पीडीडीयू नगर और आसपास के क्षेत्रों में दुर्गा पूजा मेले के दूसरे दिन शुक्रवार को श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। मां दुर्गा के आठवें स्वरूप महागौरी की विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर भक्तों ने पुष्पांजलि अर्पित की और जयकारे लगाए। शाम पांच बजे से पंडालों में दर्शन के लिए श्रद्धालुओं का पहुंचना शुरू हुआ, जो देर रात तक जारी रहा। कई स्थानों पर आधी रात के बाद भी भक्तों की लंबी कतारें लगी रहीं। आकर्षक सजावट, भव्य प्रतिमाओं और धार्मिक स्थलों की तर्ज पर बने पंडालों ने लोगों का ध्यान खींचा।
नगर के इंडियन इंस्टीट्यूट कॉलोनी, मानस नगर, राम मंदिर, परमार कटरा, गल्ला मंडी, जायसवाल भवन, रविनगर, पटेल नगर, गया कॉलोनी, सेंट्रल कॉलोनी, डीजल कॉलोनी, अमोघपुर, चंदासी और पड़ाव सहित कई इलाकों में श्रद्धालुओं की भीड़ रही। सिकटिया स्थित दुर्गाबाड़ी में पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ पूजा-अर्चना की गई। पड़ाव क्षेत्र के मढ़िया गांव स्थित द्वारिकापुरम कॉलोनी में खाटू श्याम मंदिर की तर्ज पर बना पंडाल आकर्षण का केंद्र रहा। समिति के संरक्षक दीपचंद चौरसिया ने बताया कि इसे बंगाल के कारीगरों ने तैयार किया है।
टांडाकला क्षेत्र के सोनबरसा टांडा स्थित श्री बाबा कीनाराम रामशाला परिसर में केदारनाथ धाम की थीम पर पंडाल सजाया गया है। वहीं, चहनिया कस्बे के शिव मंदिर परिसर में आंध्र प्रदेश के प्रसिद्ध मंदिर की तर्ज पर पंडाल तैयार किया गया। रमौली गांव में दुर्गा पूजा का स्वर्ण जयंती वर्ष मनाया जा रहा है, जहां कोलकाता के दक्षिणेश्वरी काली मंदिर की तर्ज पर बने पंडाल को देखने के लिए श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। अलग-अलग धार्मिक स्थलों की झलक दिखाते इन पंडालों ने पूजा उत्सव को खास बना दिया है।
इलिया में 15 पूजा पंडालों पर सुरक्षा जागरूकता बैनर
दुर्गा पूजा के दौरान श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए इलिया थाना क्षेत्र में पुलिस ने विशेष जागरूकता अभियान चलाया। क्षेत्र में स्थापित मां दुर्गा की 15 प्रतिमाओं के पंडालों पर सुरक्षा निर्देशों से संबंधित बैनर लगाए गए हैं। इनमें अग्नि सुरक्षा, विद्युत सुरक्षा, भीड़ प्रबंधन, सीसीटीवी निगरानी और आपातकालीन निकास मार्ग से जुड़े दिशा-निर्देश शामिल हैं। पूजा समितियों से अग्निशमन यंत्र, सुरक्षित बिजली व्यवस्था और प्राथमिक उपचार की सुविधा सुनिश्चित करने की अपील की गई है। थानाध्यक्ष हरि नारायण पटेल ने कहा कि अभियान का उद्देश्य किसी भी अप्रिय घटना को रोकना और श्रद्धालुओं को सुरक्षित माहौल उपलब्ध कराना है.





















