अमृत उजाला
लखनऊ। जिला अदालत परिसर में एक वादकारी के साथ कथित मारपीट के मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने कड़ा रुख अपनाया है। कोर्ट ने चार अधिवक्ताओं के लखनऊ जिले के किसी भी न्यायालय परिसर में प्रवेश पर अगली सुनवाई तक रोक लगा दी है। साथ ही उनसे पिछले 10 वर्षों के आयकर रिटर्न, स्वयं और परिवार की चल-अचल संपत्तियों, व्यवसाय तथा पिछले पांच वर्षों में किए गए संपत्ति लेन-देन का शपथपत्र के साथ पूरा विवरण मांगा है।
न्यायमूर्ति राजन राय और न्यायमूर्ति मंजीव शुक्ला की खंडपीठ ने जिला जज की रिपोर्ट और जिला अदालत परिसर के सीसीटीवी फुटेज का अवलोकन करने के बाद यह आदेश पारित किया। जिन अधिवक्ताओं पर अंतरिम कार्रवाई की गई है, उनमें सौरभ कुमार वर्मा, हर्षित पांडेय, यश पांडेय और अभय प्रताप वर्मा शामिल हैं।
कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए इंटेलिजेंस ब्यूरो (आईबी) को भी आरोपित अधिवक्ताओं की पृष्ठभूमि और गतिविधियों की जांच करने का निर्देश दिया है। इसके अलावा जिला जज और पुलिस को आदेश दिया गया है कि घटना में शामिल अन्य महिला और पुरुष अधिवक्ताओं की पहचान कर उनकी विस्तृत रिपोर्ट अगली सुनवाई तक अदालत में प्रस्तुत की जाए।
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने कहा कि न्यायिक व्यवस्था पर कुछ लोगों का वर्चस्व स्वीकार नहीं किया जा सकता। अदालत ने टिप्पणी की कि अधिकांश अधिवक्ता पूरी ईमानदारी और गरिमा के साथ अपना दायित्व निभाते हैं, लेकिन वकीलों के वेश में छिपी कुछ “काली भेड़ों” की पहचान कर उनके खिलाफ कठोर कार्रवाई आवश्यक है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि न्यायिक प्रक्रिया में किसी भी प्रकार का हस्तक्षेप बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
मामले की अगली सुनवाई 24 अगस्त को निर्धारित की गई है, जिसमें जांच रिपोर्ट और अन्य निर्देशों के अनुपालन की समीक्षा की जाएगी।






