Ganesh Chaturthi 2026: भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को भगवान गणेश की स्थापना की जाती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इसी तिथि को मध्याह्न काल में भगवान गणेश का जन्म हुआ था। इसी के चलते हर साल गणेश चतुर्थी से 10 दिवसीय गणेशोत्सव की शुरुआत होती है। इस वर्ष गणेश चतुर्थी का पर्व 14 सितंबर से मनाया जाएगा। भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी तिथि 14 सितंबर को सुबह 7:06 बजे शुरू होगी और 15 सितंबर को सुबह 7:06 बजे समाप्त होगी। उदया तिथि के अनुसार गणेश चतुर्थी 14 सितंबर को ही मनाई जाएगी। इस दिन गणेश पूजन के लिए मध्याह्न का शुभ मुहूर्त सुबह 10:48 बजे से दोपहर 1:16 बजे तक रहेगा।
गणेश चतुर्थी पर बनेंगे खास योग
ज्योतिषाचार्य एस.एस. नागपाल के अनुसार गणेश चतुर्थी के दिन रवि योग का निर्माण होगा, जो 14 सितंबर को दोपहर 1:55 बजे से 15 सितंबर को सुबह 5:52 बजे तक रहेगा। इस दिन चित्रा नक्षत्र दोपहर 1:55 बजे तक रहेगा, इसके बाद स्वाति नक्षत्र शुरू होगा। वहीं ब्रह्म योग दोपहर 12:47 बजे तक रहेगा, इसके बाद इंद्र योग प्रारंभ हो जाएगा।
विघ्नहर्ता हैं भगवान गणेश
धार्मिक मान्यता में भगवान गणेश को विघ्नहर्ता और बुद्धि का देवता माना गया है। ऋद्धि और सिद्धि को उनकी धर्मपत्नियां तथा मूषक को उनका वाहन बताया गया है। मान्यता है कि भगवान गणेश की पूजा करने से कार्यों में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं और सफलता मिलती है। साथ ही ज्ञान, बुद्धि और ऐश्वर्य में वृद्धि होती है। मान्यता है कि भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी से चतुर्दशी तक भगवान गणेश पृथ्वी पर वास करते हैं। इन 10 दिनों के दौरान घरों और सार्वजनिक स्थानों पर गणेश प्रतिमाओं की स्थापना की जाती है। भक्त श्रद्धा और विधि-विधान से भगवान गणेश की पूजा करते हैं। माना जाता है कि गणेश जी की आराधना से जीवन में सुख-समृद्धि आती है और तनाव कम होता है। गणेश चतुर्थी के दिन भगवान गणेश को सिंदूर अर्पित करने के साथ मोदक या लड्डू का भोग लगाया जाता है। महाराष्ट्र में गणेशोत्सव का विशेष उत्साह देखने को मिलता है और वहां 10 दिनों तक यह महोत्सव धूमधाम से मनाया जाता है।
गणेश चतुर्थी पर चंद्र दर्शन न करने की मान्यता
गणेश चतुर्थी के दिन चंद्र दर्शन करना वर्जित माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दिन चंद्रमा के दर्शन करने से मिथ्या कलंक लग सकता है। यदि भूलवश चंद्र दर्शन हो जाए तो श्रीमद्भागवत के दसवें स्कंध के 56वें-57वें अध्याय में वर्णित स्यमंतक मणि की चोरी की कथा का श्रवण करना लाभकारी माना गया है।
ज्योतिषाचार्य एस.एस. नागपाल, स्वास्तिक ज्योतिष केंद्र, अलीगंज, लखनऊ





















