पहले संवर्धन पूरी तरह रोकने पर अड़ा था वाशिंगटन; अब तय सीमा में रखने पर विचार
वाशिंगटन। ईरान और अमेरिका के बीच सात महीने से जारी युद्ध अब निर्णायक मोड़ की ओर बढ़ता दिख रहा है। मिसाइलों और सैन्य कार्रवाई के बीच दोनों देशों के बीच बातचीत भी तेज हो गई है।
इस बातचीत में सबसे बड़ा पेच ईरान का परमाणु कार्यक्रम है। खासकर यूरेनियम संवर्धन को लेकर दोनों देशों के बीच लंबे समय से टकराव रहा है।
अमेरिका ने अब अपनी प्रमुख शर्त में बदलाव के संकेत दिए हैं। पहले वाशिंगटन ईरान से यूरेनियम संवर्धन पूरी तरह बंद करने की मांग कर रहा था। अब वह संवर्धन को एक निर्धारित सीमा के भीतर रखने के विकल्प पर विचार करता दिख रहा है।
हालांकि इसे अमेरिका की पूरी नरमी नहीं माना जा रहा। वाशिंगटन अब भी ईरान से केवल वादा नहीं, बल्कि जमीन पर ठोस कार्रवाई चाहता है।
60 प्रतिशत संवर्धन पर अमेरिका को आपत्ति
यूरेनियम को अधिक शुद्ध बनाने की प्रक्रिया को संवर्धन कहा जाता है। परमाणु ऊर्जा उत्पादन के लिए इसका इस्तेमाल होता है। लेकिन संवर्धन का स्तर बढ़ने पर परमाणु हथियारों की आशंका भी बढ़ जाती है।
अमेरिका इसी वजह से ईरान के 60 प्रतिशत तक संवर्धित ईंधन को लेकर सवाल उठा रहा है।
अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने रायटर्स से कहा कि अगर ईरान परमाणु हथियार नहीं बनाना चाहता तो उसे इतनी ऊंची क्षमता वाला संवर्धित ईंधन रखने की जरूरत क्यों है।
यही मुद्दा दोनों देशों के बीच बातचीत में सबसे बड़ी अड़चन बना हुआ है।
‘बातों के बदले कार्रवाई नहीं’
अमेरिका की चिंता सिर्फ ईरान के भविष्य के वादों तक सीमित नहीं है। वाशिंगटन चाहता है कि तेहरान परमाणु कार्यक्रम को लेकर वास्तविक और सत्यापन योग्य कदम उठाए।
जेडी वेंस ने संकेत दिया कि केवल भविष्य में संवर्धन कम करने का आश्वासन अमेरिका को स्वीकार नहीं होगा। ईरान को जमीन पर कार्रवाई करनी होगी।
वेंस ने ईरान की निर्णय प्रक्रिया पर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि वाशिंगटन के लिए यह स्पष्ट नहीं है कि तेहरान में अंतिम निर्णय कौन लेता है।
इससे किसी संभावित समझौते को लागू कराने और उसकी निगरानी को लेकर भी सवाल बने हुए हैं।
होर्मुज जलडमरूमध्य भी बना अहम मुद्दा
परमाणु कार्यक्रम के साथ होर्मुज जलडमरूमध्य को दोबारा खोलना भी बातचीत का महत्वपूर्ण हिस्सा बन गया है।
फारस की खाड़ी और अरब सागर के बीच स्थित यह समुद्री मार्ग दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद अहम है। युद्ध के कारण यहां किसी भी तरह की रुकावट का सीधा असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर पड़ सकता है।
रिपोर्टों के मुताबिक, ईरान और अमेरिका ने हाल के सप्ताहों में युद्ध समाप्त करने और होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने को लेकर प्रस्तावों का आदान-प्रदान किया है।
ट्रंप ने खारिज किया ईरान का प्रस्ताव
हालांकि बातचीत के बीच तनाव पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के ताजा प्रस्ताव को खारिज कर दिया है।
उन्होंने सैन्य कार्रवाई बढ़ाने की चेतावनी भी दी है। यानी एक तरफ बातचीत का रास्ता खुला है तो दूसरी तरफ तेहरान पर सैन्य और आर्थिक दबाव भी जारी है।
ऐसे में परमाणु संवर्धन की शर्त में बदलाव को बातचीत में अमेरिका के संभावित पीछे हटने के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।
यदि दोनों देश संवर्धन की सीमा, युद्ध समाप्ति और होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने पर सहमत होते हैं तो सात महीने से जारी संघर्ष को रोकने की दिशा में बड़ा कदम हो सकता है। लेकिन अभी दोनों देशों के बीच अविश्वास और टकराव की स्थिति बनी हुई है।





















