरोप है कि इस मामले में पुलिस एक पक्ष पर समझौते का दबाव बना रही है।
बेटी के साथ कार्रवाई को लेकर भी उठे सवाल
पीड़ित परिवार का आरोप है कि कुछ दिन पहले विवादित भूमि पर चल रही गतिविधियों का वीडियो बना रही उसकी बेटी को पुलिस ने हिरासत में लेकर कार्रवाई की थी। परिवार का कहना है कि उसी घटना के बाद से पुलिस के साथ उनका विवाद बढ़ा।
परिवार का आरोप है कि शिकायतें किए जाने के बाद पुलिस का रवैया और अधिक कठोर हो गया तथा लगातार दबाव बनाया जा रहा है। वहीं स्थानीय लोगों के अनुसार भूमि विवाद को लेकर दोनों पक्षों के बीच काफी समय से तनाव बना हुआ है।
एसपी कार्यालय पहुंचा मामला
कथित उत्पीड़न से परेशान बुजुर्ग ने पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंचकर पूरे घटनाक्रम की शिकायत की और निष्पक्ष जांच की मांग की। शिकायत मिलने के बाद मामले को क्षेत्राधिकारी (सीओ) स्तर पर जांच के लिए भेजा गया है।
पुलिस प्रशासन का क्या कहना है?
पुलिस अधीक्षक ने शिकायत मिलने की पुष्टि करते हुए कहा है कि मामले की जांच संबंधित क्षेत्राधिकारी को सौंपी गई है। जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यदि किसी पुलिसकर्मी द्वारा अनुचित आचरण या उत्पीड़न की पुष्टि होती है तो उसके खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी।
वहीं क्षेत्राधिकारी ने बताया कि सबसे पहले शिकायतकर्ता का विस्तृत बयान दर्ज किया जाएगा, इसके बाद संबंधित पुलिसकर्मियों से भी पक्ष लिया जाएगा और उपलब्ध तथ्यों के आधार पर निष्पक्ष जांच की जाएगी।
जांच के बाद ही सामने आएगी सच्चाई
यह मामला केवल एक व्यक्ति और पुलिस के बीच विवाद भर नहीं है, बल्कि कानून-व्यवस्था और नागरिक अधिकारों से भी जुड़ा प्रश्न बन गया है। एक ओर पीड़ित परिवार पुलिस पर दबाव और उत्पीड़न के गंभीर आरोप लगा रहा है, वहीं दूसरी ओर पुलिस प्रशासन निष्पक्ष जांच का भरोसा दे रहा है।
ऐसे मामलों में अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आता है। फिलहाल सभी निगाहें सीओ स्तर की जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं, जिससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि आरोपों में कितनी सच्चाई है और क्या वास्तव में किसी स्तर पर अधिकारों का दुरुपयोग हुआ है।








