उत्तराखंड के चमोली जिले में शुक्रवार सुबह एक दर्दनाक हादसा हो गया। जंगल में मवेशियों के लिए चारा जुटाने गईं दो महिलाओं का सामना अचानक भालू से हो गया। जान बचाने की कोशिश में दोनों महिलाएं पहाड़ी से नीचे गहरी खाई में जा गिरीं। हादसे में एक महिला की जान चली गई, जबकि दूसरी गंभीर रूप से घायल हो गई। जानकारी के मुताबिक घटना पोखरी तहसील क्षेत्र के सिदेली गांव के पास हुई। बताया जा रहा है कि घटनास्थल गांव से करीब 100 मीटर की दूरी पर है। शुक्रवार सुबह दोनों महिलाएं अपने पशुओं के लिए चारा लेने जंगल की तरफ गई थीं। इसी दौरान अचानक वहां भालू पहुंच गया और महिलाओं पर हमला करने लगा। भालू को सामने देखकर दोनों महिलाएं घबरा गईं और खुद को बचाने के लिए पीछे हटने लगीं। इसी दौरान उनका संतुलन बिगड़ गया और वे पहाड़ी से कई सौ फीट नीचे जा गिरीं। हादसे की सूचना मिलते ही ग्रामीण मौके पर पहुंचे और दोनों को बाहर निकालकर अस्पताल पहुंचाया।
55 वर्षीय महिला की मौत
अस्पताल में डॉक्टरों ने 55 वर्षीय विमला देवी को मृत घोषित कर दिया। चिकित्सकों के अनुसार, अस्पताल लाए जाने से पहले ही उनकी मौत हो चुकी थी। वहीं हादसे में 42 वर्षीय लक्ष्मी देवी को गंभीर चोटें आई हैं। उनकी हालत को देखते हुए प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें श्रीनगर गढ़वाल स्थित बेस अस्पताल रेफर कर दिया गया।
पति ने बताया कैसे हुआ हादसा
विमला देवी के पति चंद्रशेखर के मुताबिक, भालू के हमले से बचने के दौरान उनकी पत्नी खाई में गिर गईं। हादसे में लगी गंभीर चोटों के कारण उनकी जान चली गई।
मौसम ने रोका एयरलिफ्ट, एंबुलेंस से भेजी गई घायल महिला
पोखरी के तहसीलदार रामकिशोर ध्यानी ने बताया कि गंभीर रूप से घायल लक्ष्मी देवी को बेहतर इलाज के लिए बेस अस्पताल पहुंचाने की तैयारी की गई थी। जिलाधिकारी के निर्देश पर एयरलिफ्ट के लिए हेलिकॉप्टर की व्यवस्था भी की गई, लेकिन खराब मौसम के चलते उड़ान संभव नहीं हो सकी। इसके बाद प्रशासन ने एंबुलेंस के जरिए घायल महिला को अस्पताल भेजने की व्यवस्था की। फिलहाल उनका इलाज श्रीनगर गढ़वाल के बेस अस्पताल में कराया जा रहा है।
पहाड़ी इलाकों में बढ़ा जंगली जानवरों का खतरा
इस घटना ने एक बार फिर पहाड़ी क्षेत्रों में जंगल के आसपास रहने वाले लोगों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है। ग्रामीणों का जंगल में रोजाना आना-जाना होता है और कई लोग मवेशियों के लिए चारा जुटाने के लिए अकेले भी निकल जाते हैं। ऐसे में जंगली जानवरों की मौजूदगी उनके लिए बड़ा खतरा बन सकती है। वन क्षेत्रों में जाने वाले लोगों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है। कोशिश होनी चाहिए कि जंगल की ओर अकेले जाने के बजाय समूह में जाएं और आसपास की गतिविधियों पर लगातार नजर रखें। जंगली जानवर दिखाई देने पर घबराकर भागने के बजाय सुरक्षित दूरी बनाए रखना और स्थानीय प्रशासन या वन विभाग को सूचना देना ज्यादा सुरक्षित तरीका है। चमोली की यह घटना पहाड़ों में इंसान और वन्यजीवों के बीच बढ़ते संघर्ष की गंभीर तस्वीर भी सामने रखती है। ग्रामीण इलाकों में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए लोगों को जागरूक करने के साथ-साथ वन विभाग की निगरानी और त्वरित सहायता व्यवस्था को भी मजबूत करने की जरूरत है।





















