नवमी मुहर्रम पर गूंजीं नौहाख्वानी की सदाएं
एटा/अलीगंज। मुहर्रम की नवमी तारीख पर कस्बा अलीगंज में गम और अकीदत का माहौल और गहरा हो गया। आठवीं मुहर्रम को निकले अलम के जुलूस के बाद गुरुवार को विभिन्न मोहल्लों में मजलिसों का सिलसिला जारी रहा, जहां करबला के मैदान में हजरत इमाम हुसैन और उनके 72 साथियों की शहादत का दर्दनाक मंजर बयान किया गया। मजलिसों में मौजूद अकीदतमंदों की आंखें नम हो गईं और नौहाख्वानी के बीच लोगों ने मातम कर खिराज-ए-अकीदत पेश की।
मेवाती मोहल्ला, काजी मोहल्ला, सराय अगहत और आसपास के क्षेत्रों में दिनभर धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए गए। वक्ताओं ने करबला की कुर्बानी को इंसानियत, सब्र और हक की लड़ाई का सबसे बड़ा पैगाम बताते हुए कहा कि इमाम हुसैन ने अन्याय के सामने झुकने के बजाय शहादत को चुना और पूरी दुनिया को सत्य एवं इंसाफ का रास्ता दिखाया।
नवमी मुहर्रम के अवसर पर अकीदतमंदों ने अलमों की जियारत की तथा यौम-ए-आशूरा की तैयारियों को अंतिम रूप दिया। मोहल्लों में ताजियों और अलमों को सजाने का कार्य भी जारी रहा। शाम ढलते ही मजलिसों में लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी और “या हुसैन” की सदाओं से माहौल गूंज उठा।
आगामी आशूरा जुलूस को लेकर प्रशासन भी पूरी तरह सतर्क दिखाई दिया। उपजिलाधिकारी जगमोहन गुप्ता, क्षेत्राधिकारी राजेश सिंह, कोतवाली प्रभारी राजकुमार तथा कस्बा इंचार्ज मनीष बालियान ने व्यवस्थाओं का जायजा लिया। संवेदनशील स्थानों पर पुलिस बल तैनात रहा, जिससे धार्मिक कार्यक्रम शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो सकें।
कस्बे में नवमी मुहर्रम का दिन करबला की याद, मातम और इमाम हुसैन की कुर्बानी के संदेश के साथ संपन्न हुआ। अब अकीदतमंद यौम-ए-आशूरा के प्रमुख आयोजनों का इंतजार कर रहे हैं, जहां करबला के शहीदों को अंतिम सलाम पेश किया जाएगा।








