अयोध्या जिले की ग्राम पंचायतों में प्रशासकों के कार्यकाल के दौरान विकास निधि खर्च करने की रफ्तार चर्चा में है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, पिछले चार महीनों में पंचम राज्य वित्त आयोग और 15वें केंद्रीय वित्त आयोग की कुल करीब 78.40 करोड़ रुपये की धनराशि में से लगभग 77.5 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं। तीन अक्टूबर तक ग्राम पंचायतों के खातों में केवल 78.57 लाख रुपये शेष बताए गए हैं। पंचम राज्य वित्त आयोग की धनराशि का 99.29 प्रतिशत और 15वें केंद्रीय वित्त आयोग की राशि का 98.41 प्रतिशत व्यय हो चुका है।
जिले की 772 ग्राम पंचायतों के प्रधानों का कार्यकाल 26 मई को समाप्त हो गया था। इसके बाद प्रदेश सरकार ने ग्राम पंचायतों के संचालन के लिए पूर्व प्रधानों को प्रशासक की जिम्मेदारी सौंपी। नए विकास कार्य शुरू कराने के लिए जिलाधिकारी से अनुमोदन लेने की व्यवस्था है। हालांकि, चार महीने से अधिक समय बीतने के बावजूद किसी भी ग्राम पंचायत से नए कार्य का प्रस्ताव अनुमोदन के लिए नहीं भेजा गया है। ऐसे में ग्राम पंचायतों में पुरानी कार्ययोजनाओं के अधूरे कार्यों पर ही उपलब्ध धनराशि खर्च की जा रही है।
ग्राम पंचायतों में खर्च की जा रही धनराशि से हैंडपंप मरम्मत, इंटरलॉकिंग, नाली निर्माण, रीबोर और परिषदीय विद्यालयों में कायाकल्प से जुड़े कार्य कराए जा रहे हैं। नए कार्यों के प्रस्ताव नहीं आने के कारण विकास की नई योजनाएं शुरू करने की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी है। वहीं, वित्त आयोग की धनराशि का बड़ा हिस्सा खर्च होने से ग्राम पंचायतों के खातों में उपलब्ध शेष राशि भी काफी कम रह गई है।
जिला पंचायतराज अधिकारी नीरज श्रीवास्तव ने बताया कि नए कार्यों के अनुमोदन के लिए ग्राम पंचायतों से अब तक कोई आगणन प्राप्त नहीं हुआ है। हालांकि, इसका यह अर्थ नहीं है कि पंचायतों में काम नहीं हो रहे हैं। उनके अनुसार, प्रशासक प्राथमिकता के आधार पर पुरानी कार्ययोजना के शेष कार्यों को पूरा करा रहे हैं। ऐसे में ग्राम पंचायतों में तेजी से हो रहे खर्च और नए कार्यों के प्रस्ताव नहीं आने की स्थिति चर्चा का विषय बनी हुई है।





















