शाहजहांपुर में एक निजी अस्पताल में सेवारत आयुर्वेद चिकित्सक डॉ. मयंक दीक्षित पर हुए कथित जानलेवा हमले को लेकर आयुर्वेद चिकित्सकों में नाराजगी है। इस मामले को लेकर नीमा (नेशनल इंटीग्रेटेड मेडिकल एसोसिएशन) शाखा के संस्थापक और अखिल भारतीय आयुर्वेद महासम्मेलन के जिलाध्यक्ष डॉ. विजय जौहरी के नेतृत्व में मुख्य चिकित्साधिकारी कार्यालय परिसर में बैठक आयोजित की गई। बैठक में चिकित्सकों ने एकजुटता दिखाते हुए पीड़ित डॉक्टर को न्याय दिलाने की मांग उठाई।
बैठक में चिकित्सकों ने कहा कि जहां लागू शासनादेशों के तहत एलोपैथिक औषधियों के प्रयोग की अनुमति है, वहां निर्धारित प्रावधानों के अनुसार चिकित्सा सेवाएं दी जाती हैं। ऐसे में चिकित्सा सेवाएं प्रदान करने वाले चिकित्सकों की सुरक्षा और सम्मान सुनिश्चित करना जरूरी है। उन्होंने कहा कि किसी भी चिकित्सक के साथ मारपीट, उत्पीड़न या अभद्रता की घटनाओं को गंभीरता से लिया जाना चाहिए।
बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि डॉ. मयंक दीक्षित के समर्थन में यदि कोई आंदोलनात्मक कार्यक्रम आयोजित किया जाता है, तो आयुर्वेद चिकित्सक उसमें पूरी ताकत के साथ शामिल होंगे। चिकित्सकों ने पीड़ित के साथ खड़े रहने और न्याय की मांग को लेकर सामूहिक रूप से संघर्ष करने का संकल्प भी लिया।
डॉ. विजय जौहरी ने कहा कि आयुर्वेद चिकित्सकों की एकता उनकी सबसे बड़ी ताकत है और किसी चिकित्सक के साथ अन्याय या अपमान होने पर संगठन चुप नहीं बैठेगा। उन्होंने चेतावनी दी कि भविष्य में किसी आयुर्वेद चिकित्सक पर हमला होने या उसके खिलाफ अन्यायपूर्ण कार्रवाई किए जाने पर जनपद स्तर पर व्यापक आंदोलन किया जाएगा। बैठक में डॉ. अतुल जौहरी, डॉ. अभिनव सक्सेना, डॉ. रवि सक्सेना, डॉ. रजत सक्सेना, डॉ. हितेश गुप्ता, डॉ. रोहित वर्मा, डॉ. रोहित कुमार, डॉ. राजीव वर्मा, डॉ. मयंक दीक्षित, डॉ. हारिस, डॉ. निर्भय शुक्ला, डॉ. सुधांशु कनौजिया, डॉ. अरविंद यादव, डॉ. जफर बेग और डॉ. शैलेन्द्र रस्तोगी शामिल हुए।





















