लोकसभा सीटें बढ़ाने और परिसीमन विधेयक पर होगी नजर
नई दिल्ली। केंद्र सरकार इसी महीने संसद का विशेष सत्र बुलाने पर विचार कर रही है। इस सत्र में लोकसभा की सीटें बढ़ाने, परिसीमन और महिला आरक्षण लागू करने से जुड़े तीन विधेयक पेश किए जाने की संभावना जताई जा रही है। इनमें संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, परिसीमन (संशोधन) विधेयक और केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक शामिल हैं। हालांकि, विशेष सत्र बुलाने को लेकर सरकार की ओर से अभी आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।
इन विधेयकों को पारित कराने के लिए सरकार को संसद में पर्याप्त समर्थन जुटाना होगा। इससे पहले 16 और 17 अप्रैल को महिला आरक्षण और परिसीमन से संबंधित विधायी प्रस्तावों पर चर्चा तथा मतदान हुआ था, लेकिन सरकार आवश्यक दो-तिहाई बहुमत हासिल नहीं कर सकी थी। अब एक बार फिर इन प्रस्तावों को आगे बढ़ाने की तैयारी की चर्चा है।
अप्रैल में नहीं मिल सका था दो-तिहाई बहुमत
सरकार ने महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़े विधेयकों पर विचार के लिए 15 से 17 अप्रैल तक संसद का विशेष सत्र बुलाया था। उस दौरान मतदान में 528 सांसदों ने हिस्सा लिया था। इनमें 298 सांसदों ने विधेयक के पक्ष में और 230 ने विरोध में मतदान किया था। संविधान संशोधन विधेयक पारित कराने के लिए आवश्यक विशेष बहुमत नहीं मिलने के कारण सरकार को सफलता नहीं मिली थी।
अब चर्चा है कि सरकार ने विधेयकों को पारित कराने के लिए विभिन्न राजनीतिक दलों से संपर्क साधना शुरू किया है। हालांकि, सरकार के पास आवश्यक संख्या में सांसदों का समर्थन जुट जाने की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
तीन विधेयकों के जरिए महिला आरक्षण लागू करने की तैयारी
प्रस्तावित विधायी पहल का उद्देश्य लोकसभा की सीटों की संख्या बढ़ाने, परिसीमन की प्रक्रिया में बदलाव करने और महिला आरक्षण को लागू करने से जुड़ा है। इन मुद्दों पर संसद में राजनीतिक दलों के बीच पहले भी मतभेद सामने आते रहे हैं।
परिसीमन के तहत निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाओं और प्रतिनिधित्व से संबंधित व्यवस्था में बदलाव किया जाता है। लोकसभा की सीटों में संभावित वृद्धि और महिला आरक्षण को इससे जोड़ने पर संसद में व्यापक राजनीतिक बहस होने की संभावना है।
मानसून सत्र के बाद भी नहीं हुआ सत्रावसान
संसद के मानसून सत्र की अंतिम बैठक 13 अगस्त को हुई थी। इसके बावजूद लोकसभा और राज्यसभा का औपचारिक सत्रावसान नहीं किए जाने की बात सामने आई है। सत्रावसान का अर्थ राष्ट्रपति की ओर से संसद के सत्र को औपचारिक रूप से समाप्त करना है।
ऐसी स्थिति में सरकार के लिए उसी सत्र को आगे जारी रखने या अगली बैठकें आयोजित करने का संवैधानिक और संसदीय विकल्प महत्वपूर्ण हो सकता है। विशेष सत्र की संभावित घोषणा से पहले इस प्रक्रिया पर भी नजर रहेगी।
राजनीतिक समीकरणों पर सरकार की नजर
विधेयकों को पारित कराने के लिए सरकार विभिन्न दलों का समर्थन हासिल करने की कोशिश कर सकती है। खबरों के मुताबिक, तमिलनाडु की राजनीति में आए बदलावों के बाद द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (डीएमके) से समर्थन हासिल करने की संभावनाओं पर भी चर्चा है। कुछ छोटे दलों से संपर्क किए जाने की बात भी कही जा रही है।
हालांकि, किसी दल के समर्थन या राजनीतिक गठबंधन में बदलाव से संबंधित दावों की आधिकारिक पुष्टि आवश्यक है। विशेष रूप से संविधान संशोधन विधेयक के मामले में केवल साधारण बहुमत पर्याप्त नहीं होता, बल्कि संविधान के अनुच्छेद 368 के तहत निर्धारित विशेष बहुमत की आवश्यकता होती है।
विशेष सत्र पर टिकी निगाहें
यदि सरकार इसी महीने विशेष सत्र बुलाती है, तो लोकसभा में सीटों की संभावित वृद्धि, परिसीमन और महिला आरक्षण जैसे मुद्दे प्रमुखता से उठ सकते हैं। इन प्रस्तावों का भविष्य सरकार की विधायी रणनीति और विपक्ष सहित अन्य दलों के समर्थन पर निर्भर करेगा।
फिलहाल विशेष सत्र की तारीख और विधेयकों को पेश किए जाने के संबंध में औपचारिक घोषणा का इंतजार है।





















