मायावती ने तीसरी बार दी जिम्मेदारी
लखनऊ। बहुजन समाज पार्टी (बसपा) प्रमुख मायावती ने अपने भतीजे आकाश आनंद को 31 दिन बाद एक बार फिर पार्टी का राष्ट्रीय संयोजक नियुक्त कर दिया है। मायावती ने 3 सितंबर 2026 को आकाश आनंद को इस पद से हटा दिया था। उस समय उन्होंने कहा था कि आकाश को अभी राजनीतिक रूप से और अधिक परिपक्व होने की जरूरत है।
आकाश आनंद को पार्टी में राष्ट्रीय संयोजक की जिम्मेदारी तीसरी बार मिली है। इससे पहले भी मायावती उन्हें दो बार इस पद से हटा चुकी हैं और दोनों ही मौकों पर उन्हें दोबारा जिम्मेदारी दी गई थी। इस बार उनकी वापसी आकाश आनंद के ससुर और बसपा के वरिष्ठ नेता अशोक सिद्धार्थ के राजनीति से संन्यास लेने के बाद हुई है।
मायावती ने सोमवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर आकाश आनंद को दोबारा जिम्मेदारी दिए जाने की जानकारी साझा की। उन्होंने कहा कि पार्टी में अनुशासन बनाए रखने के लिए पिछले कुछ दिनों में कई सख्त फैसले लिए गए हैं। इन फैसलों में उनके अपने भाई-बहन और उनके परिवार के लोग भी अपवाद नहीं रहे।
मायावती के मुताबिक, आकाश आनंद का पार्टी में व्यक्तित्व काफी हद तक ठीक रहा है, लेकिन पिछले दिनों उनसे जुड़े कुछ कारणों के चलते संगठन में कई जरूरी बदलाव करने पड़े। अंततः उनके ससुर अशोक सिद्धार्थ को राजनीति से संन्यास लेना पड़ा।
मायावती ने बताया, क्यों बदला आकाश का रुख
मायावती ने कहा कि अशोक सिद्धार्थ के राजनीति से अलग होने के बाद आकाश आनंद के व्यक्तित्व और काम करने के तरीके में काफी बदलाव देखने को मिला। इसका उदाहरण हाल में एक्स पर किया गया उनका पोस्ट है, जिसमें उन्होंने बसपा में दोबारा काम करने की इच्छा जताई थी।
2 अक्टूबर को आकाश आनंद ने मायावती को अपना राजनीतिक गुरु, प्रेरणा और ‘बुआ मां’ बताते हुए कहा था कि बसपा ही उनका परिवार है और वह किसी दूसरे राजनीतिक दल में नहीं जाएंगे। उन्होंने अपने ससुर अशोक सिद्धार्थ के राजनीति से संन्यास लेने के फैसले का भी समर्थन किया था। आकाश ने कहा था कि मिशन और पार्टी से बड़ा कोई रिश्ता नहीं हो सकता।
पिता और भाई ने भी जताई सहमति
मायावती ने बताया कि आकाश आनंद के पिता आनंद कुमार और छोटे भाई ईशान आनंद ने भी पार्टी में उनकी वापसी को लेकर सहमति जताई। ईशान आनंद ने कहा कि वह किसी पद की इच्छा के बिना भी पार्टी उन्हें जो जिम्मेदारी देगी, उसे पूरी ईमानदारी और निष्ठा से निभाएंगे।
मायावती ने कहा कि पार्टी के ज्यादातर लोगों की राय थी कि आकाश आनंद को उनकी पहले वाली जिम्मेदारियों के साथ दोबारा काम करने का मौका दिया जाना चाहिए। इसके बाद काफी विचार-विमर्श के बाद उन्हें फिर से बसपा का राष्ट्रीय संयोजक बनाने का फैसला किया गया।
इस घटनाक्रम के साथ आकाश आनंद की बसपा में राजनीतिक भूमिका एक बार फिर महत्वपूर्ण हो गई है। हालांकि, पिछले कुछ समय में उनके और पार्टी नेतृत्व के बीच पैदा हुए मतभेदों के कारण उनकी राजनीतिक सक्रियता लगातार चर्चा में रही है।





















